हापुड़ में 'तांडव': जमीन के टुकड़े के लिए खून का प्यासा बना ट्रैक्टर ड्राइवर, रोंगटे खड़े करने वाला वीडियो वायरल
जमीन के एक छोटे से टुकड़े और खेत की मेढ़ को लेकर इंसानियत इस कदर तार-तार हो जाएगी कि लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे बन जाएंगे. इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो हापुड़ के बहादुरगढ़ से सामने आया है.
यहां महज जुताई के विवाद में नफरत का पारा इतना चढ़ गया कि इंसान की जान की कोई कीमत नहीं समझी गई और खुले मैदान में ट्रैक्टर को हथियार बनाकर इंसानों को रौंदने की कोशिश की गई.
दो पक्षों के बीच विवाद
यह सनसनीखेज घटना बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के पूठ ग्राम की है. बताया जा रहा है कि गंगा नदी के बीच बने एक टापू पर खेती की जमीन की मेढ़ जोतने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई. आरोप है कि बीती शाम करीब छह बजे जब खेत की जुताई की जा रही थी, तभी मेढ़ को लेकर कमल और उसके साथियों ने विरोध दर्ज कराया. विरोध होते ही दूसरा पक्ष इस कदर हिंसक हो उठा कि उसने भारी-भरकम ट्रैक्टर को आक्रामक तरीके से चारों तरफ घुमाते हुए सामने मौजूद लोगों पर चढ़ाने का प्रयास किया.
लोगों को जान से मारने की कोशिश
वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह ट्रैक्टर चालक द्वारा ट्रैक्टर को नचाकर लोगों को जान से मारने की कोशिश की गई. चंद पलों के गुस्से में जमीन का विवाद जानलेवा हमले में बदल गया. जैसे ही कंट्रोल रूम के जरिए इस जानलेवा हमले की सूचना पुलिस को मिली, बहादुरगढ़ थाना पुलिस ने बिना एक पल गंवाए तत्काल हरकत दिखाई. पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को काबू में किया.
आरोपी ट्रैक्टर चालक गिरफ्तार
अपर पुलिस अधीक्षक महेश कुमार ने बताया कि पीड़ित पक्ष की तहरीर पर तुरंत गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया. त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी ट्रैक्टर चालक को गिरफ्तार कर लिया गया और घटना में इस्तेमाल ट्रैक्टर को सीज कर पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. मौके पर तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति-व्यवस्था बहाल है.
पूरी वारदात ने खड़े कर दिए सवाल
पुलिस की मुस्तैदी ने समय रहते एक बड़ा हादसा टाल दिया और आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया, लेकिन इस पूरी वारदात ने एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. चंद मीटर मिट्टी और मेढ़ के लिए किसी की जान लेने पर आमादा हो जाना यह दर्शाता है कि आपसी सहनशीलता किस कदर खत्म हो रही है. आज समाज को यह सोचने की जरूरत है कि आखिर मामूली विवादों पर हम अपनों और इंसानों के खिलाफ इतने हिंसक और अंधे क्यों होते जा रहे हैं?
Hardoi, Hardoi | Oct 31, 2026