युवा धर्म संसद में गरजे संघ प्रमुख भागवत, बोले- 'रिलीजन' से बहुत ऊपर है हमारा 'धर्म'*
शाहपुरा, भीलवाड़ा (राजस्थान)-राजेन्द्र खटीक।
उज्जैन-बाबा महाकाल की पावन नगरी के देवास रोड स्थित गीता भवन में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन माहौल उस वक्त बेहद खास हो गया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत मंच पर पहुंचे। देशभर से जुटे हजारों युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने धर्म के गूढ़ अर्थ को बेहद आसान और चटपटे अंदाज में समझाया। उन्होंने साफ कहा कि धर्म किसी पूजा-पद्धति या रिलीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सृष्टि के अस्तित्व से जुड़ा है और इसके विलय तक अनवरत चलता रहेगा।
भागवत ने धर्म और रिलीजन के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि रिलीजन को जब तक धर्म के दायरे में चलाएंगे, तब तक इंसान को मुक्ति मिलती रहेगी। लेकिन जैसे ही कोई रिलीजन धर्म के शाश्वत नियमों को छोड़ता है, तो समाज में साम्प्रदायिक कलह और अत्याचार का दौर शुरू हो जाता है। उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि भारत के नौजवानों को अपना आचरण ऐसा गढ़ना चाहिए, जिसे देखकर पूरी दुनिया प्रेरणा ले सके और अपने जीवन में धर्म को ढाल सके।
पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम लिए बिना चुटकी लेते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि हमारी पश्चिम दिशा में एक ऐसा मुल्क बैठा है जो बेवजह हमसे बैर रखता है और बार-बार खुराफात करता है। हमने उसे कई बार करारा सबक सिखाया, लेकिन कभी अपनी मर्जी उन पर नहीं थोपी। उन्होंने कहा कि भारत में सरकारें भले ही किसी भी विचारधारा की रही हों, लेकिन संकट के समय हमने हमेशा अपनो के साथ-साथ तकलीफ देने वालों की भी मदद की है, क्योंकि मदद करना हमारे डीएनए में शामिल है।
कार्यक्रम के इस भव्य दूसरे दिन का विधिवत शुभारंभ आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी और आशीष कुमार आशु की गरिमामयी मौजूदगी में हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में देश के कोने-कोने से पधारे करीब 1700 छात्र-छात्राओं के साथ लगभग 300 विद्वान, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी शामिल हुए, जिन्होंने वैचारिक मंथन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भागवत के विचारों का ताली बजाकर स्वागत किया।
सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के मार्गदर्शन में सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित इस महाकुंभ का यह छठा संस्करण है, जो काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और काञ्चीपुरम् की सफलता के बाद उज्जैन की धरा पर सजा है। आयोजकों ने बताया कि 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस वैचारिक समागम का अगला पड़ाव भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका में होगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस महामंथन से निकलने वाला विचार-अमृत देश के युवाओं को नई दिशा दिखाने का काम करेगा।