हफ्ते में दिन सात और अधिकारियों की बैठकें हो रही आठ?
शायद यही वजह है कि अब बैठकों को लेकर अधिकारियों की गंभीरता भी कम होती नजर आ रही है। जिले के अधिकारी आए दिन किसी न किसी बैठक में व्यस्त दिखाई देते हैं। बैठकों का सिलसिला इतना बढ़ गया है कि लगता है, अब बैठकें कामकाज का हिस्सा कम और औपचारिकता ज्यादा बनती जा रही हैं। ऐसे में अगर बैठकों के दौरान अधिकारियों की इस तरह की तस्वीरें सामने आएं, तो हैरानी भी नहीं होनी चाहिए। सवाल यही है कि बैठकों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा जरूरी क्या उनकी गंभीरता और परिणाम सुनिश्चित करना नहीं है?
Pauri, Garhwal | Sep 3, 2026