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देवास का गौरव, दुनिया के मंच पर भारत की पहचान! 🇮🇳

इंडोनेशिया के ऐतिहासिक शहर सोलो सिटी में आयोजित आठ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आर्ट कैंप में देवास के चित्रकार जयप्रकाश चौहान ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय ध्वज गर्व से फहराया।

28 देशों के कलाकारों की मौजूदगी में उन्होंने "Rewriting Tomorrow" विषय पर अपने विचार साझा किए और भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

फ्लैग मार्च, कला संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक प्रस्तुतियों के बीच जयप्रकाश चौहान ने देवास और भारत का मान बढ़ाया। यह उपलब्धि न केवल शहर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।

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गरीब परिवारों के सपनों पर संकट!
देवास जिले के ग्राम भीकुपुरा में दो परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनसे प्लॉट के नाम पर ₹10 लाख लेकर ऐसी जमीन बेच दी गई, जो राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है। पीड़ित परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाकर वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन अब बेदखली का डर सता रहा है।
जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत कर परिवारों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या गरीबों के आशियाने के साथ धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।
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अगर यह रिपोर्ट सही है तो वाकई चौंकाने वाली है...
फसल बीमा राशि नहीं मिलने से परेशान भुतियाखुर्द के किसानों ने जनसुनवाई में लगाई गुहार

देवास जिले की सोनकच्छ तहसील के ग्राम भुतियाखुर्द के किसानों ने कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत की कि पिछले वर्ष और वर्तमान वर्ष का फसल बीमा अब तक नहीं मिला है, जबकि वे नियमित रूप से बैंक एवं सोसायटी के माध्यम से बीमा कराते रहे हैं।

किसानों का कहना है कि कई बार पटवारी, बीमा कंपनी और संबंधित बैंकों से संपर्क करने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र किसानों को जल्द से जल्द फसल बीमा राशि दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

जनसुनवाई में बड़ी संख्या में किसानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।

क्या किसानों को समय पर फसल बीमा का लाभ मिलना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

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बिजली कटौती से त्रस्त किसानों का फूटा गुस्सा, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी

बरोठा। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने मंगलवार को बरोठा विद्युत वितरण केंद्र पहुंचकर कनिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती पर कड़ी नाराजगी जताई। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली विभाग लोड शेडिंग और मेंटेनेंस के नाम पर कई-कई घंटों, यहां तक कि 24 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित कर रहा है, जिससे आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है।

ज्ञापन में बताया गया कि लगातार बिजली कटौती से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बारिश के मौसम में बिजली नहीं रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को अत्यधिक बिजली बिल भेजे जा रहे हैं, जिन्हें आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भरने में असमर्थ हैं।

महासंघ ने मांग की कि अघोषित बिजली कटौती तत्काल बंद की जाए, मेंटेनेंस कार्य से पहले उपभोक्ताओं को सूचना दी जाए तथा बढ़े हुए बिजली बिलों की निष्पक्ष जांच कर राहत प्रदान की जाए।

इस दौरान संभागीय अध्यक्ष कैलाश चौधरी, संरक्षक हरि सिंह धाकड़, जिला अध्यक्ष गजराज सिंह पटेल, तहसील अध्यक्ष संतोष जाट, हीराल नागर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी।
देवास जिले में पिछले 24 घंटे में बारिश की स्थिति... देखिए अब तक कहां कितनी हुई बारिश
5 साल से फसल बीमा राशि का इंतजार... आखिर कब मिलेगा किसानों को उनका हक?

देवास जिले की ग्राम पंचायत लिंबोदा और टिगरिया सांचा के अंतर्गत आने वाले नेवरी, लिंबोदा, बोडानी, टिगरिया सांचा और नारंजीपुर के किसानों ने जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पिछले 5 वर्षों से लंबित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि दिलाने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि हर साल उनके खातों से फसल बीमा प्रीमियम काटा गया, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से फसलें खराब होने के बावजूद आज तक किसी को बीमा क्लेम नहीं मिला। कई बार शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं होने से किसानों में गहरा आक्रोश है।

किसानों ने निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द लंबित बीमा राशि दिलाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

क्या किसानों को उनका हक समय पर मिलना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

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राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में देवास की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन

देवास। उज्जैन में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 80 टीमों ने सहभागिता की। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देवास की कवितालय डांस अकादमी की संचालिका एवं प्रशिक्षिका रति राजेश के निर्देशन में प्रशिक्षित छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अनेक प्रथम स्थान प्राप्त कर देवास का गौरव बढ़ाया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने भरतनाट्यम की एकल प्रस्तुति में तीन प्रथम स्थान, डुएट प्रस्तुति में तीन प्रथम स्थान, ट्रायो प्रस्तुति में एक प्रथम स्थान तथा सीनियर ग्रुप डांस में भी एक प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। छात्राओं की इस उपलब्धि ने देवास को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। इस उल्लेखनीय सफलता पर संस्कार भारती, देवास जिला की समस्त कार्यकारिणी की ओर से कवितालय डांस अकादमी की संचालिका एवं प्रशिक्षिका रति राजेश तथा सभी विजेता छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं। कार्यकारिणी ने सभी छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Video 8
न्यू देवास, वार्ड क्रमांक-2 की गंभीर समस्या!

करीब 10 दिनों से चेंबर का गंदा पानी मुख्य सड़क पर बह रहा है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि लीकेज के कारण यही दूषित पानी नल की लाइन तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।

❓क्या नगर निगम किसी बड़े हादसे या बीमारी फैलने का इंतजार कर रहा है?

यदि यह समस्या सही है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच कर समाधान करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।

📍स्थान: न्यू देवास, वार्ड क्रमांक-2

आपकी राय क्या है? क्या इस समस्या का तुरंत समाधान होना चाहिए? अपनी बात कमेंट में जरूर लिखें।

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🐄 गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग तेज
देवास में युवा राधे संस्था के तत्वावधान में निकाली गई ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ रैली के बाद राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
📌 प्रमुख मांगें: 
✅ गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जाए। 
✅ घायल एवं निराश्रित गौवंश के लिए बेहतर गौशालाओं की व्यवस्था हो। 
✅ शासकीय पशु चिकित्सालयों में आधुनिक उपचार, दवाइयां और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएं। 
✅ सड़क हादसों में घायल गौवंश के लिए गौ एम्बुलेंस सेवा शुरू की जाए। 
✅ गौ तस्करी और अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
संस्था का कहना है कि गौवंश भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसके संरक्षण के लिए सरकार और समाज को मिलकर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
आपकी क्या राय है? क्या गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा मिलना चाहिए? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर दें।
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गुरु पूर्णिमा पर आज खास 

देवास के श्री शिलनाथ धुनी संस्थान, मल्हार धुनी परिसर में आज गुरु पूर्णिमा पर्व एवं संस्थान का स्थापना दिवस श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।

प्रातःकाल से पूजन-अभिषेक, आरती एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। सुबह 9:30 बजे महाआरती में संत-महात्मा, गुरु भक्त एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

संस्थान ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर गुरु परंपरा का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।

🕉️ "गुरु ही ज्ञान का प्रकाश हैं, गुरु ही जीवन का आधार हैं।"

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फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही पर सख्त प्रशासन, काम नहीं करने वाले पटवारियों पर होगी कार्रवाई
देवास। जिले में किसानों की जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने के लिए चलाए जा रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान की धीमी प्रगति पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बागली, कन्नौद और खातेगांव तहसीलों में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिलने पर कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने नाराजगी जताई है।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि इन तीनों तहसीलों में कई पटवारियों द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं किया जा रहा है। इस पर कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम को निर्देश दिए कि ऐसे पटवारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने के लिए फार्मर रजिस्ट्री बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव जाकर अभियान को गति दी जाए और सभी पात्र किसानों की रजिस्ट्री समय सीमा में पूर्ण कराई जाए। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग कर प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
शंकरगढ़ पहाड़ी पर 31 जुलाई को होगा वृहद पौधारोपण, हरियाली बढ़ाने की तैयारी तेज
देवास। पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन 31 जुलाई को शंकरगढ़ पहाड़ी पर वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करेगा। सुबह 9 बजे शुरू होने वाले इस अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारियां तेज कर दी हैं। संबंधित विभागों को पौधों की उपलब्धता, गड्ढों की तैयारी, सिंचाई व्यवस्था और पौधों के संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय करना है ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में घने वृक्ष बन सकें। अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
MP- तीन जिलों के कलेक्टर बदले, 8 IAS के तबादले
एशियन जंप रोप चैंपियनशिप के लिए चीन रवाना होंगी देवास की तीन बेटियां
एसपी पुनीत गेहलोद ने देर रात दी शुभकामनाए
श्रुतिका जसोना, आस्था परमार और तनिष्का राव करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व, एसपी बोले— देवास की बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा रही हैं जिले का मान
देवास। चीन के झेजियांग प्रांत के शांग्यू (शाओशिंग) में 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाली एशियन जंप रोप चैंपियनशिप-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही देवास की तीन प्रतिभाशाली खिलाड़ी श्रुतिका जसोना, आस्था परमार और तनिष्का राव विदेश रवाना होने से पहले देर रात पुलिस अधीक्षक श्री पुनीत गेहलोद से सौजन्य भेंट करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने एसपी से आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त किया।
पुलिस अधीक्षक श्री पुनीत गेहलोद ने तीनों खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और खेल भावना के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें तथा भारत, मध्यप्रदेश और देवास जिले का नाम विश्व मंच पर रोशन करें।
एसपी ने कहा कि "देवास की बेटियां अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की पहचान बना रही हैं। हमें विश्वास है कि तीनों खिलाड़ी एशियन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए गौरव का क्षण लेकर लौटेंगी।"
इस अवसर पर श्रुतिका जसोना, आस्था परमार और तनिष्का राव ने पुलिस अधीक्षक का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त कर उनका आभार व्यक्त किया। खिलाड़ियों ने देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और पदक जीतकर लौटने का संकल्प भी दोहराया।
देवास में स्कूल बसों पर परिवहन विभाग की सख्ती, 16 बसों से ₹15 हजार का जुर्माना वसूला
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और पीयूसी की जांच में मिलीं खामियां, अभियान लगातार रहेगा जारी
देवास। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर परिवहन विभाग ने रविवार को देवास शहर में स्कूल बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान बीसीएम स्कूल, किंडर स्कूल, यूनानी कॉलेज, चैतन्य टेक्नो सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप सुरक्षा मानकों की जांच की गई। साथ ही सभी वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी देखे गए। जांच में कमियां मिलने पर 16 बसों के खिलाफ चालानी कार्रवाई करते हुए कुल ₹15 हजार का शमन शुल्क वसूला गया।
जिला परिवहन अधिकारी ने सभी स्कूल बस एवं यात्री बस संचालकों से अपील की है कि वे केवल वैध दस्तावेज, जमा मोटरयान कर और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले वाहनों का ही संचालन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के सभी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।
परिवहन विभाग ने चेतावनी दी है कि यह विशेष जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक होने पर जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी।
करोड़ों की सड़क, सवालों में पुलिया! और भ्रष्टाचार की बू...
निर्माण पूरा होने से पहले ही उखड़ने लगी पुलिया, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा; पीडब्ल्यूडी पर भ्रष्टाचार के आरोप, लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ धरना

दिलीप मिश्रा | देवास

सुनवानी महाकाल गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क और पुलिया अब सवालों के घेरे में है। जिस निर्माण से गांव की तस्वीर बदलने की उम्मीद थी, वही अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गया है। आरोप है कि पुलिया के भराव में तकनीकी मानकों के विपरीत मिट्टी का उपयोग किया गया, जिसके कारण निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही पुलिया में क्षति के संकेत दिखाई देने लगे हैं।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल निर्माण में लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार का भी गंभीर संकेत हो सकता है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को ग्रामीण भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय पहुंच गए और करीब डेढ़ घंटे तक धरना देकर जवाब मांगा।

निर्माण शुरू, लेकिन भरोसा खत्म

ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगभग 800 मीटर सीसी रोड, एक किलोमीटर डामरीकरण और तीन पुलियाओं का निर्माण कराया जा रहा है। शुरुआत से ही निर्माण सामग्री और गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे थे।
भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री शेखर पटेल का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायतें दी गईं, लेकिन किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। जब लगातार अनदेखी होती रही, तब ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

सबसे बड़ा आरोप – पुलिया में मिट्टी भरकर किया निर्माण

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया के अप्रोच और भराव में निर्धारित गुणवत्ता वाली सामग्री की जगह मिट्टी भर दी गई। उसके ऊपर मुरम, गिट्टी और आरसीसी डालकर निर्माण को पूरा करने का प्रयास किया गया।
यदि यह आरोप तकनीकी जांच में सही पाया जाता है, तो यह निर्माण गुणवत्ता के साथ गंभीर समझौता माना जाएगा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ और पुलिया में क्षति दिखाई देने लगी है।
यही वह सवाल है जो पूरे मामले को सामान्य शिकायत से कहीं अधिक गंभीर बना देता है।

सबसे बड़ा सवाल

जो पुलिया अभी बनी भी नहीं, वह टूटने कैसे लगी?

सरकारी निर्माण कार्य वर्षों तक टिकाऊ रहने के लिए बनाए जाते हैं।
ऐसे में यदि निर्माण के दौरान ही पुलिया में दरार, धंसाव या क्षति के संकेत दिखाई देने लगें तो यह कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
• क्या निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग हुआ?
• क्या तकनीकी निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहा?
• क्या विभागीय इंजीनियरों ने गुणवत्ता परीक्षण किया?
• क्या जनता के पैसे से बनने वाला निर्माण केवल औपचारिकता बनकर रह गया?

ग्रामीण बोले – कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चक्काजाम

गुरुवार दोपहर 12:30 बजे से दो बजे तक ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी कार्यालय के बाहर धरना दिया।
ज्ञापन में केवल पुलिया की गुणवत्ता ही नहीं बल्कि कई अन्य समस्याएं भी उठाई गईं—
• वैकल्पिक मार्ग का समुचित निर्माण नहीं किया गया।
• किसानों को खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
• निर्माण के दौरान पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई।
• विभाग शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रहा।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा और चक्काजाम किया जाएगा।

लिखित आश्वासन मिलने पर खत्म हुआ आंदोलन

शुरुआत में अधिकारियों ने केवल मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीण लिखित भरोसे पर अड़े रहे।
अंततः विभाग ने लिखित पत्र जारी कर आश्वासन दिया कि—
• दो सप्ताह के भीतर क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन ठीक कराई जाएगी।
• वर्षा समाप्त होने के बाद पुलिया के अप्रोच में डाली गई मिट्टी हटाई जाएगी।
• शेष निर्माण स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार कराया जाएगा।
इसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यदि वादे पूरे नहीं हुए तो आंदोलन और उग्र होगा।

क्या यह भ्रष्टाचार की आहट है?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है, क्योंकि इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।
लेकिन यदि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही पुलिया क्षतिग्रस्त होने लगे और ग्रामीण लगातार घटिया निर्माण सामग्री के आरोप लगाएं, तो निष्पक्ष तकनीकी जांच अनिवार्य हो जाती है।
सरकारी निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करना केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि संबंधित इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है।

अब इन सवालों के जवाब जरूरी

• पुलिया निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच कौन करेगा?
• क्या निर्माण सामग्री की लैब टेस्टिंग होगी?
• यदि मानकों का उल्लंघन मिला तो ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होगी?
• क्या संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी?
• क्या पूरे निर्माण कार्य का स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट कराया जाएगा?

पक्ष जानने का प्रयास

इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए।

जवाब देही पर प्रश्न चिन्ह

सरकारी धन से बनने वाली सड़कें और पुलियां जनता की सुविधा के लिए होती हैं, न कि कुछ वर्षों या महीनों में मरम्मत की नौबत आने के लिए। यदि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं और पुलिया में क्षति दिखाई देने लगी है, तो यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
Jitu Patwari  Dr Mohan Yadav Collector Dewas PRO Jansampark Dewas
देवास में हरियाली पर आरी?
क्या बिना अनुमति काटे जा रहे हैं पेड़, या नियमों का हो रहा है पालन?
18 मार्च 2026 की अधिसूचना के बाद बदले नियम
 अब रेंज ऑफिसर की अनुमति के बिना नहीं काटा जा सकता वृक्ष
ग्रीन आर्मी ने नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप, वन विभाग को सौंपे वीडियो साक्ष्य
कानून की कसौटी पर विकास कार्य, जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

देवास। शहरों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। सड़क चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों के दौरान अक्सर पेड़ों की कटाई का मुद्दा विवाद का कारण बनता है। देवास में भी इन दिनों यही सवाल चर्चा के केंद्र में है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रही वृक्ष कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ग्रीन आर्मी देवास ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संस्था का आरोप है कि नगर निगम क्षेत्र में कई स्थानों पर वैधानिक अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई की जा रही है, जो कानून का उल्लंघन है।

क्या कहते हैं नए नियम?

मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 18 मार्च 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 के तहत नगरीय क्षेत्रों में वृक्षों की कटाई की प्रक्रिया को और स्पष्ट किया है। अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में किसी भी वृक्ष को काटने या हटाने से पहले संबंधित क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंज ऑफिसर) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। वहीं, अपील की स्थिति में सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारी को अपीलीय प्राधिकारी बनाया गया है।

यानी अब विकास कार्यों के लिए भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना वृक्षों की कटाई नहीं की जा सकती।

ग्रीन आर्मी के आरोप क्या हैं?

ग्रीन आर्मी देवास का दावा है कि शहर में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति नहीं ली गई। संस्था के संयोजक चेतन जैन का कहना है कि उनकी टीम ने कई स्थानों का निरीक्षण कर कथित अवैध कटाई के वीडियो साक्ष्य एकत्रित किए हैं और इन्हें वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिया है।

संस्था का आरोप है कि यदि नगर निगम ने बिना वृक्ष अधिकारी की अनुमति के पेड़ों की कटाई कराई है, तो यह मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 का उल्लंघन है और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों पर कानूनी कार्रवाई होना चाहिए।

कानून क्या कहता है?

कानूनी व्यवस्था का उद्देश्य केवल पेड़ों की सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है। किसी वृक्ष को काटने से पहले उसकी आवश्यकता, विकल्प और पर्यावरणीय प्रभाव का परीक्षण किया जाता है। इसी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है।

यदि किसी मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी भी कार्रवाई का निर्णय जांच और सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही होता है।

अब निगाहें वन विभाग पर

ग्रीन आर्मी द्वारा शिकायत और वीडियो साक्ष्य सौंपे जाने के बाद अब यह मामला वन विभाग के पास पहुंच चुका है। यदि विभाग जांच में आरोपों की पुष्टि करता है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि नगर निगम के पास आवश्यक अनुमति या अन्य वैधानिक दस्तावेज मौजूद हैं, तो जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल

देवास में चल रहे विकास कार्यों के बीच अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या पेड़ों की कटाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है, या फिर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई है? इस सवाल का जवाब अब वन विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही सामने आएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और वीडियो किया जारी... सुनिए क्या कहा प्रधानमंत्री।
आधी रात कन्नौद में बड़ा हादसा टला! 🔥
गणेश चौक स्थित एक मकान में विद्युत फॉल्ट से आग लगी, दो गैस सिलेंडर भी फट गए। धमाकों से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
लेकिन पुलिस पेट्रोलिंग टीम और फायर ब्रिगेड की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। सभी लोगों की जान बच गई और आसपास के घर भी सुरक्षित रहे। 👏🚒👮
"अगर पुलिस की गश्ती टीम की नजर समय पर नहीं पड़ती, तो नुकसान कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता था।"
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मिलावट पर शिकंजा: जिलेभर में डेयरियों पर छापे, जांच के लिए भेजे नमूने
देवास। आगामी त्योहारों के मद्देनज़र खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिलेभर में सघन जांच अभियान चलाया। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने देवास, टोंकखुर्द, सोनकच्छ और कन्नौद क्षेत्र की विभिन्न डेयरियों व प्रतिष्ठानों से दूध, घी सहित अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्रित किए।
देवास में मुकाती दूध डेयरी, महेंद्र दूध डेयरी, श्री कृष्णा दूध भंडार और संजय मिल्क प्रोडक्ट्स प्रा. लि. से दूध के नमूने लिए गए। वहीं टोंकखुर्द, सोनकच्छ और कन्नौद की विभिन्न डेयरियों से भी दूध एवं घी के सैंपल एकत्रित किए गए। सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के दौरान मिलावट पर रोक लगाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
एमपी में पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक न्याय
अब तीन महीने में फैसला, एमपी में बनेंगे 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट
परीक्षा विवादों के त्वरित निपटारे का बड़ा फैसला

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में होंगी विशेष अदालतें

विद्यार्थियों के हित में बनेगी नई SOP

शिक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने का दावा

भोपाल।
 मध्यप्रदेश में परीक्षा और पेपर लीक के मामलों पर अब तेजी से न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा करते हुए कहा है कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में बनने वाली इन विशेष अदालतों में पेपर लीक, परीक्षा विवाद और विद्यार्थियों से जुड़े मामलों का अधिकतम तीन महीने के भीतर निपटारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी तैयार की जाएगी, जिससे परीक्षा संचालन में एक समान और सख्त व्यवस्था लागू हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक की जानकारी सामने आते ही केंद्र सरकार ने तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की और दोबारा परीक्षा आयोजित कराकर अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की।
डॉ. यादव ने दावा किया कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उनके अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। विश्वविद्यालयों की संख्या 641 से बढ़कर 1400 से अधिक हो गई है, जबकि मेडिकल सीटें 50 हजार से बढ़कर एक लाख से अधिक पहुंच गई हैं।
मुख्य बातें
• प्रदेश में बनेंगे 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट।
• भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में होंगी विशेष अदालतें।
• पेपर लीक और परीक्षा विवादों का तीन महीने में निपटारा करने का लक्ष्य।
• परीक्षा प्रणाली के लिए नई SOP तैयार होगी।
• विद्यार्थियों को समयबद्ध न्याय और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था देने पर जोर।
• राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला पहला राज्य होने का दावा।
• मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का दावा।

"पेपर लीक करने वालों पर अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, तीन महीने में न्याय भी मिलेगा" — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा और जंतर-मंतर का आंदोलन
'जंतर-मंतर से सत्ता के गलियारों तक'
कैसे एक महीने के आंदोलन ने बदला देश का राजनीतिक और शैक्षणिक विमर्श

दिलीप  मिश्रा 

नई दिल्ली। देश की राजनीति में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि छात्रों के आंदोलन, एक सामाजिक अभियान और लगातार बने जनदबाव के बाद केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री को पद छोड़ना पड़े। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े ने केवल एक मंत्री का कार्यकाल समाप्त नहीं किया, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या भारत में युवाओं की आवाज़ अब पहले से अधिक प्रभावशाली हो चुकी है।
करीब एक महीने तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले आंदोलन, भूख हड़ताल, संसद मार्च, पुलिस कार्रवाई, विपक्ष की लामबंदी और सरकार के साथ लगातार तीन दौर की बातचीत के बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया। राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफ़ा स्वीकार किए जाने के साथ ही यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित आंदोलनों में दर्ज हो गया।

सोशल मीडिया के व्यंग्य से राष्ट्रीय आंदोलन तक

जिस "कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)" की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य के रूप में हुई थी, वही कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय आंदोलन का चेहरा बन गई।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों के गुस्से को संगठित किया। धीरे-धीरे देशभर के छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दल इस आंदोलन के साथ खड़े होते चले गए।
आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्होंने लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।

नीट पेपर लीक बना आंदोलन की चिंगारी

आंदोलन की मूल वजह केवल एक परीक्षा नहीं थी।
छात्रों का आरोप था कि नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया।
उनकी प्रमुख मांगें थीं—
• शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा
• पेपर लीक की निष्पक्ष जांच
• दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई
• प्रभावित छात्रों को न्याय
• आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता
• आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी

जंतर-मंतर बना लोकतंत्र का प्रतीक

करीब एक महीने तक जंतर-मंतर देश की राजनीति का केंद्र बना रहा।
यहां दिन-रात छात्र डटे रहे।
देशभर से लोग समर्थन देने पहुंचे।
कैंडल मार्च निकले।
सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों ने अभियान को समर्थन दिया।

भूख हड़ताल ने बदली लड़ाई की दिशा

सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
26 दिन तक चले अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती रही।
दिल्ली हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता गया।
आखिरकार दो केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल जाकर उनसे बातचीत करनी पड़ी।

18 जुलाई: जब पुलिस कार्रवाई ने आंदोलन को और बड़ा बना दिया

18 जुलाई आंदोलन का सबसे विवादित दिन साबित हुआ।
सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया।
धरना स्थल हटाया गया।
इसके बाद पूरे देश में सरकार की आलोचना शुरू हो गई।
विपक्ष पूरी तरह आंदोलन के समर्थन में उतर आया।

20 जुलाई: संसद मार्च और लाठीचार्ज

20 जुलाई को हजारों छात्र संसद की ओर बढ़े।
दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाए।
झड़प हुई।
लाठीचार्ज हुआ।
आंसू गैस छोड़ी गई।
कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए।
यहीं से आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।

सरकार का डैमेज कंट्रोल

सरकार ने लगातार कई कदम उठाए—
• केंद्रीय मंत्रियों को वार्ता के लिए भेजा
• संसद में चर्चा का प्रस्ताव दिया
• पेपर लीक पर नया कानून लाने की घोषणा की
• फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्णय लिया
• बाद में शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार किया

तीन दौर की बातचीत के बाद समझौता

जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने आंदोलनकारियों से तीन दौर की बातचीत की।
अंततः सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी।
सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
हालांकि संगठन ने कहा कि शिक्षा सुधार की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

आंदोलन के प्रमुख चेहरे
सोनम वांगचुक
26 दिन का अनशन, आंदोलन का नैतिक चेहरा।
अभिजीत दीपके
सीजेपी के संस्थापक, आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार।

विपक्ष ने बताया लोकतंत्र की जीत

राहुल गांधी ने कहा—
"यह छात्रों की जीत है।"
मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे करोड़ों युवाओं की जीत बताया।
प्रियंका गांधी ने कहा—
"देश के युवाओं ने साबित किया कि अहिंसक संघर्ष से भी बदलाव संभव है।"
अखिलेश यादव ने इसे नई पीढ़ी की जीत बताया।

भाजपा का पक्ष

भाजपा नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना की।
उनका कहना था कि नई शिक्षा नीति लागू कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पार्टी ने कहा कि बड़े हित में लिया गया उनका निर्णय सार्वजनिक जीवन की गरिमा का उदाहरण है।

सरकार ने क्या फैसले किए?

- शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार
- प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार
- पेपर लीक पर कठोर कानून का मसौदा
- फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव
- शिक्षा सुधार पर आगे बातचीत का आश्वासन

10 दिनों की टाइमलाइन जिसने बदल दी राजनीति
15 जुलाई
शशि थरूर ने सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने की अपील की।
16 जुलाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी के निर्देश दिए।
17 जुलाई
दिल्ली पुलिस कमिश्नर बदले गए।
18 जुलाई
वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, देशभर में विरोध तेज।
19 जुलाई
हाईकोर्ट में सुनवाई, राजनीतिक समर्थन बढ़ा।
20 जुलाई
संसद मार्च, लाठीचार्ज, राष्ट्रीय विवाद।
21 जुलाई
विपक्ष का धरना, सरकार से वार्ता।
22 जुलाई
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत आगे बढ़ी।
23 जुलाई
वांगचुक ने 26 दिन बाद अनशन समाप्त किया।
24 जुलाई
पेपर लीक कानून के मसौदे को मंजूरी।
25 जुलाई
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा, आंदोलन समाप्त।

क्या बदल गया?

यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफ़े तक सीमित नहीं रहा।
इसने देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, छात्रों की जवाबदेही, सरकार की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर नई बहस छेड़ दी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल नेतृत्व बदलेगा या शिक्षा व्यवस्था में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।

खास बात-

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण वह संदेश है जो इस आंदोलन ने दिया। युवाओं ने संगठित होकर अपनी आवाज़ राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाई। सरकार ने संवाद का रास्ता चुना और अंततः एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंत्री ने पद छोड़ा।
आने वाले समय में इस आंदोलन का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होगा कि पेपर लीक रोकने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्रों का भरोसा लौटाने के लिए घोषित सुधार ज़मीन पर कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।
"नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0"
एसपी पुनीत गेहलोद ने युवाओं संग खेला वॉलीबॉल....
 खेलों से जुड़ने का दिया संदेश
खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश
खिलाड़ियों को दिलाई शपथ; युवाओं में दिखा उत्साह
देवास। जिले में चलाए जा रहे "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" जनजागरूकता अभियान के तहत शनिवार को वॉलीबॉल, पिट्टू और एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में जिले के विभिन्न विकासखंडों और विद्यालयों के खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद स्वयं पुलिस अधिकारियों के साथ मैदान में उतरे और खिलाड़ियों के साथ वॉलीबॉल मैच खेला। अधिकारियों को अपने बीच खेलते देखकर युवाओं का उत्साह दोगुना हो गया और पूरे आयोजन में सकारात्मक माहौल बना रहा।
इस अवसर पर एसपी पुनीत गेहलोद ने युवाओं से नशे से दूरी बनाकर खेलों को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। यदि युवा खेलों से जुड़ेंगे तो वे नशे जैसी बुराइयों से स्वतः दूर रहेंगे और समाज भी स्वस्थ एवं सुरक्षित बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी खिलाड़ियों को एसपी ने नशामुक्ति की शपथ दिलाई और समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना, नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना रहा।