*संतान की गलती पर उसे बचाने वाले घर में राम नहीं दुर्योधन ओर दुःशासन ही पैदा होंगे-आचार्य पुलकसागर*
*पर्युषण में चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना,श्रद्धाभाव से भगवान का अभिषेक*
*आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पर्युषण की भक्ति के लिए उमड़े रहे श्रावक*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार )19 सितम्बर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना के तहत चौथे दिन शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव से उत्तम शौच धर्म का पूजन एवं आराधना की गई। भगवान का अभिषेक करने चक्रवती के साथ इन्द्र रूप में श्रावक उमड़े। भगवान की भक्ति में श्रावक श्राविकाएं झूम उठे ओर जमकर नाचते गाते रहे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम शौच धर्म का संदेश देते हुए कहा कि ये हमारे जीवन को भीतर से पवित्र बनाने का दिन है। किसी की गलतियों एवं पाप कार्य को छुपाने या ऐसा करने वालों को बचाने का प्रयास नहीं करे। नाम हमे धतराष्ट्र बनना है ना गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांधनी है। पुत्र मोह में डूबा धतराष्ट्र की आंखे बाहर से नहीं भीतर से भी फूटी होने से वह न सत्य को ओर न संसार को देख पाया। गांधारी आंखों पर पट्टी बांधने के बाद भी पुत्र मोह का त्याग नहीं कर पाई। बेटे की सत्ता के लिए कुल की प्रतिष्ठा का चीरहरण होता रहा ओर वह रोक नहीं पाए। उन्होंने माताओ बहनों से निवेदन करते हुए कहा कि आपकी औलाद घर, खानदान व समाज को अपमानित करे तो आंखों पर गांधारी जैसी पट्टी बांध कर मत बैठ जाना। हमे दूसरों की औलाद के तो सारे दोष दिखते है पर अपनी औलाद के दोष भी गुण नजर आते है। ऐसी कई गांधारी आज भी हमारे समाज ओर आसपास मौजूद है।
आचार्यश्री ने कहा कि औलाद गलत कार्य करें ओर मां उसे बचाए तो समझ लेना वह गांधारी है जो धर्म के आगे पट्टी बांध लेती है। उत्तम शौच धर्म सीख देता है कि माता-पिता कभी संतान की गलतियों का बचाव नहीं करे। संतान के गलती करने पर जो उसे आंचल में छिपाएंगा उसके घर में राम नहीं दुर्योधन ओर दुःशासन ही पैदा होंगे। अपने घर को आदर्श बनाए ओर संतान के गलत कार्य को कभी प्रोत्साहित मत करो। उन्होंने कहा कि अपनी आंखों पर लोभ लालच की पट्टियां मत बांधो। संतान गलत करे तो उसकी पैरवी नहीं करके कानून के हवाले करो। दूसरों की संतान गलत कार्य करे तो कैंडल मार्च निकाल विरोध जताते है ओर अपनी संतान गलत करे तो हर संभव तरीके से उसे बचाने का प्रयास करते है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि भगवान ऋषभदेव की नीति है कि वंदनीय की वंदना होनी चाहिए ओर दंडनीय को दंड मिलना चाहिए। एक भाई दूसरे भाई की कुर्सी छिनने का प्रयास करता है तो महाभारत खड़ी होती है ओर एक भाई दूसरे भाई के लिए कुर्सी छोड़ने को तैयार होता है तो रामायण होती है। महाभारत स्वार्थ की स्याही से लिखी कहानी ओर रामायण त्याग की आधारशिला हुआ करती है। एक-दूसरे के लिए जीने वाला रामायण का जीवन जीता है। उन्होंने कहा कि भूख प्यास सहन करना ही उपवास नहीं होता किसी की दो बात सहना करना सबसे बड़ा उपवास है। मन को पावन एवं पवित्र बनाने का कार्य उत्तम शौच धर्म की आराधना करती है। शरीर मैला होने पर केवल ज्ञान हो जाएगा लेकिन मन मैला हो गया तो ऐसा नहीं हो पाएगा। उत्तम शौच निर्मलता,शुचिता एवं पवित्रता का पर्व है। आत्मा की शुद्धि करने का अवसर इस पर्व पर मिलता है। लोभ लालच का त्याग किए बिना आत्मशुद्धि नहीं हो सकती। आप दिल से याद नहीं करते इसीलिए परमात्मा की कृपा नहीं होती।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण में आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ो श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा अर्चना व भक्ति में समर्पित है। पूर्यषण के चौथे दिन चक्रवती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य ने महावीर प्रसाद,संदीप बाकलीवाल परिवार ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य
लीला बाई,राजकुमार,विनोद जैन परिवार बेंगू ने
प्राप्त किया। सायंकालीन महाआरती का सौभाग्य राजेश जैन निवासी गया ने प्राप्त किया। दशलक्षण महापर्व के पांचवे दिन रविवार को उत्तम सत्य धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे है। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं हो रही है। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम को 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।