#बालाघाट
दुनिया में हर मां के लिए उसका बच्चा सर्वश्रेष्ठ, माड़ी के डेढ़ वर्षीय सोन सिंग को मिली नई जिंदगी
आरबीएसके और मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से निःशुल्क हुई हार्ट सर्जरी, स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम
दुनिया में हर मां के लिए उसका बच्चा सबसे अनमोल और सर्वश्रेष्ठ होता है। मां की आंखों में अपने बच्चे के स्वस्थ भविष्य के सपने होते हैं, लेकिन जब वही बच्चा किसी गंभीर बीमारी से जूझता है, तो पूरा परिवार चिंता में डूब जाता है। ऐसे कठिन समय में यदि शासन की जनकल्याणकारी योजना सहारा बन जाए और बच्चे को नया जीवन मिल जाए, तो यह किसी वरदान से कम नहीं होता। कुछ ऐसी ही भावुक और प्रेरणादायी कहानी है बालाघाट जिले के बैहर विकासखंड के ग्राम माड़ी निवासी डेढ़ वर्षीय सोन सिंग मरकाम की, जो हृदय रोग से पीड़ित था। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के माध्यम से मासूम की हार्ट सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क कराई गई। अब सोन सिंग स्वस्थ है और अपने परिवार के बीच लौट आया है।
आरबीएसके ने समय पर पहचानी बीमारी
ग्राम माड़ी निवासी सोन सिंग मरकाम बार-बार बीमार पड़ रहा था। बच्चे की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए आरबीएसके की चिकित्सक डॉ. भारती ठाकरे ने उसकी बीमारी का चिन्हांकन किया। बेहतर उपचार के लिए उसे जिला चिकित्सालय बालाघाट में भर्ती कराया गया। यहां सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बच्चे का परीक्षण किया और हृदय रोग की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेषज्ञ उपचार एवं सर्जरी कराने की सलाह दी।
कलेक्टर श्री कुमार सत्यम के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न दहिया के मार्गदर्शन में बच्चे के उपचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। 6 अक्टूबर को आयोजित शिविर में सोन सिंग की ईको जांच कराई गई। जांच के आधार पर उसे पीडीए डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया से उपचारित करने की सलाह दी गई।
योजना ने उठाया 75 हजार रुपये के उपचार का खर्च
मासूम के बेहतर उपचार में आर्थिक परेशानी बाधा न बने, इसके लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के अंतर्गत 7 अक्टूबर को 75 हजार रुपये की उपचार राशि स्वीकृत की गई। इसी दिन बच्चे को आगे के उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया। वहां 8 अक्टूबर को उसकी हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।
सर्जरी के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और चिकित्सकों की देखरेख में वह तेजी से स्वस्थ होने लगा। 10 अक्टूबर को उसे अस्पताल से सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया गया। जिस बच्चे की बार-बार बिगड़ती तबीयत से परिवार चिंतित रहता था, उसे स्वस्थ देखकर परिजनों के चेहरे पर खुशी लौट आई।
108 एंबुलेंस से जबलपुर पहुंचा मासूम, कैशलेस हुआ उपचार
बच्चे के उपचार से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक, आरबीएसके श्री राजाराम चक्रवर्ती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तैयारियां कराईं। सोन सिंग को 108 एंबुलेंस के माध्यम से जबलपुर भेजा गया और योजना के अंतर्गत उसका कैशलेस उपचार कराया गया। सर्जरी के बाद स्वस्थ होने पर बच्चे को वापस घर भेजने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।
शासन की योजना बनी परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद
सोन सिंग के परिजनों ने बच्चे के सफल उपचार पर मध्यप्रदेश शासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद लाभकारी है। इस योजना के कारण उनके बच्चे का पूरा उपचार निःशुल्क हो सका और उन्हें इलाज के खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ी।
सोन सिंग की यह कहानी बताती है कि समय पर बीमारी की पहचान, स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं मिलकर किसी परिवार की सबसे बड़ी चिंता को खुशियों में बदल सकती हैं। डेढ़ वर्षीय सोन सिंग का स्वस्थ होकर घर लौटना केवल एक सफल सर्जरी नहीं, बल्कि एक मां की उम्मीदों, परिवार की खुशियों और मासूम के बेहतर भविष्य की नई शुरुआत है।
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5 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Oct 10, 2026