
मंदिर का ढांचा हटा, खड़े हनुमान नहीं हिले
चार दिन के प्रयासों के बाद भी अडिग रही प्रतिमा, अब विशेषज्ञों की निगरानी में होगी तकनीकी जांच
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में सती गेट क्षेत्र स्थित करीब 170 वर्ष पुराने खड़े हनुमान मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने की कार्रवाई के बीच एक असामान्य स्थिति सामने आई है। मंदिर का ढांचा हटा दिया गया, लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा को चार दिनों के लगातार प्रयासों के बावजूद उसके स्थान से नहीं हटाया जा सका।
प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए मशीनरी और तकनीकी संसाधनों की मदद ली गई। आसपास खुदाई कर उसके आधार और जमीन के भीतर की स्थिति को समझने का प्रयास भी किया गया, लेकिन कई कोशिशों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह पर अडिग रही।
अब बल नहीं, तकनीक से होगी जांच
लगातार प्रयासों के बावजूद प्रतिमा नहीं हिलने के बाद अब प्रशासन जल्दबाजी से बचते हुए विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी में है। अत्याधुनिक तकनीक से प्रतिमा के आधार और जमीन के भीतर की संरचना की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किस तरह स्थापित है और उसे स्थानांतरित करना संभव है या नहीं।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। प्राचीन प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
आस्था में इसे माना जा रहा दैवी संकेत
प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर फैलने के बाद क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। कई भक्त इसे हनुमान जी की इच्छा और दैवी संकेत मान रहे हैं। मंदिर के आसपास वानरों की मौजूदगी ने भी लोगों के कौतूहल को बढ़ा दिया है और सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो चर्चा में हैं।
हालांकि प्रतिमा के नहीं हिलने के वास्तविक तकनीकी कारण विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
विकास के साथ विरासत बचाने की चुनौती
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था के विस्तार की जरूरत है, लेकिन शहर की पहचान उसकी प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी है। ऐसे में खड़े हनुमान की प्रतिमा को लेकर सामने आई स्थिति विकास और विरासत के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है।
फिलहाल प्रतिमा अपने स्थान पर ही है। अब सबकी निगाहें विशेषज्ञों की तकनीकी जांच और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
खड़े हनुमान की प्रतिमा का अडिग रहना अब सिर्फ एक मंदिर को हटाने का मामला नहीं, बल्कि उज्जैन की आस्था, विरासत और विकास के बीच संतुलन की परीक्षा बन गया है।