छठवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि पंचायत एवं नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें केवल केंद्र एवं राज्य से मिलने वाले अनुदान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। स्थानीय स्तर पर स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों की वास्तविक आवश्यकताओं और जमीनी अनुभवों के आधार पर छठवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाएं तैयार की जाएंगी।
श्री पवैया आज अपने इंदौर भ्रमण के दौरान कमिश्नर कार्यालय में इंदौर संभाग के जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की संभाग स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में संभागायुक्त श्री भास्कर लाक्षाकार, आयोग के सदस्य श्री के.के. सिंह, इंदौर कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, आयोग के सदस्य सचिव श्री वीरेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। जिले से कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना सहित संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। श्री पवैया ने कहा कि मध्यप्रदेश में पांचवें राज्य वित्त आयोग ने वर्ष 2019 में अपना प्रतिवेदन दिया था। वर्तमान में राज्य सरकार पांचवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर कार्य कर रही है। अब प्रदेश में छठवें राज्य वित्त आयोग का गठन हुआ है। आयोग को आगामी पांच वर्षों के लिए अपना प्रतिवेदन तैयार करना है। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न संभागों का भ्रमण कर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था एवं स्थानीय स्वशासी निकायों को संवैधानिक आधार मिलने के बाद यह आवश्यक हुआ कि स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सुदृढ़ करने के लिए निष्पक्ष वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से राज्य वित्त आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की गई है।
श्री पवैया ने अधिकारियों से स्थानीय निकायों की वास्तविक समस्याओं, आवश्यकताओं और उपलब्धियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से जाना कि छठवें राज्य वित्त आयोग से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं और ऐसी कौन-सी व्यवस्थाएं की जा सकती हैं, जिनसे स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति और कार्यक्षमता में सुधार हो। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय निकायों के स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत अथवा नगरीय निकाय ने अपने स्तर पर राजस्व बढ़ाने का कोई सफल प्रयोग किया है तो उसकी जानकारी आयोग को दी जाए, ताकि ऐसे नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने के संबंध में अनुशंसा की जा सके।
उन्होंने बैठक में विभिन्न जिलों में किए जा रहे नवाचारों की भी जानकारी ली। श्री पवैया ने कहा कि स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विकास तथा अन्य स्थानीय दायित्वों से जुड़े क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने इंदौर में कचरा निष्पादन एवं उससे संसाधन विकसित करने, करारोपण और कर वसूली तथा अन्य जिलों में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्री पवैया ने स्थानीय निकायों द्वारा कराए जाने वाले निर्माण एवं विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि गुणवत्ता नियंत्रण को और प्रभावी बनाने के लिए वर्तमान व्यवस्था में किस प्रकार के सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि नियमों, प्रक्रियाओं अथवा गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था में किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता महसूस होती है तो अधिकारी अपने सुझाव आयोग को उपलब्ध कराएं। इन सुझावों को आयोग की अनुशंसाओं में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छठवें राज्य वित्त आयोग का उद्देश्य ऐसी व्यावहारिक एवं प्रभावी अनुशंसाएं तैयार करना है, जिनसे प्रदेश के पंचायत एवं नगरीय निकाय आने वाले वर्षों में अधिक वित्तीय रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और प्रभावी बन सकें।
बैठक में संभागायुक्त श्री भास्कर लाक्षाकार ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। अंत में कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने आभार व्यक्त किया।
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61 views | Dhar, Madhya Pradesh | Sep 10, 2026