उदयपुर: आधुनिक दौर में घड़ी और मोबाइल का उपयोग आम है, लेकिन मेवाड़ के उदयपुर में आज भी सदियों पुरानी जल घड़ी की परंपरा जीवित है। मंदिरों में इसी जल घड़ी से पूजा-अर्चना का समय तय होता है। इस प्राचीन व्यवस्था में पानी से भरे पीतल के पात्र में छेद वाली तांबे की कटोरी रखी जाती है। कटोरी में धीरे-धीरे पानी भरने से वह डूब जाती है, जिससे एक घटी यानी निश्चित समय पूरा होने का संकेत मिलता है। इसके बाद घंटी बजाकर अगला समय तय किया जाता है। पूर्वजों की यह वैज्ञानिक अनूठी विरासत आज भी आकर्षण का केंद्र है।
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Dungarpur, Dungarpur | Oct 31, 2026