
कहानी औरंगाबाद जिले के उस जांबाज़ योद्धा की जिसने मात्र 20 साल की उम्र में दे दी देश के लिए शहादत, जिसने अपने कमांडर का शव लाने घुस गया पाकिस्तान में
The silence media news
औरंगाबाद - कहानी उस जांबाज जवान की जिसने दुश्मन के मांद से अपने कमांडर का शव लाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। जी हां हम कारगिल युद्ध के नायक औरंगाबाद जिले के निवासी शिवशंकर गुप्ता की चर्चा कर रहे हैं। जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने कंपनी कमांडर के मृत शरीर को पाकिस्तानियों के कब्जे से वापस लाने के लिए दुश्मन के खेमे में घुस गए। भारी गोलीबारी के बावजूद हिम्मत नहीं हारा और लांस नायक गणेश प्रसाद यादव के शव को पाकिस्तानी कब्जे से छुड़ा लाया। हालांकि इस दौरान उन्हें कई गोलियां लगी और अंततः शहीद हो गए। उनका कहना था कि उनके कंपनी कमांडर का शव दुश्मन के हाथ में नहीं छोड़ सकते।
देश कारगिल विजय दिवस की 27 वीं वर्षगांठ मना रहा है। जम्मू कश्मीर की कारगिल पहाड़ी की चोटियों पर पुनः कब्जा के लिए लड़ी गई भीषण लड़ाई के बाद 26 जुलाई को अपनी बोरिया बिस्तर छोड़ कर पाकिस्तानी सैनिक भाग खड़े हुए थे। उस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। 27वीं वर्षगांठ पर एक बार फिर शहीदों को हम याद कर रहे हैं। इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे वहीं, 1363 सैनिक घायल हुए थे। शहीद सैनिकों की सूचि में औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड के बंचर गांव निवासी
शिव शंकर गुप्ता भी शामिल थे।
मात्र 20 साल 8 माह की छोटी उम्र में वे शहीद हो गए थे। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर शिवशंकर गुप्ता की शहादत को याद कर परिवार के साथ जिलेवासी भी गर्व महसूस कर रहे हैं।
शहीद के पिता नन्दलाल प्रसाद गुप्ता, भाई शिवदयाल प्रसाद गुप्ता, पत्नी रेखा देवी बेटा राहुल कुमार और बेटी निशा कुमारी ने बताया कि उन्हें शिवशंकर गुप्ता की शहादत पर गर्व है।
शहीद की पत्नी रेखा देवी बताती हैं कि जब शिव शंकर के शहीद होने की खबर आयी तब उनकी गोद में एक साल की बेटी निशा थी जबकि पुत्र राहुल गर्भ में था।
शहीद के पिता नंदलाल गुप्ता और मां पूनम देवी ने बताया कि उन्हें अपनी संतान पर गर्व है कि भारत माँ की लाज बचाते बचाते शहीद हो गया।
पिता नंदलाल गुप्ता बताते हैं कि 6 जून 1999 को एक पत्र आया था। पत्र खोलने पर उसमें एक हजार रुपये और उनके पुत्र की शहादत की खबर थी। पत्र मिलने के एक महीने तक कोई खोज खबर नहीं थी। करीब 35 दिन बाद सेना के कुछ जवान शहीद शिव शंकर के पार्थिव शरीर को लेकर उनके गांव बंचर पहुंचे थे, जहां उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
3 मई 1999 को शुरू हुए इस युद्ध में
21 मई को पाकिस्तानी घुसपैठियों ने बिहार रेजीमेंट की बटालियन पर हमला किया था। अग्रिम पंक्ति को लीड कर रहे लांस नायक गणेश प्रसाद यादव दुश्मनों की गोलियों से शहीद हो गए थे। उस लड़ाई में शिव शंकर गुप्ता भी शामिल थे। वे गणेश प्रसाद के पार्थिव शरीर को लाना चाहा.
4 जून की सुबह शिव शंकर गुप्ता साथी सैनिकों के साथ लांस नायक गणेश यादव का शव लाने के लिए आगे बढ़े। 14 हजार 2 सौ 30 फुट ऊंची पथरीली और बर्फीली पहाड़ी पर रेंगते हुए पहुंच गये। उन्होंने देखा कि कंपनी कमांडर लांस नायक गणेश यादव का शव दुश्मन के बंकर के पास पड़ा है. वे रेंगते हुए बिना आवाज किए वहाँ पहुंचे और हथियार-गोला लेकर नीचे आ गए।
हथियार और गोला नीचे रखकर पुनः शिवशंकर गुप्ता लांस नायक गणेश यादव का शव लाने के लिए पहाड़ी पर चढ़े। 50 मीटर तक पहुंचे ही थे कि दुश्मनों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी। उन्हें गोली लग गई लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी। मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। लगभग 2 घंटे तक दोनों ओर से फायरिंग होती रही।
दुश्मन जब कमजोर पड़े तो फिर वे लांस नायक गणेश प्रसाद यादव के शव के पास पहुंचे और उसे अपने कांधे पर उठाकर वापस आने लगे। तभी पाकिस्तानी सैनिकों ने फिर से गोली चला दी। गोली लगने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लांस नायक गणेश यादव के पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर अपने क्षेत्र में पहुंच गए।
जहां अत्यधिक रक्त स्राव होने के कारण शिव शंकर गुप्ता शहीद हो गए। हालांकि वे अपने जिद में कामयाब रहे कि उनके कंपनी कमांडर गणेश प्रसाद यादव का शव पाकिस्तान कब्जे में नहीं रहने देंगे।
28 अक्टूबर 1996 को भारतीय सेना में बहाल हुए सिपाही शिवशंकर गुप्ता एक वीर और समर्पित सैनिक थे, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें उनकी असाधारण बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत "सेना पदक" से सम्मानित किया गया था।
#KargilVijayDiwas #kargilwar #Kargilshahid #औरंगाबाद #aurangabad #shahidshivshankargupta #thesilencemedianews #rafiganj