*अंतिम समय में राम नाम लेने वाला परमात्मा में विलीन हो जाता-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*आचार्य रामदयाल महाराज ने जताई भावना एक फूलडोल का आयोजन भीलवाड़ा को मिले*
*रामद्वारा में श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के भव्य आयोजन का विश्राम, अंतिम दिन विभिन्न प्रसंगों का वाचन*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ) 19 सितम्बर परमात्मा की भक्ति करों जीवन के सारे संकट दूर हो जाएंगे। सनातन संस्कृति में भगवत गुरू प्रसादी का बहुत महत्व है। गुरू प्रसादी मानसिक विकृतियों को नष्ट कर चित को शुद्ध बनाती है। संतों का प्रसाद पाने वाले को आनंद आता है ओर ये भवसागर पार करा देता है। प्रसादी के प्रति हमारी श्रद्धा एवं आस्था हो तो इसके अद्भुत विलक्षण चमत्कार होते है। भगवान जगन्नाथ बनकर सारे संसार का पेट भरते है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के समापन दिवस शनिवार को वाणीजी प्रवचन में व्यक्त किए। भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत व्यास पीठ से संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने अंतिम दिन प्रातः एवं सांयकालीन सत्रों में रासलीला, रूक्मणी विवाह, कृष्ण-सुदामा मित्रता सहित विभिन्न प्रसंगों का वाचन किया।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि जीवन में फटे हुए कपड़े पहनने से कोई नुकसान नहीं पर किसी अधर्मी या पापी के दिए कपड़े पहनने पर जीवन बर्बाद हो जाएगा। जीवन से पुण्य चला जाए तो कुछ नहीं बचता है। दान से लक्ष्मी कभी कम नहीं होती बल्कि कई गुणा होकर आपको वापस प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि मानव तन मिला है तो तीन बातें संत दर्शन, सत्संग करने ओर राम नाम लेने में कभी विलंब मत करना। राम नाम लेते रहने से सारे पाप नष्ट हो जाते है। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन के अंतिम समय में कोई राम नाम लेता रहे तो वह मिट्टी में नहीं परमात्मा में विलीन हो जाता है। श्रीमद् भागवत कथा सात दिन में पूर्ण होती है तो हमारी जिंदगी भी सात दिनों की सोमवार से रविवार तक है। इन सात वार में पूरी जिंदगी निकल जाती है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि भीलवाड़ा की धरा धन्य है जहां स्वामी रामचरण महाराज की साधना हुई ओर उनकी भक्ति के अद्भुत चमत्कार दिखे। भीलवाड़ा की धरा पर विक्रम संवत 1817 में रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रादुर्भाव हुआ ओर 1820 में अनुभव वाणी का उद्गम हुआ। इसी तरह 1822 में भीलवाड़ा रामद्वारा का स्थापना हुई ओर पहला फूलडोल इसी धरती पर हुआ। जिस दिन भीलवाड़ा से फूलडोल शाहपुरा गया वह समय की मांग थी। यहां फूलडोल शाहपुरा जाने के बाद अब तक तीन बार वहां से बाहर उदयपुर में आयोजित हुए है। जब श्रीमहाराज की कृपा हो एक फूलडोल भीलवाड़ा में हो यह हमारी भावना है। इसके लिए शाहपुरा के संतों ओर भक्तों से भी बात करेंगे। हम चाहेंगे यहां पांच दिन जुलूस निकले ओर भव्य आयोजन होे। श्री महाराज की कृपा से जैसा भी आदेश होगा आपको सूचित करेंगे।
*जीवात्मा के कई जन्मों के पुण्य होने पर भक्ति में प्रवेश मिलता*
व्यास पीठ से श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने भगवान कृष्ण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वाचन करते हुए कहा कि जब कर्म में कष्ट उठाना होता है तो व्यक्ति किसी की नहीं सुनता लेकिन जब कर्म खप जाते है तो सुदामा को द्वारिका में राज कर रहे मित्र भगवान कृष्ण की याद आ जाती है। हमेशा अपने बच्चों को धर्मात्मा व संस्कारवान बनाए ओर परमात्मा पर विश्वास व श्रद्धा अटूट रहे। परमात्मा को नमस्कार करने से सारे दुःख दूर हो जाते है। परमात्मा अर्न्तयामी होकर हर स्थिति के ज्ञाता होते है। जीवात्मा के कई जन्मों के पुण्य होने पर भक्ति में प्रवेश मिलता है। जीव की आत्मा तभी संतुष्ट होगी जब वह परमात्मा से मिलेगा। भागवत कथा का सार जीवन में आत्मसात कर लिया तो हमारा कल्याण हो जाएगा। श्रीमद् भागवत के कथा के दौरान कई भजनों ने माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
*108 भागवत मूल पाठ करने वाले विद्धानों एवं जजमान परिवारों का सम्मान*
श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के विश्राम दिवस पर रामद्वारा परिसर में पहली बार 108 भागवत का मूल पाठ करने वाले पुष्कर से आए विद्धानों का आयोजन समिति द्वारा सम्मान किया गया। विश्राम दिवस के द्वितीय सत्र में 108 मूल भागवत पाठ के जजमान बने परिवारों का भी स्वागत अभिनंदन किया गया। आचार्य रामदयाल महाराज ने मूल भागवत पाठ करने आए विद्धान पंडितों व पूजन का लाभ प्राप्त करने वाले जजमान परिवारों के प्रति मंगलभावना व्यक्त की। श्रीमद भागवत ज्ञान सप्ताह की पूर्णाहुति पर भागवत आरती का लाभ चातुर्मास आयोजक परिवार भंवरलाल अशोककुमार अजमेरा परिवार, कल्याणमल मुरली ईनाणी परिवार एवं शिवकुमार अशोककुमार गगरानी परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास आयोजन समिति के अशोक अजमेरा ने आयोजन को सफल बनाने पर सभी का आभार जताया। रविवार को सुबह 8 से 9 बजे तक पंच ग्रंथ का सामूहिक पाठ होगा। इसके बाद सुबह 9 से 10 बजे तक नियमित चातुर्मासिक प्रवचन होंगे।