कलेक्टर की चौखट तक 'सिफर' निकली गुहार, प्रतापपुर में आज भी राशन दुकान पर खड़े रहने को मजबूर ग्रामीण!
साहब. के पास गए, हाथ जोड़े, अर्जी दी... लेकिन हमारी किस्मत और राशन दुकान का ताला, दोनों नहीं खुले! यह दर्द और आक्रोश है सतना जिले के ग्राम प्रतापपुर के सैकड़ों गरीब परिवारों का।
जहाँ कई दिनों पहले कलेक्ट्रेट की चौखट पर गिड़गिड़ाने और लिखित शिकायत सौंपने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। आज भी गांव की शासकीय उचित मूल्य की दुकान के बाहर गरीब असहाय ग्रामीण राशन की आस में खड़े हैं, लेकिन कोटेदार की तानाशाही और प्रशासन की बेरुखी के आगे उनकी हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है, गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व ग्रामीणों ने कलेक्टर सतना और एसडीएम मझगवां के नाम एक शिकायती पत्र सौंपा था। जिसमे ग्रामीणों ने राशन दुकान के कोटेदार अनूप पाण्डे पर आरोप लगाया था कि अप्रैल 2026 से लगातार खाद्यान्न नहीं बांटा जा रहा है, मशीन पर फिंगरप्रिंट और अंगूठा तो लगवा लिया जाता है, लेकिन "कल आना-परसों आना" कहकर राशन को काला बाजारी के हवाले कर दिया जाता है। कलेक्ट्रेट में दिए गए उस आवेदन के बाद भी न तो कोई जांच टीम गांव पहुंची और न ही गरीबों की थाली तक अनाज का दाना पहुंचा,नतीजा आज भी राशन दुकान के सामने ग्रामीणों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और उन्हें राशन देने से साफ मना किया जा रहा है।
*भुखमरी की कगार पर परिवार*
इस मानसूनी बारिश में कई गरीबों के कच्चे मकान गिर चुके हैं। सिर छुपाने की जगह छिन चुकी है और अब खाने को अनाज न होने से मासूम बच्चों और बुजुर्गों के सामने भुखमरी का भयानक संकट खड़ा हो गया है,किन्तु जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के संज्ञान में मामला लाए जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ, तो अब ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि राशन माफिया को खुलेआम शह दी जा रही है।