*इंद्रदेव की शिकायत के पीछे छिपी असली कहानी: वायरल खबरों में मजाक बना सूरज तिवारी, लेकिन गांव की समस्या अब भी जस की तस!?
हरदोई/मल्लावां।
हरदोई के नेवादा परस गांव निवासी सूरज तिवारी द्वारा जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर इंद्रदेव के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत इन दिनों सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कई समाचार पोर्टलों ने इस शिकायत को “इंद्रदेव के खिलाफ शिकायत”, “बारिश रोकने के लिए डीएम से इंद्रदेव को नोटिस जारी करने की मांग” जैसे मजाकिया एंगल से पेश किया।
लेकिन इस वायरल शिकायत के पीछे की असली कहानी सिर्फ इंद्रदेव की शिकायत नहीं है।
मुद्दा बारिश से ज्यादा गांव की बदहाल स्थिति का है
सूरज तिवारी की शिकायत में साफ तौर पर लिखा गया है कि लगातार बारिश के चलते सड़कों, गलियों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है, दैनिक कामकाज प्रभावित है और किसानों के सामने फसल को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
यानी इंद्रदेव का नाम लेकर की गई शिकायत को अगर उसके पूरे संदर्भ में पढ़ा जाए तो इसमें बारिश से पैदा हुई जमीनी परेशानियों की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास भी दिखाई देता है।
सूरज का दावा—पहले भी की गईं शिकायतें
सूरज तिवारी का कहना है कि गांव की इन समस्याओं को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
उनका आरोप है कि पूर्व में की गई शिकायतों पर IGRS निस्तारण रिपोर्ट में समस्या का वास्तविक समाधान किए जाने के बजाय औपचारिक कार्रवाई दिखाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
हालांकि, इन पुराने निस्तारणों को “फर्जी” बताए जाने की बात फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही सामने रखी जानी चाहिए; इसकी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
फिर सूरज ने इंद्रदेव को ही बना दिया शिकायत का जिम्मेदार
जब लगातार बारिश और जलभराव से परेशानी बनी रही, तो सूरज तिवारी ने 26 सितंबर 2026 को जनसुनवाई पोर्टल पर एक व्यंग्यात्मक शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने लिखा कि इंद्रदेव बिना पूर्व सूचना लगातार बारिश करा रहे हैं, जिससे आम जनता परेशान है। उन्होंने डीएम से अनुरोध किया कि चूंकि उनके पास इंद्रदेव का मोबाइल नंबर नहीं है, इसलिए प्रशासन अपने “दिव्य संपर्क माध्यम” से उनसे संपर्क कर बारिश नियंत्रित कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे।
यही हिस्सा बाद में खबरों का मुख्य आकर्षण बन गया।
लेकिन IGRS रिकॉर्ड में अभी भी शिकायत लंबित
सूरज तिवारी द्वारा उपलब्ध कराए गए IGRS स्क्रीनशॉट में शिकायत संख्या 40015526101183, शिकायत की तारीख 26-09-2026 और स्थिति “लंबित” दिखाई दे रही है।
उत्तर प्रदेश के आधिकारिक जनसुनवाई पोर्टल के अनुसार नागरिक शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं और निर्धारित समय में कार्रवाई न होने पर अनुस्मारक भी भेज सकते हैं।
अब असली सवाल—वायरल शिकायत पर हंसी या गांव की समस्या पर कार्रवाई?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मीडिया में सूरज तिवारी की शिकायत का व्यंग्य वाला हिस्सा तेजी से वायरल हुआ, जबकि उसके पीछे लिखी गांव की समस्याएं—जलभराव, आवागमन में परेशानी, रोजमर्रा के काम प्रभावित होना और किसानों की चिंता—अपेक्षाकृत कम चर्चा में आईं।
इंद्रदेव के नाम वाली शिकायत भले ही व्यंग्य हो, लेकिन अगर गांव में जलभराव और आवागमन की समस्या वास्तव में बनी हुई है तो उसका समाधान किसी व्यंग्य से नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई से ही होगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नेवादा परस गांव की वास्तविक समस्याओं पर संबंधित विभाग मौके पर जाकर जांच करता है या यह शिकायत भी सिर्फ वायरल खबर बनकर रह जाती है।
जन हुंकार न्यूज़ की पड़ताल का सवाल:
👉 क्या सूरज तिवारी की “इंद्रदेव वाली शिकायत” को सिर्फ मजाक समझकर छोड़ दिया जाएगा, या उसके पीछे उठाए गए गांव के जलभराव और आवागमन के सवालों का भी प्रशासन जवाब देगा?
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