आधुनिक खेती और बड़े बाजारों से जुड़ाव बढ़ाएगा किसानों की आय
गांधी मैदान में दो दिवसीय किसान स्वरोजगार मेला शुरू, 24 स्टॉलों पर मिल रही कृषि योजनाओं व नई तकनीकों की जानकारी
जागरण संवाददाता, जहानाबाद : गांधी मैदान में शुक्रवार को दो दिवसीय जिला स्तरीय किसान स्वरोजगार मेले का शुभारंभ जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) के तत्वावधान में आयोजित यह मेला नौ और 10 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, पशुपालन, बागवानी, कृषि यंत्रीकरण और कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी जा रही है। मेले में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के कुल 24 स्टॉल लगाए गए हैं।
उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती पर जोर
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ उच्च मूल्य वाली फसलों, बागवानी, दलहन-तिलहन उत्पादन और फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जहानाबाद की राजधानी पटना से निकटता किसानों के लिए बड़ा अवसर है। किसान अपनी उपज को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने के लिए बड़े खरीदारों, संगठित खुदरा बाजारों और कृषि विपणन नेटवर्क से जुड़ें। इससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि खेती के साथ पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन को जोड़कर किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। कृषि अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से सदुपयोग करने और मुर्गी पालन से प्राप्त अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति भी किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसरों की दी जानकारी
जिला पदाधिकारी ने मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण को कृषि आधारित स्वरोजगार के महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों को संगठित कर बड़े बाजारों और खरीदारों से जोड़ने पर बल दिया। इससे किसानों को अपनी उपज की बिक्री के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
आधुनिक कृषि यंत्रीकरण की चर्चा करते हुए उन्होंने ड्रोन, पावर टिलर और अन्य कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही किसानों को इन यंत्रों पर मिलने वाले सरकारी अनुदान की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कृषि वैज्ञानिकों से उन्नत बीज, फसल प्रबंधन, नई तकनीकों और टिकाऊ खेती के संबंध में किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया।
फार्मर रजिस्ट्री के लिए लगाए गए विशेष स्टॉल
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फार्मर आईडी और कृषि डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। जिला पदाधिकारी ने अधिक से अधिक किसानों का फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से निबंधन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इससे पात्र किसानों को कृषि योजनाओं, सरकारी अनुदान और अन्य सुविधाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
मेले में आत्मा, कृषि, उद्यान, मत्स्य, पशुपालन, मिट्टी जांच प्रयोगशाला, भूमि संरक्षण, पौधा संरक्षण, सुधा डेयरी, इफको, जीविका, नाबार्ड से संबद्ध किसान उत्पादक संगठनों, कृषि विज्ञान केंद्र और जिला उद्योग केंद्र सहित विभिन्न संस्थानों के स्टॉल लगाए गए हैं। कृषि यंत्र विक्रेताओं, सोलर पैनल संचालकों और प्रगतिशील किसानों ने भी अपने स्टॉल लगाए हैं। फार्मर रजिस्ट्री एवं बिहार कृषि ऐप के स्टॉल पर किसानों का आनलाइन निबंधन किया जा रहा है। वहीं, विशेष सहायता केंद्रों पर मधुमक्खी पालन, जैविक खेती, मशरूम उत्पादन और कृषि आधारित स्वरोजगार के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने किसानों को दिया प्रशिक्षण
मेले में शिव हैचरी, पानीपत के प्रबंध निदेशक परवीन जगलान तथा कृषि विज्ञान केंद्र, गंधार के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार, डॉ. वाजिद हसन, डॉ. दिनेश महतो और डॉ. निराला कुमार ने किसानों को मुर्गी पालन, बकरी पालन, प्राकृतिक खेती, मधुमक्खी पालन, दलहन-तिलहन उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी।
इस अवसर पर उप निदेशक उद्यान, बामेती, बिहार रंजीत प्रताप पंडित, जिला कृषि पदाधिकारी संभावना, वरीय वैज्ञानिक डॉ. मुनेश्वर प्रसाद, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. प्रतिभा कुमारी, जिला उद्यान पदाधिकारी रूबी कुमारी सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कर्मी और सैकड़ों किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन किसान सलाहकार देवेंद्र कुमार ने किया।
जिला प्रशासन ने किसानों और युवाओं से मेले में पहुंचकर कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने तथा आधुनिक खेती, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।
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