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कुछ ही दिनों में चोरी का पर्दाफाश, जालौन पुलिस ने 5 आरोपियों को दबोचा जालौन पुलिस कोतवाली जालौन पुलिस एवं स्वाट/सर्विलांस की संयुक्त टीम ने चोरी की घटना का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से चोरी की घटना से संबंधित 80 हजार रुपये नकद और दो अदद मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। पुलिस के मुताबिक 28 जुलाई 2026 की रात वादी दिलीप कुमार अग्रवाल के घर के सामने स्कूटी पर रखे बैग से अज्ञात चोरों ने रुपये चोरी कर लिए थे। बैग में रखी नकदी चोरी होने की सूचना पर कोतवाली जालौन में मु.अ.सं. 164/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने मामले के खुलासे के लिए टीम गठित कर जांच शुरू की। 03 अगस्त 2026 को कोतवाली जालौन पुलिस एवं स्वाट/सर्विलांस की संयुक्त टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम 1. वासिल पुत्र नाजिम, उम्र करीब 19 वर्ष, निवासी मोहल्ला राजपाट, कस्बा व थाना जालौन। 2. सजल फरीदी पुत्र मोहम्मद सोहेल फरीदी, उम्र करीब 19 वर्ष, निवासी मोहल्ला राजपाट, कस्बा व थाना जालौन। 3. सुफियान उर्फ लक्की पुत्र अनसार, उम्र करीब 22 वर्ष, निवासी मोहल्ला शाहगंज, कस्बा व थाना जालौन। 4. फरहान पुत्र नसीब, उम्र करीब 19 वर्ष, निवासी मोहल्ला तोपखाना, कस्बा व थाना जालौन। 5. शान पुत्र अकील अली, उम्र करीब 22 वर्ष, निवासी मोहल्ला मुल्लामनोर, कस्बा व थाना जालौन। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने 28 जुलाई की रात मिलकर चोरी करने की बात स्वीकार की। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि चोरी की गई रकम में से उन्हें 82 हजार रुपये मिले थे, जिसमें से 2 हजार रुपये उन्होंने खर्च कर दिए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 80,000 रुपये एवं दो मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी कर आगे की विधिक कार्रवाई की गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुछ आरोपियों का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास दर्ज है। वासिल के खिलाफ कोतवाली जालौन में पूर्व के मुकदमे दर्ज होने की बात पुलिस दस्तावेज में दर्ज है, जबकि अन्य आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई को चोरी की घटना के बाद कुछ ही दिनों में सफल खुलासे के तौर पर देखा जा रहा है। कार्रवाई में कोतवाली जालौन पुलिस के साथ स्वाट/सर्विलांस टीम की अहम भूमिका बताई गई है। #JalaunPolice #Jalaun #JalaunNews #JalaunCrime #CrimeNews #BreakingNews #UPPolice #UttarPradeshPolice #PoliceAction #CrimeNewsJalaun #JalaunKotwali #KotwaliJalaun #SwatTeam #SurveillanceTeam #TheftCase #ChoriKaKhulasa #Chori #Arrested #PoliceEncounter #CashRecovery #MotorcycleRecovery #DilipKumarAgrawal #Vasih #SajalFaridi #Sufiyan #Farhan #Shan #JalaunBreaking #UPNews #HindiNews

Kalpi, Jalaun | Aug 3, 2026

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हरदोई गूजर गौशाला में बेजुबानों का ‘सूखा निवाला’!

स्टोर में सिर्फ दो बोरी चोकर, केयरटेकर ने कैमरे पर कहा—सूखा भूसा ही खिलाते हैं;
 लाखों के ऑनलाइन भुगतान पर भी गंभीर सवाल

डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरदोई गूजर की गौशाला से गोवंश की बदहाली की तस्वीरें सामने आई हैं। 
मीडिया के मौके पर किए गए सर्वे में गौशाला के स्टोर रूम में सिर्फ दो बोरी चोकर दिखाई दिया।
 वहीं हरे चारे और पर्याप्त पशु आहार की उपलब्धता मौके पर नजर नहीं आई।

सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब गौशाला के केयरटेकर ने कैमरे पर बताया कि गोवंश को सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा है और खली नहीं खिलाई जाती। बरसात के मौसम में भी गोवंश टीन शेड के नीचे बैठने को मजबूर दिखाई दिए।

 सवाल है—जब सरकारी स्तर पर गोवंश की बेहतर देखभाल और चारे की व्यवस्था के निर्देश हैं, तो हरदोई गूजर गौशाला में इन व्यवस्थाओं का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?

लाखों का भुगतान, फिर भी काम पर सवाल!

गौशाला से जुड़ी ऑनलाइन जानकारी में विभिन्न कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की धनराशि खर्च दर्शाई गई है। 
लेकिन मीडिया सर्वे के दौरान उन कार्यों की मौके पर मौजूदगी और वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
 यदि सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान हुआ है तो संबंधित कार्य धरातल पर कहां हैं? 
क्या उनकी गुणवत्ता और वास्तविकता की जांच हुई?

यह मामला केवल चारे का नहीं, बल्कि सरकारी धन और गौशाला की व्यवस्थाओं की निगरानी का भी है। 
अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज भुगतान और कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराएं।

बेजुबानों की व्यवस्था कागजों में बेहतर और जमीन पर बदहाल क्यों?
हरदोई गूजर की तस्वीरें इस सवाल का जवाब मांग रही हैं।

वीडियो देखिए और बताइए—क्या आपके गांव में भी गौशाला है?
 वहां गायों को क्या खिलाया जाता है और व्यवस्थाएं कैसी हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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हरदोई गूजर गौशाला में बेजुबानों का ‘सूखा निवाला’! स्टोर में सिर्फ दो बोरी चोकर, केयरटेकर ने कैमरे पर कहा—सूखा भूसा ही खिलाते हैं; लाखों के ऑनलाइन भुगतान पर भी गंभीर सवाल डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरदोई गूजर की गौशाला से गोवंश की बदहाली की तस्वीरें सामने आई हैं। मीडिया के मौके पर किए गए सर्वे में गौशाला के स्टोर रूम में सिर्फ दो बोरी चोकर दिखाई दिया। वहीं हरे चारे और पर्याप्त पशु आहार की उपलब्धता मौके पर नजर नहीं आई। सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब गौशाला के केयरटेकर ने कैमरे पर बताया कि गोवंश को सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा है और खली नहीं खिलाई जाती। बरसात के मौसम में भी गोवंश टीन शेड के नीचे बैठने को मजबूर दिखाई दिए। सवाल है—जब सरकारी स्तर पर गोवंश की बेहतर देखभाल और चारे की व्यवस्था के निर्देश हैं, तो हरदोई गूजर गौशाला में इन व्यवस्थाओं का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा? लाखों का भुगतान, फिर भी काम पर सवाल! गौशाला से जुड़ी ऑनलाइन जानकारी में विभिन्न कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की धनराशि खर्च दर्शाई गई है। लेकिन मीडिया सर्वे के दौरान उन कार्यों की मौके पर मौजूदगी और वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। यदि सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान हुआ है तो संबंधित कार्य धरातल पर कहां हैं? क्या उनकी गुणवत्ता और वास्तविकता की जांच हुई? यह मामला केवल चारे का नहीं, बल्कि सरकारी धन और गौशाला की व्यवस्थाओं की निगरानी का भी है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज भुगतान और कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराएं। बेजुबानों की व्यवस्था कागजों में बेहतर और जमीन पर बदहाल क्यों? हरदोई गूजर की तस्वीरें इस सवाल का जवाब मांग रही हैं। वीडियो देखिए और बताइए—क्या आपके गांव में भी गौशाला है? वहां गायों को क्या खिलाया जाता है और व्यवस्थाएं कैसी हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जिलाधिकारीजालौन #DMJalaun #जालौनप्रशासन #मुख्यविकासअधिकारी #CDOJalaun #खंडविकासअधिकारी #BDODakor #डकोरविकासखंड #डकोरब्लॉक #ग्रामपंचायतहरदोईगूजर #ग्रामविकासविभाग #पंचायतीराजविभाग #जालौनसीडीओ #जालौनडीएम #मुख्यपशुचिकित्साधिकारी #पशुपालनविभाग #गौशालानिगरानी #गौशालाजांच #जालौनन्यूज #डकोरन्यूज #हरदोईगूजर

Kalpi, Jalaun | Aug 3, 2026

Kalpi, Jalaun | Aug 3, 2026

पढ़ाई की उम्र में हाथों में सांप, पेट पालने की मजबूरी या अंधविश्वास?

उरई शहर के कोंच बस स्टैंड चौराहे पर करीब 12–13 वर्ष के दो नाबालिग बच्चे पिटारी में काले सर्प लेकर घूमते नजर आए। 
पूछने पर बच्चों ने बताया कि यही हमारा काम है, बचपन से सर्प पकड़ रहे हैं और इन्हीं से परिवार का पेट चलता है।

सावन के महीने में नाग देवता की पूजा के बीच इन बच्चों का इस तरह सर्प लेकर घूमना कई सवाल खड़े करता है।

क्या पढ़ाई और खेलकूद की उम्र में बच्चों का यह काम करना उचित है?

क्या परिवार की आर्थिक मजबूरी बच्चों को शिक्षा से दूर कर रही है?

क्या ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं है?

सर्पों की सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा—दोनों का ध्यान कौन रखेगा?

आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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पढ़ाई की उम्र में हाथों में सांप, पेट पालने की मजबूरी या अंधविश्वास? उरई शहर के कोंच बस स्टैंड चौराहे पर करीब 12–13 वर्ष के दो नाबालिग बच्चे पिटारी में काले सर्प लेकर घूमते नजर आए। पूछने पर बच्चों ने बताया कि यही हमारा काम है, बचपन से सर्प पकड़ रहे हैं और इन्हीं से परिवार का पेट चलता है। सावन के महीने में नाग देवता की पूजा के बीच इन बच्चों का इस तरह सर्प लेकर घूमना कई सवाल खड़े करता है। क्या पढ़ाई और खेलकूद की उम्र में बच्चों का यह काम करना उचित है? क्या परिवार की आर्थिक मजबूरी बच्चों को शिक्षा से दूर कर रही है? क्या ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं है? सर्पों की सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा—दोनों का ध्यान कौन रखेगा? आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #उरई #जालौन #कोंचबसस्टैंड #नाबालिग #बालश्रम #बालश्रम_पर_रोक #बच्चों_की_शिक्षा #बच्चों_का_भविष्य #शिक्षा_का_अधिकार #जागरूकता #प्रशासन #जालौन_न्यूज़ #उरई_न्यूज़ #कालपी #कोंच #BreakingNews #Urai #Jalaun #News #ViralNews #Trending #LocalNews #PublicIssue @हाइलाइट

Kalpi, Jalaun | Aug 2, 2026

हरदोई गूजर में ग्राउंड रिपोर्ट ने खोले कई सवाल!
₹24 लाख का मरघट या सरकारी धन की बर्बादी?

 प्रधान-सचिव के बताए स्थान पर पहुंची टीम, जर्जर दीवारें और अधूरी बोरिंग देखकर उठे सवाल—आखिर ₹24 लाख कहां खर्च हुए?

डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरदोई गूजर में मरघट निर्माण को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। 
ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग लोकेशन और ग्रामीणों से मिली जानकारी के बाद जब मौके पर पड़ताल की गई तो मामला और भी सवालों के घेरे में आ गया।

पिछली रिपोर्ट में जिस स्थान को जियो-टैग के आधार पर मरघट बताया गया था, उस स्थान पर निर्माण होने से प्रधान-सचिव ने इनकार किया। 
इसके बाद प्रधान-सचिव के बताए अनुसार टीम हरदोई गूजर से जालौन जाने वाले मार्ग पर पहुंची, जहां एक मरघट बना हुआ मिला।

प्रधान-सचिव के अनुसार इसी मरघट पर करीब ₹24 लाख की लागत आई है।

लेकिन कैमरे में कैद मौके की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। 
दीवारें जर्जर दिखाई दे रही हैं, निर्माण की हालत खराब है और पानी के लिए कराई गई बोरिंग की व्यवस्था भी अधूरी नजर आती है।

 ₹24 लाख खर्च हुए तो निर्माण इतना बदहाल क्यों?

 ₹24 लाख की लागत वाले निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं?

 भुगतान से पहले अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था?

 MB में कितना काम दर्ज है और जमीन पर कितना काम हुआ?

 बिल-वाउचर और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड क्या कहता है?

 बोरिंग कराई गई तो पानी की व्यवस्था अधूरी क्यों छोड़ी गई?

 निर्माण के कुछ समय बाद ही दीवारें खराब होने की नौबत कैसे आई?

 क्या पूरे निर्माण की तकनीकी नाप-जोख और थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी?

 असली सवाल—रिकॉर्ड में लाखों, जमीन पर कितना?

यह मामला सिर्फ एक मरघट का नहीं है। 
सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धनराशि और जमीन पर दिखाई दे रहे निर्माण का वास्तविक अनुपात क्या है?

ग्रामीणों द्वारा पंचायत में अन्य विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। 
प्रधान के लंबे समय से पद पर रहने का दावा भी ग्रामीणों की ओर से किया गया है। 
इन सभी आरोपों की सत्यता सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है।

हम किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहे।
 हमारा सवाल सीधा है—
 अगर ₹24 लाख खर्च हुए हैं, तो ₹24 लाख का काम जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा?

अब प्रशासन को चाहिए कि ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग, MB, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और मौके की नाप-जोख का मिलान कराकर सच्चाई सामने लाए।

 वीडियो को आखिर तक देखिए और कमेंट में बताइए—क्या आपको यह मरघट ₹24 लाख की लागत के अनुरूप दिखाई देता है?

आपके गांव में भी सरकारी विकास कार्यों को लेकर सवाल हैं तो हमें जानकारी दें।
 दस्तावेज और मौके की पड़ताल के आधार पर मुद्दा कैमरे के सामने उठाया जाएगा।

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हरदोई गूजर में ग्राउंड रिपोर्ट ने खोले कई सवाल! ₹24 लाख का मरघट या सरकारी धन की बर्बादी? प्रधान-सचिव के बताए स्थान पर पहुंची टीम, जर्जर दीवारें और अधूरी बोरिंग देखकर उठे सवाल—आखिर ₹24 लाख कहां खर्च हुए? डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरदोई गूजर में मरघट निर्माण को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग लोकेशन और ग्रामीणों से मिली जानकारी के बाद जब मौके पर पड़ताल की गई तो मामला और भी सवालों के घेरे में आ गया। पिछली रिपोर्ट में जिस स्थान को जियो-टैग के आधार पर मरघट बताया गया था, उस स्थान पर निर्माण होने से प्रधान-सचिव ने इनकार किया। इसके बाद प्रधान-सचिव के बताए अनुसार टीम हरदोई गूजर से जालौन जाने वाले मार्ग पर पहुंची, जहां एक मरघट बना हुआ मिला। प्रधान-सचिव के अनुसार इसी मरघट पर करीब ₹24 लाख की लागत आई है। लेकिन कैमरे में कैद मौके की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। दीवारें जर्जर दिखाई दे रही हैं, निर्माण की हालत खराब है और पानी के लिए कराई गई बोरिंग की व्यवस्था भी अधूरी नजर आती है। ₹24 लाख खर्च हुए तो निर्माण इतना बदहाल क्यों? ₹24 लाख की लागत वाले निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं? भुगतान से पहले अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? MB में कितना काम दर्ज है और जमीन पर कितना काम हुआ? बिल-वाउचर और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड क्या कहता है? बोरिंग कराई गई तो पानी की व्यवस्था अधूरी क्यों छोड़ी गई? निर्माण के कुछ समय बाद ही दीवारें खराब होने की नौबत कैसे आई? क्या पूरे निर्माण की तकनीकी नाप-जोख और थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी? असली सवाल—रिकॉर्ड में लाखों, जमीन पर कितना? यह मामला सिर्फ एक मरघट का नहीं है। सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धनराशि और जमीन पर दिखाई दे रहे निर्माण का वास्तविक अनुपात क्या है? ग्रामीणों द्वारा पंचायत में अन्य विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रधान के लंबे समय से पद पर रहने का दावा भी ग्रामीणों की ओर से किया गया है। इन सभी आरोपों की सत्यता सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। हम किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहे। हमारा सवाल सीधा है— अगर ₹24 लाख खर्च हुए हैं, तो ₹24 लाख का काम जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा? अब प्रशासन को चाहिए कि ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग, MB, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और मौके की नाप-जोख का मिलान कराकर सच्चाई सामने लाए। वीडियो को आखिर तक देखिए और कमेंट में बताइए—क्या आपको यह मरघट ₹24 लाख की लागत के अनुरूप दिखाई देता है? आपके गांव में भी सरकारी विकास कार्यों को लेकर सवाल हैं तो हमें जानकारी दें। दस्तावेज और मौके की पड़ताल के आधार पर मुद्दा कैमरे के सामने उठाया जाएगा। #जालौनडीएम #जिलाधिकारीजालौन #जालौनप्रशासन #डकोरबीडीओ #BDOडकोर #खंडविकासअधिकारी #डकोरविकासखंड #सहायकविकासअधिकारी #ADOपंचायत #पंचायतविभाग #जिलापंचायत #जिलापंचायतराजअधिकारी #DPRO #पंचायतीराजविभाग #ग्राम्यविकासविभाग #जालौनसीडीओ #मुख्यविकासअधिकारी #CDOजालौन #डकोरप्रशासन #हरदोईगूजर #डकोर #जालौन #जालौनन्यूज #JalaunNews #DakorNews #UPNews #BreakingNews

Kalpi, Jalaun | Aug 2, 2026