गो-कथा में वरिष्ठ लोक अभियोजक एडवोकेट कमलेश भादू सम्मानित; आचार्य रामाचार्य ने दिया गोसेवा और संस्कारों का संदेश
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पीलीबंगा ग्राम लखासर स्थित श्री कृष्ण गौशाला समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ‘दिव्य गो-कथा प्रवचन’ के चौथे दिन वरिष्ठ लोक अभियोजक एडवोकेट कमलेश भादू को समिति द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कथा के चतुर्थ दिवस पर जेसला वाले कथावाचक आचार्य रामाचार्य जी महाराज ने गोसेवा, संस्कार और भारतीय संस्कृति के गहरे महत्व पर प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गाय और धरती दोनों की सेवा से ही पीढ़ियां पलती और संस्कारित होती हैं। भारतीय परंपरा में यज्ञ-हवन में देशी गाय के घी की आहुति का विशेष महत्व है। गोसेवा केवल एक पशु की सेवा नहीं, बल्कि करुणा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को जीवन में आत्मसात करने का माध्यम है।
बदलते पारिवारिक मूल्यों पर जताई चिंता
महाराजश्री ने आधुनिक समाज में घटती संवेदनाओं और वृद्ध पिता के वृद्धाश्रम जाने से जुड़े मार्मिक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भौतिक सुविधाएं बढ़ने के साथ परिवार में आदर और सेवा भाव कमजोर हो रहा है। जो व्यक्ति माता-पिता, अतिथि और गोमाता की सेवा नहीं करता, उसमें अहंकार बढ़ने लगता है। सेवा भाव ही मनुष्य को विनम्र बनाता है। नई पीढ़ी को माता-पिता के सम्मान और सेवा से जोड़ना अनिवार्य है।
कलियुग में नाम-स्मरण और गो-महिमा
कलियुग के प्रभाव और नकारात्मकता से मुक्ति के लिए उन्होंने भगवान के नाम-स्मरण को अचूक उपाय बताया। उन्होंने कहा कि घर में अशांति या कष्ट होने पर श्रद्धापूर्वक राम नाम का जाप मन को शांति प्रदान करता है। गोमाता के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यतानुसार गाय के मुख में रुद्र, गले में ब्रह्मा तथा रोम-रोम में ऋषि-मुनियों व देवताओं का वास है। गोसेवा और गोस्पर्श से पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से माता-पिता की सेवा, गोसेवा और नाम-स्मरण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर समाज को संस्कारित करने का आह्वान किया।