*हम किसी को अमृत नहीं दे सकते तो जहर देने के अधिकारी भी नहीं-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*जिसके मन में राम के प्रति विश्वास फिर सब कुछ होगा उसके पास*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),10 सितम्बर आजादी के नाम पर स्वच्छन्द बनकर मर्यादाओं ओर संस्कृति की धज्जियां नहीं उड़ाई जानी चाहिए। अहंकार में आकर जो मर्यादाओं का ध्यान नहीं रखते उन्हें बाद में पछताना ही पड़ता है। भगवान वाणी दी है तो हमारी भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सबको प्रिय लगे। याद रखे शब्द कभी मरते नहीं इसलिए हजारों वर्ष बाद भी भगवान की वाणी गूंज रही है। अप्रिय शब्द बोलने की बजाय जुबान से भगवान का नाम ले, भजन करें सत्संग करे। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत गुरूवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमेशा कोई भी शब्द सोच समझकर बोले एवं शब्द उपासक बने। आप अच्छा सुनना चाहते है तो अच्छा बोलना भी पड़ेगा। हम किसी को अमृत नहीं दे सकते तो जहर देने का अधिकार भी नहीं रखते। अहंकार में आकर हम कुछ भी कर ले पर परमात्मा क्षमा नहीं करता।
आचार्यश्री ने कहा कि कभी भी शास्त्रों की गलत व्याख्या नहीं करे ओर अवांछित बात नहीं बोले। आपकी वाणी से ही आपके खानदान, संस्कार व गुणों का पता लगता है। मीठा बोलने से जीवन सुंदर बनेगा ओर कड़वा व खराब बोलने से बदले की भावना जागृत होगी। जुबान से राम नाम जपने से जीवन का कल्याण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कभी अज्ञान के कारण इतराना नहीं चाहिए। हमे शक्ति परमात्मा ने किसी को दुःख देने के लिए नहीं बल्कि सुख पहुंचाने के लिए दी है। अपनी ध्वनि अच्छी रखों ताकि प्रतिध्वनि भी अच्छी रहे।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि जीवन में कभी भी परमात्मा की आंखों में धूल झोंकने का पाप नहीं करे। भगवान हमे सब कुछ देता है फिर भी हम कहते है हमारे पास कुछ नहीं है तो वास्तव में कुछ नहीं रह जाएगा। हमे बोलना चाहिए कि राम गुरू की कृपा है ओर सब आनंद है तो फिर आनंद ही रहेगा। जो प्राप्त है उसे र्प्याप्त माने। जिसके मन में राम के प्रति विश्वास है फिर सब कुछ उसके पास है। जो दुनिया के सारे नियम मानता लेकिन आत्म धर्म की पालना,राम के प्रति प्रेम व भजन का नियम नहीं है उसके बाकी सब नियम व्यर्थ है। जिन्होंने राम नाम ह्दय में धारण कर लिया ओर उसके प्रति दृढ़ श्रद्धा रखता है वह सबसे बड़ा पुण्यवान बलवान व गुणवान होकर सौभाग्यशाली होता है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
*श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में होगा 108 मूल भागवत का पाठ*
आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इसमें भागवत भक्ति, भक्त व भगवान पर चर्चा एवं जीवन दर्शन पर प्रवचन होंगे। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेद पाठी विद्धान पंडित भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे। इस सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। इस आयोजन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु भीलवाड़ा आएंगे।