जब आप मध्य प्रदेश के विभिन्न पुरातात्विक संग्रहालयों में रखी गई इन प्राचीन मूर्तियों के सामने खड़े होते हैं, तो ऐसा महसूस होता है मानो पत्थर भी जीवंत हो उठा हो। सातवीं से तेरहवीं शताब्दी के बीच के कालखंड में तराशी गईं भगवान गणेश की ये पांच दुर्लभ प्रतिमाएं इस बात की गवाही देती हैं कि हमारे प्राचीन शिल्पकारों ने हाथी के सिर वाले इस देवता की कल्पना कितनी अनूठी और कल्पनाशील तरीके से की थी। मंदसौर से लेकर उज्जैन और ग्वालियर तक फैली इन मूर्तियों में गजानन का हर रूप अपने आप में एक अलग कहानी कहता है।
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Korba, Korba | Sep 21, 2026