फावड़े से हमले का वीडियो होने का दावा, चार दिन से न्याय की गुहार... फिर भी कार्रवाई नहीं!
आखिर किसके संरक्षण में घूम रहे आरोपी?
जनपद जालौन के कदौरा थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित स्वामीदीन पुत्र श्यामलाल, निवासी ग्राम परौसा, का आरोप है कि उसके साथ मारपीट, मकान पर जबरन कब्जे का प्रयास, मोबाइल तोड़ने और जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर घटनाएं हुईं।
पीड़ित का यह भी दावा है कि फावड़े से हमले का वीडियो मौजूद है।
इसके बावजूद कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित के अनुसार उसने लगभग चार वर्ष पूर्व राजबहादुर पुत्र श्यामलाल से मकान खरीदा था।
उसका कहना है कि उसने मकान की मरम्मत कर उसमें अपना सामान रखा हुआ है।
आरोप है कि 28 जून की सुबह जब वह राष्ट्रीय पोलियो अभियान की ड्यूटी पर जाने की तैयारी कर रहा था, तभी कुछ लोग उसके मकान में ताला डालकर कब्जा करने का प्रयास करने लगे।
पीड़ित का आरोप है कि विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और लाठी-डंडों से मारपीट की गई।
बीच-बचाव करने पहुंचे उसके पुत्र और पत्नी को भी पीटा गया तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
इतना ही नहीं, पीड़ित का कहना है कि 112 पर सूचना देने के दौरान उसके पुत्र का मोबाइल भी तोड़ दिया गया, ताकि पुलिस तक सूचना न पहुंच सके।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि पीड़ित ने थाना कदौरा, क्षेत्राधिकारी (सीओ), उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसील दिवस में लगातार शिकायतें दीं, लेकिन उसके अनुसार चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित का यह भी आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए उस पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा है और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
अब इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं—
यदि पीड़ित के पास घटना का वीडियो है, तो उसकी जांच अब तक किस स्तर पर पहुंची?
शिकायतें कई अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
क्या पुलिस जांच कर रही है? यदि हां, तो अब तक उसका परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस अपना पक्ष स्पष्ट क्यों नहीं रख रही?
यदि आरोप सही हैं तो आरोपियों पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
उनका मानना है कि यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस को भी तथ्यों के साथ अपना पक्ष सार्वजनिक करना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो।
यह मामला अब केवल मारपीट या मकान विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनता जा रहा है।
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने के आरोपों ने लोगों के बीच कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।
महत्वपूर्ण सूचना: यह समाचार पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
इस मामले में पुलिस और अन्य संबंधित पक्ष का विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना शेष है।
जांच के बाद तथ्य भिन्न हो सकते हैं।
आपकी क्या राय है?
क्या ऐसे मामलों में शिकायतों का निस्तारण और तेज होना चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
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Kalpi, Jalaun | Jul 3, 2026