विकास के दावों की खुली पोल! बारिश में बुझती रही चिता, टायर के सहारे अंतिम संस्कार
“राम नाम सत्य है…” लेकिन उदयपुर से महज 12 किलोमीटर दूर वानरवाड़ा की ये तस्वीर व्यवस्था के एक कड़वे सच को सामने लाती है। बारिश के बीच एक महिला की अंतिम यात्रा श्मशान पहुंची, लेकिन वहां न छत थी, न बारिश से बचने की व्यवस्था। परिजन और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार की कोशिश की, लेकिन बारिश ने लकड़ियां बुझा दीं। आखिरकार टायर और लकड़ियों के सहारे अंतिम संस्कार करना पड़ा। सवाल ये है कि जब जिंदगी के बाद अंतिम विदाई भी सम्मान से न मिल सके, तो विकास के दावों का क्या मतलब? इलाके में भाजपा के सरपंच, प्रधान, विधायक और सांसद होने के बावजूद ऐसी तस्वीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा—जिम्मेदार इस कड़वे सत्य को कब देखते हैं?
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