बीएचयू आयुर्वेद संकाय में महामना के हाथों स्थापित फार्मेसी निजी हाथों में देने की तैयारी
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयुर्वेद संकाय की फार्मेसी निजी हाथों में देने की तैयारी है। लापरवाही और कमीशनबाजी के आरोपों के बीच फार्मेसी की दुर्दशा ने उसे इस हाल में ला दिया है। कभी 250 दवाओं का निर्माण करने वाली फार्मेसी में अब महज 30-35 दवाएं ही बन रही हैं, वह भी अत्यल्प मात्रा में। इससे बीएचयू में आयुर्वेद दवाओं के विक्रय का काउंटर खाली है। आयुर्वेद संकाय की इस फार्मेसी की स्थापना महामना मदन मोहन मालवीय ने स्वयं सन 1932 में की थी। उनका उद्देश्य था भारतीय चिकित्सा पद्धति से बनी सस्ती दवाओं से लोक का कल्याण करना। आयुर्वेद संकाय के रस शास्त्र विभाग द्वारा संचालित इस फार्मेसी में बनी दवाएं शुद्ध और विश्वसनीय मानी जाती थीं, लेकिन जैसा की आरोप लगते रहे हैं कि कमीशन के चक्कर में बीएचयू आयुर्वेद संकाय के डाक्टर ही बाहरी कंपनियों की दवाएं लिखते रहे। इससे फार्मेसी का उत्पादन प्रभावित हुआ और वह घाटे में जाने लगी।
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