#बालाघाट
75 प्रतिशत अनुदान पर मिलीं दो भैंसें, रंजीत दरबड़े ने शुरू किया डेयरी व्यवसाय
रोजाना 20 लीटर दूध का उत्पादन, 200 रुपये खर्च कर 450 रुपये की आय अर्जित कर रहे पशुपालक
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से पशुपालन बना आत्मनिर्भरता का जरिया
पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ ही लोगों के लिए स्वरोजगार और नियमित आय का प्रभावी माध्यम बन रहा है। मध्यप्रदेश शासन की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने जिले के पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर प्रदान किया है। योजना का लाभ लेकर खुर्सीपार के फोगल टोला निवासी रंजीत दरबड़े ने दो दुधारू भैंसों के साथ अपना डेयरी व्यवसाय शुरू किया है। आज वे दूध उत्पादन के माध्यम से प्रतिदिन आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
75 प्रतिशत अनुदान से मिली डेयरी व्यवसाय शुरू करने की राह
अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालक रंजीत दरबड़े ने पशुपालन विभाग की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ लेकर 75 प्रतिशत अनुदान पर मुर्रा नस्ल की दो दुधारू भैंसें प्राप्त कीं। इससे उनके लिए कम लागत में डेयरी व्यवसाय शुरू करने का रास्ता खुला। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने दूध उत्पादन को अपनी नियमित आय का साधन बनाया।
रंजीत बताते हैं कि दोनों भैंसों से उन्हें प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध के विक्रय से होने वाली आय से पशुओं के पालन-पोषण और दूध उत्पादन पर होने वाले खर्च की पूर्ति हो जाती है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 200 रुपये खर्च करने पर उन्हें करीब 450 रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस तरह डेयरी व्यवसाय से उन्हें नियमित आमदनी हो रही है और उनका कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
पशुपालन से बढ़ रहा आत्मविश्वास, मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति
रंजीत दरबड़े के लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी है। दुधारू भैंसों से नियमित दूध उत्पादन होने के कारण उन्हें प्रतिदिन आय का साधन मिला है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन की संभावनाओं और शासकीय योजनाओं की उपयोगिता भी सामने आती है।
उन्होंने इस योजना का लाभ दिलाने में सहयोग के लिए पशु प्रजनन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. योगेंद्र घोड़ेश्वर के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि योजना से मिली सहायता ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।
पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने पर जोर
उपसंचालक डॉ. घनश्याम परते के मार्गदर्शन में जिले में पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पशुपालन विभाग की योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने और उनकी आय के साधन विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रंजीत दरबड़े की सफलता इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण पशुपालक स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना जैसी पहल से पशुपालन को व्यावसायिक स्वरूप देने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है। रंजीत दरबड़े की यह पहल अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणादायक है कि उपलब्ध शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर वे अपने गांव में ही रोजगार और आय के नए अवसर विकसित कर सकते हैं।
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1 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Oct 16, 2026