इतिहास के पन्नों से निकली आजादी की कहानी, गांव कालवास में लगी ऐतिहासिक प्रदर्शनी
ऐतिहासिक दस्तावेजों और छाया चित्रों की प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने जानी आजादी के संघर्ष की गाथा
हिसार, 06 अक्टूबर।
क्षेत्रीय अभिलेखागार हिसार मंडल की ओर से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कालवास में दो दिवसीय ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं छाया चित्रों की प्रदर्शनी का मंगलवार को हिसार प्रथम के खंड शिक्षा अधिकारी राज वीरेंद्र ढिल्लों ने शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों के ज्ञानवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और आसपास के क्षेत्र से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को जानने का अवसर मिलता है। क्षेत्रीय अभिलेखागार हिसार मंडल के सहायक निदेशक अनिल कुमार ने कहा कि प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करवाना है। उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए अनेक देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।
दिल्ली विश्वविद्यालय से दयाल सिंह कॉलेज के इतिहासकार डॉ उमा शंकर सिंह ने विद्यार्थियों को इतिहास के महत्व से अवगत करवाते हुए कहा कि इतिहास के ज्ञान से वर्तमान को बेहतर ढंग से समझने और भविष्य को उज्जवल बनाने में मदद मिलती है। राजकुमार जांगड़ा ने कहा कि विद्यार्थी इतिहास की पुस्तकों में अनेक घटनाओं के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन अपने आसपास घटित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से अक्सर अनजान रहते हैं। यह प्रदर्शनी इस कमी को दूर करने में सहायक होगी।
प्रदर्शनी में वर्ष 1857 से 1947 तक चले स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेजों, छायाचित्रों और घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है। इसमें 1857 की क्रांति के दौरान हांसी के वीर शहीद लाला हुकम चंद जैन एवं मुनीर बेग, झजर के नवाब अब्दुर्रहमान खान, बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह तथा राव तुलाराम के संघर्ष और बलिदान को प्रमुखता से दर्शाया गया है। इसके अलावा 19 अगस्त 1857 को हिसार के नागोरी गेट पर अंग्रेजों और हिसार व आसपास के गांवों के स्वतंत्रता सेनानियों के बीच हुए संघर्ष, हिसार जिले के नीलाम हुए गांवों से संबंधित दस्तावेज तथा राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में हिसार, हांसी और धांगड़ गांव सहित विभिन्न क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों के फोटोग्राफ्स एवं उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं, हिसार के दादा गणेशी की राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका, लाला हरदेव सहाय का देश सेवा में योगदान, शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का जीवन वृत्तांत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वर्ष 1938 में हिसार यात्रा तथा हिसार और फतेहाबाद जिलों से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी को भी दर्शाया गया है। इसके साथ ही 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सदस्यों का दुर्लभ फोटोग्राफ भी प्रदर्शनी का आकर्षण रहा।
प्रदर्शनी में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चिड़ोद, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चौधरीवास, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मुकलान, राजकीय उच्च विद्यालय सिंघरान, राजकीय उच्च विद्यालय गावड़ तथा राजकीय माध्यमिक विद्यालय कालवास के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में लगभग 255 छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार, राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला समन्वयक नरेंद्र सिंह दुहन, प्राचार्य धर्मवीर नैन चौधरीवास, कालवास पूर्व सरपंच संजय लांबा, एसएमसी प्रधान कविता देवी सहित विद्यालय के स्टाफ सदस्य एवं आसपास के विद्यालयों के शिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन (06 डीआईपीआरओ फोटो 06 व 07) : राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कालवास में आयोजित ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं छाया चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन करते विद्यार्थी, शिक्षक एवं अन्य उपस्थितजन।
Uklana, Hissar | Oct 6, 2026