
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: योग्यता से समझौता कर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार, वैधानिक योग्यता पूरी करना अनिवार्य
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत मौलिक अधिकार है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि निर्धारित वैधानिक योग्यता पूरी किए बिना किसी शिक्षक या ट्यूटर को स्कूल अथवा कॉलेज में नियुक्त नहीं किया जा सकता।
सरकारी नौकरी में समायोजन भी नहीं
पीठ ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति निर्धारित वैधानिक योग्यताओं को पूरा नहीं करता, उसे शिक्षक या ट्यूटर के रूप में नियुक्त करने के साथ-साथ सरकारी नौकरी में समायोजित भी नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में शिक्षा व्यवस्था में योग्य एवं सक्षम शिक्षकों की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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