विकास के दावों के बीच मध्य प्रदेश के शहडोल से सिस्टम को आईना दिखाती एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। ब्यौहारी तहसील के आखेटपुर (डाला टोला) में 70 वर्षीय श्यामकली पटेल के निधन के बाद जब एंबुलेंस शव लेकर पहुंची, तो कीचड़ और दलदल से भरे रास्ते के कारण गांव से एक किलोमीटर पहले ही उसके पहिए थम गए। परिजनों को लाचार होकर शव को एंबुलेंस से उतारना पड़ा और बैलगाड़ी पर रखकर घुटनों तक कीचड़ भरे रास्ते से होते हुए अंतिम सफर तय करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क के लिए कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन हर बारिश में यह रास्ता दलदल बना रहता है। यह घटना सिर्फ एक परिवार की विवशता नहीं, बल्कि उस लचर व्यवस्था की हकीकत है जहां जिंदा इंसान को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिलती और मौत के बाद भी सड़क मयस्सर नहीं होती। फाइलों में दर्ज विकास अगर ज़मीन पर दलदल बन जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि ये सड़कें और दावे आखिर किसके लिए हैं?
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