हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच आस्था का वो धाम... जहां हर साल लाखों श्रद्धालु गुरु के चरणों में शीश नवाने पहुंचते हैं...
अब एक बार फिर शीतकाल के लिए बंद होने जा रहा है। कपाट बंद होने से ठीक पहले हेमकुंड साहिब में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है...
और बर्फ की सफेद चादर ने पूरे धाम को अपने आगोश में ले लिया है। उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब... इस समय प्रकृति के बेहद खूबसूरत रूप का साक्षी बना हुआ है।
मंगलवार को हेमकुंड साहिब में सीजन की पहली ताजा बर्फबारी हुई। देखते ही देखते गुरुद्वारा परिसर, आसपास की पहाड़ियां और पवित्र सरोवर के आसपास का इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक गया।
कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बीच हेमकुंड साहिब का नजारा बेहद अलौकिक दिखाई दे रहा है। चारों तरफ सफेदी... शांत वातावरण... और इस शांति के बीच गूंजता वाहेगुरु का नाम... श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा है।
लेकिन अब इस पवित्र धाम की यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर है।
10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने से पहले अंतिम अरदास होगी और इसके साथ ही इस साल की यात्रा का समापन हो जाएगा।
इस यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब पहुंचकर गुरु के दरबार में माथा टेका। अब तक 3 लाख 70 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से संगत हेमकुंड साहिब पहुंची और दुर्गम पहाड़ी रास्तों, ठंड और बदलते मौसम के बीच श्रद्धालुओं की आस्था लगातार मजबूत दिखाई दी।
अब कपाट बंद होने के बाद हेमकुंड साहिब का ये इलाका कई महीनों तक भारी बर्फबारी की चपेट में रहेगा। सर्दियों के दौरान पूरा क्षेत्र बर्फ की मोटी परत से ढक जाएगा और अगले यात्रा सीजन तक यहां सन्नाटा पसरा रहेगा।
10 अक्टूबर को जब कपाट बंद होंगे, तो संगत की आंखों में विदाई का भाव होगा... लेकिन दिल में एक ही अरदास होगी—अगले साल फिर गुरु के दरबार में हाजिरी लगाने का मौका मिले।
क्योंकि हेमकुंड साहिब सिर्फ एक तीर्थ नहीं... ये करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और श्रद्धा का वो केंद्र है, जहां पहुंचकर इंसान खुद को गुरु की शरण में महसूस करता है।
आज बर्फ की सफेद चादर में ढका हेमकुंड साहिब मानो यही संदेश दे रहा है कि मौसम बदलते हैं... रास्ते बंद होते हैं... लेकिन आस्था का सफर कभी नहीं रुकता।
हेमकुंड साहिब से इस यात्रा सीजन की ये भावुक विदाई...
बोले सो निहाल... सत् श्री अकाल!
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