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*देवास गेट पर स्थानान्तरण से बालिका शिक्षा को मिला नया आयाम*
*शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय की सफलता-कहानी : सुगम पहुँच से सपनों को मिली उड़ान*
उज्जैन,16 सितंबर। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय, जो जिले का लीड कॉलेज भी है का सितम्बर 2020 में देवास गेट स्थित भवन में स्थानान्तरण बालिका शिक्षा को सुगम बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी एवं परिणामदायी प्रशासनिक निर्णय सिद्ध हुआ है। यह निर्णय मात्र भवनों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा तक सहज, सुरक्षित और निरन्तर पहुँच सुनिश्चित करने का माध्यम बना।
पूर्व स्थिति एवं चुनौती
इससे पूर्व महाविद्यालय तेलीबाड़ा क्षेत्र में संचालित था। तत्पश्चात् इसे राम जनार्दन मंदिर के समीप स्थित नवीन भवन में स्थानान्तरित किया गया। यह स्थान शहर के अपेक्षाकृत एकान्त क्षेत्र में होने के कारण छात्राओं, विशेषकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तथा जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाली बालिकाओं के लिए नियमित आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक नहीं था। अभिभावकों की चिन्ता और छात्राओं की वास्तविक असुविधा स्वाभाविक थी। पहुँच की यही कठिनाई अनेक बालिकाओं की उच्च शिक्षा के मार्ग में बाधा बन सकती थी।
प्रशासनिक निर्णय : सुरक्षा, सुविधा और पहुँच को प्राथमिकता
छात्राओं की इन व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए शासन-प्रशासन द्वारा सितम्बर 2020 में शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय को राम जनार्दन मंदिर के समीप स्थित भवन से हटाकर देवास गेट स्थित माधव महाविद्यालय के भवन में स्थानान्तरित किया गया। इसी क्रम में माधव महाविद्यालय को राम जनार्दन मंदिर के समीप स्थित भवन में स्थानान्तरित किया गया।
इस निर्णय के मूल में केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि बालिकाओं की सुरक्षा, सुविधा तथा उच्च शिक्षा तक उनकी सहज पहुँच का प्रश्न प्रमुख था। देवास गेट उज्जैन का प्रमुख आवागमन केन्द्र है। रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड की निकटता तथा सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता के कारण गाँवों और कस्बों से आने वाली छात्राओं के लिए महाविद्यालय तक पहुँचना अपेक्षाकृत सरल हो गया।
स्थानान्तरण का सकारात्मक प्रभाव तत्काल दिखाई दिया। छात्राओं ने तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके लिए यह केवल कॉलेज की नई जगह नहीं, बल्कि शिक्षा के मार्ग में आई एक बड़ी बाधा का समाधान था। सुगम परिवहन ने छात्राओं के समय, श्रम और पारिवारिक चिन्ताओं को कम किया तथा पढ़ाई को निर्बाध रूप से जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देवास गेट स्थित भवन ने अनेक सम्भावनाओं को जीवित रखा। किसी छात्रा ने यहाँ स्नातक की शिक्षा पूर्ण की, किसी ने स्नातकोत्तर की ओर कदम बढ़ाया, किसी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, तो किसी ने वह भविष्य चुना जिसकी कल्पना कभी केवल सपने के रूप में की गई थी। प्रत्येक छात्रा की अपनी कहानी है, किन्तु उन कहानियों में एक साझा सूत्र है—उसे अवसर मिला और वह अवसर उसके घर से बहुत दूर नहीं था।
यही इस स्थानान्तरण की सबसे बड़ी सफलता है। किसी गाँव की बेटी के लिए कॉलेज तक पहुँचने का साधन मिल जाना सामान्य प्रतीत हो सकता है, पर उसी साधन के अभाव में उसकी पढ़ाई छूट सकती है और उच्च शिक्षा का सपना अधूरा रह सकता है। यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि किसी बेटी की शिक्षा उसके रास्ते की भौगोलिक कठिनाइयों के कारण रुकनी नहीं चाहिए।
वर्ष 2020 का यह निर्णय केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि बालिका शिक्षा को प्राथमिकता देने वाला निर्णय था। एक भवन बदला, रास्ते बदले, आवागमन आसान हुआ, अभिभावकों का भरोसा बढ़ा और अनेक बेटियों के सपनों को आगे बढ़ने का मार्ग मिला।
शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय का देवास गेट स्थित भवन में आना शिक्षा को छात्राओं के और निकट ले आने का उदाहरण है। जब कोई छात्रा शिक्षा पूर्ण कर अपने सपनों की मंजिल तक पहुँचती है, तब उस भवन की प्रत्येक कक्षा और प्रत्येक गलियारा उसकी सफलता की कहानी कहता है।