पढ़ाई की उम्र में हाथों में सांप, पेट पालने की मजबूरी या अंधविश्वास?
उरई शहर के कोंच बस स्टैंड चौराहे पर करीब 12–13 वर्ष के दो नाबालिग बच्चे पिटारी में काले सर्प लेकर घूमते नजर आए।
पूछने पर बच्चों ने बताया कि यही हमारा काम है, बचपन से सर्प पकड़ रहे हैं और इन्हीं से परिवार का पेट चलता है।
सावन के महीने में नाग देवता की पूजा के बीच इन बच्चों का इस तरह सर्प लेकर घूमना कई सवाल खड़े करता है।
क्या पढ़ाई और खेलकूद की उम्र में बच्चों का यह काम करना उचित है?
क्या परिवार की आर्थिक मजबूरी बच्चों को शिक्षा से दूर कर रही है?
क्या ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं है?
सर्पों की सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा—दोनों का ध्यान कौन रखेगा?
आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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Kalpi, Jalaun | Aug 2, 2026