#Balrampur ! जमीनी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ पर पड़ी मार: मानदेय न बढ़ने पर भड़कीं आशा बहुओं का फूटा गुस्सा, अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन...
#उतरौला (#बलरामपुर):
मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला परिसर उस वक्त रणक्षेत्र सा नजर आया, जब ब्लॉक अध्यक्ष शिवकुमारी के नेतृत्व में सैकड़ों आशा बहुओं का गुस्सा फूट पड़ा। 'भारतीय मजदूर संघ' से संबद्ध आशा/आशा संगिनी कर्मचारी संगठन के बैनर तले उतरी कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन की उपेक्षापूर्ण नीतियों के खिलाफ जमकर हुंकार भरी और अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आर-पार की चेतावनी दी।
'शिक्षामित्रों-आंगनबाड़ी का मानदेय बढ़ा, हमारी अनदेखी क्यों?'
आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने दो-टूक कहा कि वे वर्षों से टीकाकरण से लेकर प्रसव और शिशुओं की जीवनरक्षा तक का जोखिम भरा मोर्चा संभाल रही हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित किया गया और न ही गुजारे लायक मानदेय दिया जा रहा है।
उन्होंने सरकारों को आईना दिखाते हुए सवाल उठाया कि जब शिक्षामित्रों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, रोजगार सेवकों और पंचायत सहायकों के मानदेय में सरकार ने इजाफा कर दिया, तो स्वास्थ्य महकमे की धुरी कही जाने वाली आशा बहुओं के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? आर्थिक तंगी के चलते अब उनके सामने अपने परिवारों का भरण-पोषण करना भी दूभर हो गया है।
जिला से लेकर लखनऊ तक गूंजेगी आवाज
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें अनसुनी की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधीक्षक के माध्यम से भेजी गई इस चेतावनी-पत्र की प्रतियां जिला और प्रदेश के शीर्ष पदाधिकारियों को भी प्रेषित कर दी गई हैं।
इस दौरान सुमन यादव, प्रीति, कैफिया परवीन, चन्द्रकान्ता पाठक, कुसमा देवी, सुशीला और मंजू देवी सहित दर्जनों जुझारू आशा बहुएं मौजूद रहीं।