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Jan Upkar news

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लखनऊ: “मारपीट हमारे साथ हुई, FIR हमारे खिलाफ दर्ज कर दी गई”—दुबग्गा मामले में आरोपित पक्ष ने उठाए सवाल

कार मालिक पक्ष का दावा—घटना वाले दिन ही चौकी इंचार्ज को दिया था प्रार्थना पत्र, सुनवाई न होने का आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग

लखनऊ। दुबग्गा थाना क्षेत्र में वाहन संख्या UP32XN5943 से जुड़े कथित मारपीट प्रकरण में अब आरोपित पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आरोपित पक्ष का कहना है कि घटना वाले दिन ही उन्होंने नजदीकी पुलिस चौकी के प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद दूसरे पक्ष के प्रार्थना पत्र पर एफआईआर दर्ज कर दी गई।

आरोपित पक्ष के अनुसार, घटना में मारपीट उनके साथ हुई थी, लेकिन कार्रवाई उनके ही खिलाफ हो गई। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और घटना के समय दिए गए उनके प्रार्थना पत्र को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

क्या है विवाद?

उपलब्ध पुलिस आख्या के मुताबिक, शिकायतकर्ता राजेश कुमार वर्मा ने 28 सितंबर 2026 को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें 21 सितंबर 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे कार से जुड़े विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया गया। शिकायत में दाहिने हाथ की उंगली टूटने की बात भी कही गई है।

पुलिस आख्या में मुकदमा संख्या 0288/2026 तथा बीएनएस की धारा 115(2), 117(2) और 352 का उल्लेख दिखाई देता है। आख्या के अनुसार, मामले की विवेचना जारी है और वाहन स्वामी व चालक से संपर्क करने के प्रयास किए गए हैं।

आरोपित पक्ष के दावे की भी जांच जरूरी

आरोपित पक्ष का दावा है कि उसने घटना के दिन ही पुलिस चौकी में अपनी शिकायत दी थी। हालांकि, फिलहाल उस प्रार्थना पत्र की प्रति, उसकी प्राप्ति का प्रमाण, मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयानों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि पहले दिए गए प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी और दोनों पक्षों के आरोपों में तथ्यात्मक स्थिति क्या है।

निष्पक्ष जांच की मांग

मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के दिन दिए गए कथित प्रार्थना पत्र का पुलिस रिकॉर्ड में उल्लेख है या नहीं, दोनों पक्षों की चोटों का मेडिकल परीक्षण हुआ था या नहीं और विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों को किस तरह शामिल किया जा रहा है।

जन हुंकार न्यूज़ का पक्ष: मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। संबंधित पुलिस अधिकारी और दूसरे पक्ष का आधिकारिक जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।

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हरदोई: सपा नेता रामज्ञान गुप्ता को गुंडा एक्ट के मामले में नोटिस, 23 अक्टूबर को पेश होने के निर्देश

50 हजार रुपये के बंधपत्र और जमानत राशि का भी उल्लेख; नेता ने कार्रवाई को चुनौती देने की बात कही

हरदोई। समाजवादी पार्टी के नेता रामज्ञान गुप्ता के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत चल रही कार्रवाई की प्रक्रिया से जिले में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर अपर जिलाधिकारी (एडीएम) न्यायालय ने उन्हें 23 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया है। मामले में 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की जमानत से संबंधित निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, आदेश की प्रमाणित प्रति के आधार पर इसकी सटीक कानूनी स्थिति की पुष्टि आवश्यक है।

पुलिस रिपोर्ट में कई मुकदमों का हवाला

बताया गया है कि पुलिस रिपोर्ट में रामज्ञान गुप्ता के खिलाफ दर्ज विभिन्न मुकदमों, हिस्ट्रीशीट तथा सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और आईटी एक्ट से संबंधित मामलों का उल्लेख किया गया है। इन तथ्यों के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकारी की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

सपा नेता ने लगाए राजनीतिक दबाव के आरोप

रामज्ञान गुप्ता ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जनहित के मुद्दे उठाने और जनता की समस्याओं को सामने रखने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय सत्तापक्ष के नेताओं के इशारे पर आवाज दबाने की कोशिश किए जाने का भी दावा किया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सपा नेता ने कार्रवाई को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब मामले में अगली कानूनी कार्यवाही और संबंधित न्यायालय के आदेश पर निगाहें हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि सुनवाई के बाद क्या निर्णय लिया जाता है और क्या जिला बदर जैसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित या आदेशित की जाती है। प्रशासन का पक्ष तथा संबंधित आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने पर मामले की कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: इस खबर में राजनीतिक दबाव संबंधी बातें सपा नेता के आरोपों पर आधारित हैं। अंतिम आदेश और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना बाकी है।

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🚨 हरदोई: कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा! आखिर भोली देवी की पेंशन किसने रोकी?

न चाकू चला, न गोली… लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा बुजुर्ग महिला को मृत दिखाए जाने का आरोप! 😳

📍 हरदोई के गोवर्धनपुर गांव की भोली देवी की वृद्धावस्था पेंशन करीब ढाई से तीन साल से बंद होने का दावा है। परिवार का आरोप है कि पहले रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शाया गया और बाद में पेंशन सूची से उनका नाम भी गायब हो गया।

बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप—आखिर इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है?

🎥 देखिए पूरी वीडियो रिपोर्ट और सुनिए पीड़ित परिवार की बात।

📢 हरदोई प्रशासन से सवाल: भोली देवी के रिकॉर्ड की जांच कब होगी? पेंशन कब बहाल होगी? लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई कौन करेगा?

👇 आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं और पोस्ट को शेयर करें, ताकि यह मामला जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचे।

📰 जन हुंकार न्यूज़
जनता की आवाज़, सच के साथ।

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फतेहपुर: असोथर चेकपोस्ट पर ओवरलोड मौरंग वाहनों की आवाजाही का आरोप, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

तड़के 4:30 बजे का वीडियो सामने आने का दावा, बैरियर और सीसीटीवी की व्यवस्था पर भी सवाल

फतेहपुर। असोथर थाना क्षेत्र में मौरंग लदे वाहनों की आवाजाही और कथित ओवरलोडिंग को लेकर चेकपोस्ट की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स और पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशों के बावजूद नियमों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर स्थानीय स्तर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू होते ही पीछे हटे वाहन?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला तड़के करीब 4:30 बजे का बताया जा रहा है। दावा है कि असोथर चेकपोस्ट पर वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद मौरंग लदे कुछ वाहन पीछे की ओर जाने लगे। मौके पर तैनात टीम वाहनों को रोककर जांच करती दिखाई देने की बात भी कही गई है। हालांकि, वाहनों के ओवरलोड होने और उनके पीछे हटने के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

बैरियर और सीसीटीवी को लेकर सवाल

मामले में चेकपोस्ट पर बैरियर और सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध न होने का भी दावा किया गया है। यदि यहां निर्धारित निगरानी संसाधन मौजूद नहीं हैं, तो संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठ सकती है।

थाना पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही पर नजर

जिलाधिकारी के आदेशों में अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों की निगरानी को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं तथा उनका कितना पालन हो रहा है, इसकी आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय थाना पुलिस, संबंधित जांच टीम और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय करने की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब प्रमुख सवाल यह है कि असोथर चेकपोस्ट पर वाहनों की जांच, निगरानी संसाधनों और कथित ओवरलोडिंग की स्थिति की जांच कौन करेगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी?

जन हुंकार न्यूज़ की अपील: यदि आपके पास इस मामले से संबंधित वीडियो या दस्तावेज हैं, तो उन्हें तारीख, समय और स्थान की जानकारी के साथ साझा करें। संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है।

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फतेहपुर: मझगवां में जलनिकासी बाधित, जलभराव से ग्रामीण परेशान

50 साल पुराने जलनिकासी मार्ग के बंद होने का आरोप, ग्रामीणों ने की समाधान की मांग

फतेहपुर। विजयीपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मझगवां में कोटेदार रामगोपाल यादव के दरवाजे के पास नाली का पानी जमा होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई घरों के पानी की निकासी का लगभग 50 वर्षों से इस्तेमाल हो रहा रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे जलभराव की स्थिति बन गई है।

ग्रामीणों के मुताबिक, जलनिकासी बाधित होने से आसपास गंदा पानी जमा रहता है। इससे मच्छरों के पनपने और बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका है।

इन परिवारों की जलनिकासी प्रभावित होने का दावा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रभावित परिवारों में ठाकुर अनिल सिंह, मोनू यादव, जयप्रकाश यादव, सोनू यादव, राजाराम यादव, छेदीलाल निषाद, शिवदत्त यादव, रामदत्त यादव, राजरानी निषाद, ठाकुर अतुल सिंह, भोला निषाद और अमरजीत निषाद सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों से मौके का निरीक्षण कराकर जलनिकासी की व्यवस्था बहाल कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर ग्रामीणों को जलभराव की समस्या से कब तक राहत दिलाते हैं।

नोट: जलनिकासी मार्ग बंद किए जाने के आरोपों और मामले की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

रिपोर्ट: पुष्पराज सिंह
ब्यूरो चीफ, जन हुंकार न्यूज़, फतेहपुर

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सहारनपुर: 15 हजार की कथित रिश्वत लेते कानूनगो गिरफ्तार, किसान ने लगाए गंभीर आरोप

सहारनपुर। एंटी करप्शन टीम ने कथित तौर पर 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते एक कानूनगो को गिरफ्तार किया है। मामले में किसान का आरोप है कि वह पिछले सात महीने से परेशान था और अब तक 82 हजार रुपये दे चुका था। किसान के मुताबिक, 40 हजार रुपये में कथित तौर पर सौदा तय हुआ था।

कार्रवाई के बाद मामले की जांच और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अहम होगी।

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हरदोई: वृद्धावस्था पेंशन बंद होने पर महिला ने लगाई न्याय की गुहार

हरदोई। गोवर्धनपुर गांव निवासी भोली देवी पत्नी जयराम ने वृद्धावस्था पेंशन बंद होने के मामले में जिलाधिकारी से जांच कराकर पेंशन बहाल करने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, पेंशन सत्यापन के बाद महिला का नाम लाभार्थी सूची से हटा दिया गया, जिससे उन्हें पेंशन मिलना बंद हो गया। महिला ने जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने प्रशासन से पेंशन बंद किए जाने के कारणों की जांच कराने और पात्रता की पुष्टि होने पर पेंशन बहाल करने की अपील की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से पेंशन बंद होने के वास्तविक कारण, विभागीय जांच और शिकायत पर हुई कार्रवाई की पुष्टि नहीं हो सकी है।

जन हुंकार न्यूज़

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रौसा में तालाब की जमीन पर कब्जे की शिकायत, जांच शुरू

हरदोई। रौसा गांव में तालाब की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और पक्के निर्माण के मामले में जांच शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता विमल किशोर पुत्र राजकिशोर ने प्रार्थना-पत्र देकर राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में खसरा संख्या 831/0.051 हेक्टेयर, जो तालाब की श्रेणी में दर्ज बताई गई है, पर कब्जे और निर्माण का आरोप लगाया गया है। साथ ही खसरा संख्या 839मि/0.291 हेक्टेयर का भी उल्लेख है।

अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या तालाब की जमीन पर नियमों के विरुद्ध कब्जा किया गया है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

तालाब की भूमि पर कब्जे और पक्के निर्माण का आरोप, मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग

हरदोई, उत्तर प्रदेश।

सरकारी अभिलेखों में दर्ज तालाब की जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण का मामला सामने आया है। मल्लावां क्षेत्र के एक निवासी ने मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को प्रार्थना-पत्र भेजकर राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्थलीय जांच कराने और संबंधित भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की है।

प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता विमल किशोर पुत्र राजकिशोर, निवासी मल्लावां क्षेत्र, जनपद हरदोई ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोगों द्वारा उनकी भूमि और उससे सटी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण कराया जा रहा है।

इन गाटा संख्याओं का किया गया उल्लेख

शिकायत में खसरा संख्या 839मि/0.291 हेक्टेयर तथा तालाब की श्रेणी में दर्ज खसरा संख्या 831/0.051 हेक्टेयर का उल्लेख किया गया है। प्रार्थी का आरोप है कि संबंधित भूमि पर निर्माण के लिए मिट्टी डालकर जमीन को समतल किया जा रहा है तथा मना करने पर विवाद और मारपीट की स्थिति पैदा होती है।

आवेदन में अन्य गाटा संख्याओं का भी जिक्र करते हुए आसपास की भूमि पर कब्जे और निर्माण से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने राजस्व अभिलेखों का मिलान कर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

12 अक्टूबर की घटना का भी उल्लेख

प्रार्थना-पत्र में 12 अक्टूबर 2026 को कथित तौर पर हुए घटनाक्रम का उल्लेख है। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि पर निर्माण की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से घटना की स्वतंत्र पुष्टि, निर्माण की वर्तमान स्थिति और संबंधित पक्षों का पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका है।

प्रशासनिक जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर भूमि का सीमांकन करें, खसरा-खतौनी और अन्य अभिलेखों का मिलान करें तथा तालाब की भूमि की श्रेणी और कब्जे की स्थिति की जांच करें।

यदि जांच में तालाब की भूमि पर अनधिकृत कब्जे या निर्माण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और आरोपित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

अब प्रमुख सवाल यह है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि की मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है और शिकायत पर प्रशासन कब तक जांच कर कार्रवाई करेगा?

जन हुंकार न्यूज़ — जनता की आवाज़, सच के साथ।

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हरदोई: जीवित बुजुर्ग महिला की वृद्धावस्था पेंशन बंद होने का आरोप, जांच और बहाली की मांग

हरदोई। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि किसी बुजुर्ग महिला की पेंशन बंद हो जाए और उसे दोबारा शुरू कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हरदोई जिले में वृद्धावस्था पेंशन से जुड़ा ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें पीड़िता ने पेंशन बंद किए जाने के मामले की जांच कराकर दोबारा लाभ दिलाने की मांग की है।

प्राप्त शिकायत एवं उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, श्रीमती भोली पत्नी जयराम, निवासी ग्राम गोवर्धनपुर, पोस्ट गोंडाराव, विकासखंड अहिरोरी, तहसील सदर, जनपद हरदोई ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर अपनी वृद्धावस्था पेंशन बंद होने की शिकायत की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पेंशन संबंधी विवरणों की जांच के दौरान सिक्योरिटी कर्मी की ओर से कथित रूप से गलत प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके बाद महिला की पेंशन बंद हो गई और पेंशन सूची से उनका नाम भी हट गया। पीड़िता का कहना है कि वह वृद्धावस्था पेंशन की पात्र लाभार्थी हैं और आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इस सहायता पर निर्भर हैं।

जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज कराई शिकायत

उपलब्ध दस्तावेजों में उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत का विवरण भी मौजूद है। शिकायत में संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कराने, जिम्मेदारी निर्धारित करने तथा पात्रता की पुष्टि के बाद वृद्धावस्था पेंशन दोबारा शुरू कराने की मांग की गई है।

जनसुनवाई अभिलेख के अनुसार, शिकायत 6 अगस्त 2025 को दर्ज कराई गई थी। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि शिकायत पर अंतिम स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान में पेंशन की स्थिति क्या है।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच

मामले में मुख्य सवाल यह है कि वृद्धावस्था पेंशन किस आधार पर बंद की गई, लाभार्थी का नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया क्या थी और क्या नियमानुसार सत्यापन किया गया था? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग के अभिलेखों और जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।

पीड़िता की मांग है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि पेंशन बंद करने में कोई त्रुटि या अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और पात्र पाए जाने पर उनकी पेंशन बहाल कराई जाए।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और बुजुर्ग महिला को पेंशन का लाभ दोबारा मिल पाता है या नहीं।

जन हुंकार न्यूज़ का पक्ष: इस मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक जवाब और वर्तमान पेंशन स्थिति उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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हरदोई: वृद्धावस्था पेंशन बंद होने पर महिला ने मांगा न्याय

हरदोई। जिले के गोवर्धनपुर गांव निवासी श्रीमती भोली पत्नी जयराम ने वृद्धावस्था पेंशन बंद होने के मामले में जिलाधिकारी से जांच और बहाली की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, पेंशन सत्यापन के दौरान कथित अनियमितता के चलते महिला की पेंशन बंद हो गई और उनका नाम लाभार्थी सूची से हटा दिया गया। पीड़िता ने इस संबंध में जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है।

महिला ने प्रशासन से पेंशन बंद किए जाने के कारणों की जांच कराने और पात्रता की पुष्टि के बाद पेंशन बहाल करने की मांग की है। अब देखना है कि संबंधित विभाग मामले की जांच कर पीड़िता को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

उपलब्ध दस्तावेजों से शिकायत पर हुई अंतिम कार्रवाई और पेंशन की वर्तमान स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी है।

जन हुंकार न्यूज़

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समान डिग्री, समान बॉन्ड, फिर भी वेतन में आधा फर्क—लखनऊ के इको गार्डन में बॉन्डेड डॉक्टरों का फूटा गुस्सा!

**लखनऊ: 'समान काम-समान वेतन' को लेकर इको गार्डन में बॉन्डेड डॉक्टरों का धरना, संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी**

**लखनऊ:**
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से निकले युवा डॉक्टरों ने वेतन विसंगतियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 2018, 2019 और 2020 बैच के MBBS डॉक्टर, जो प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में 2 साल का अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पूरा कर रहे हैं, लखनऊ के इको गार्डन में शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए हैं।
**क्या है पूरा विवाद?**
डॉक्टरों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को लेवल-10 पे-मैट्रिक्स (₹5,400 ग्रेड पे) के साथ DA, HRA, NPA और TA जैसे तमाम भत्ते मिल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, CHC और PHC में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को केवल ₹50,000 से ₹65,000 का फिक्स मानदेय दिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि समान योग्यता और समान बॉन्ड के बावजूद यह भेदभाव 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के अधिकार का हनन है।
**आश्वासन मिला, शासनादेश नहीं:**
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सितंबर माह में उपमुख्यमंत्री द्वारा 3 सितंबर तक शासनादेश (G.O.) जारी करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन केवल सैद्धांतिक प्रस्ताव पत्र थमाकर मामला टाल दिया गया। बार-बार के आश्वासनों से निराश होकर डॉक्टरों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
**डॉक्टरों की 2 प्रमुख मांगें:**
 * **वेतन समानता (Pay Parity):** CHC/PHC में तैनात सभी बॉन्डेड डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों के समान लेवल-10 (₹5,400 ग्रेड पे) और अन्य सभी देय भत्ते लागू किए जाएं।
 * **तत्काल शासनादेश (G.O.):** वेतन संशोधन से जुड़ा सरकारी आदेश बिना किसी देरी के तुरंत जारी किया जाए।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जब तक ठोस शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक उनका कार्य बहिष्कार और धरना जारी रहेगा, तथा आवश्यकता पड़ने पर वे भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे।

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लखनऊ: 'समान काम-समान वेतन' को लेकर इको गार्डन में बॉन्डेड डॉक्टरों का धरना, कार्य बहिष्कार की चेतावनी
​लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से निकले युवा डॉक्टरों ने वेतन विसंगतियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर 2 साल का अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पूरा कर रहे MBBS डॉक्टरों ने इको गार्डन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।  
​2018, 2019 और 2020 बैच के इन बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर्स का आरोप है कि एक ही डिग्री और एक जैसे बॉन्ड के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे रहे डॉक्टरों के साथ आर्थिक भेदभाव किया जा रहा है।  
​क्या है डॉक्टरों का मुख्य दर्द?
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को लेवल-10 पे-मैट्रिक्स (₹5,400 ग्रेड पे) के साथ महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) दिया जा रहा है। इसके विपरीत, CHC और PHC में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को महज ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का तय मानदेय दिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के मूल सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है।  
​आश्वासन के बाद भी नहीं आया शासनादेश (G.O.)
डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि सितंबर माह में उपमुख्यमंत्री द्वारा 3 सितंबर तक शासनादेश (G.O.) जारी करने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, तय समय बीत जाने के बाद भी केवल सैद्धांतिक प्रस्ताव पत्र ही सामने आया, कोई ठोस सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ।  
​मुख्य माँगें:
​वेतन समानता (Pay Parity): CHC/PHC में तैनात सभी बॉन्डेड डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों के समकक्ष लेवल-10 (₹5,400 ग्रेड पे) और अन्य सभी देय भत्ते (DA, HRA, NPA, TA) दिए जाएं।  
​समयबद्ध शासनादेश: वेतन संशोधन को लेकर लंबित सरकारी आदेश (G.O.) बिना किसी देरी के तत्काल जारी किया जाए।  
​डॉक्टरों ने दो-टूक कहा है कि जब तक सरकार इस विसंगति को दूर करते हुए आधिकारिक आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन और संपूर्ण कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टरों ने भूख हड़ताल पर जाने की भी चेतावनी दी है।  

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होम गार्ड भर्ती प्रक्रिया में संशोधन को लेकर, इकोगार्डन लखनऊ में धरना प्रदर्शन जारी। देखिए आखिर क्या है मांग। <nis:link nis:type=tag nis:id=इकोगार्डन_प्रोटेस्ट nis:value=इकोगार्डन_प्रोटेस्ट nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=janhunkarnews nis:value=JanHunkarNews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=homeguard_protest nis:value=Homeguard_protest nis:enabled=true nis:link/>
Ground report: Tensions rise as public and officials clash over disputed actions. What are your thoughts on this situation? <nis:link nis:type=tag nis:id=groundreport nis:value=GroundReport nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=breakingnews nis:value=BreakingNews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=currentaffairs nis:value=CurrentAffairs nis:enabled=true nis:link/>
ग्रेटर नोएडा: एक परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत का मामला सामने आया है। मृतकों में माता-पिता और उनके तीन बच्चे शामिल हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, किसी खाद्य पदार्थ के सेवन से मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों के बाद स्पष्ट हो सकेगी।

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🚨 कानपुर पुलिस लाइन में होमगार्ड अभ्यर्थियों का हंगामा, मेडिकल प्रक्रिया पर उठे सवाल!

📍 कानपुर, उत्तर प्रदेश।

कानपुर पुलिस लाइन में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा नारेबाजी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि मेडिकल प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर पैसों की वसूली को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध जताया। इस मामले को लेकर मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई।

अभ्यर्थियों ने मेडिकल प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

सवाल यह है कि क्या अभ्यर्थियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर मेडिकल प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी?

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🚨 कानपुर पुलिस लाइंस में हंगामा, मेडिकल परीक्षण के दौरान रुपये लेकर पर्ची देने की शिकायत

📍 कानपुर, उत्तर प्रदेश।

कानपुर पुलिस लाइंस में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण के दौरान हंगामे की स्थिति सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, मेडिकल प्रक्रिया के दौरान रुपये लेकर पर्ची दिए जाने को लेकर शिकायत की गई है। बताया जा रहा है कि एक गाड़ी में मौजूद कंपाउंडर के माध्यम से पर्ची दिए जाने का मामला उठाया गया।

सूचना मिलने के बाद मौके पर दो एसीपी के पहुंचने की जानकारी है। मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान और शिकायत की पुष्टि होना अभी बाकी है।

फिलहाल, मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने और प्रशासनिक जांच से जुड़ी जानकारी का इंतजार है।

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माधोगंज गल्ला मंडी में आज का ताजा भाव।
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🚨 आज़ादी के दशकों बाद भी सड़क का इंतज़ार! आखिर कब बदलेगी सलेमपुर की तस्वीर?

📍 हरदोई, उत्तर प्रदेश।

नहर पर पुल बन गया, लेकिन गांव तक पहुंचने वाला रास्ता आज भी बदहाल! कीचड़ और दलदल से जूझ रहे ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी हरदोई से सड़क निर्माण की गुहार लगाई है।

हरदोई जनपद के विकासखंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत डही के मजरा सलेमपुर में करीब 900 मीटर का मार्ग ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दौरान रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे लोगों को रोजाना आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

🚜 किसानों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक की मुश्किलें

ग्रामीणों का कहना है कि बदहाल रास्ते के कारण गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। किसानों के लिए कृषि यंत्र ले जाना और खेतों से उपज बाहर निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

🛣️ 2 किलोमीटर की दूरी के लिए 10 किलोमीटर का चक्कर!

ग्रामीणों के अनुसार, सलेमपुर से फतेहपुर होते हुए नया गांव बाजार की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। लेकिन रास्ता खराब होने के कारण उन्हें लालपुर, सादिक मऊ समेत अन्य मार्गों से होकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। इससे करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

📢 ग्रामीणों की जिलाधिकारी से सीधी मांग

सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा जाहिर की और जिलाधिकारी हरदोई से हस्तक्षेप की अपील की। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए सड़क चाहते हैं।

समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में मतदान के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।

🎥 वीडियो में देखिए ग्रामीणों की जुबानी उनकी समस्या और सुनिए जिलाधिकारी हरदोई से उनकी मांग।

❓ सवाल यह है कि जब गांव तक पहुंचने वाला मार्ग महज 900 मीटर का है, तो इसके निर्माण के लिए ग्रामीणों को कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

जन हुंकार न्यूज़ संबंधित अधिकारियों से आग्रह करता है कि ग्रामीणों की समस्या का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण कराया जाए और सड़क निर्माण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाए।

जन हुंकार न्यूज़
जनता की आवाज़, सच के साथ।

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🚨 भदोही में मासूम छात्रा से मारपीट का आरोप! शिक्षक पर बाल उखाड़ने और गाली देने के गंभीर आरोप

📍 भदोही, उत्तर प्रदेश।

जिस शिक्षक पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी होती है, उसी पर अगर मासूम छात्रा के साथ मारपीट और अभद्रता के आरोप लगें, तो सवाल उठना लाजिमी है।

भदोही के एक निजी स्कूल की कक्षा 3 की छात्रा अनोखी ने शिक्षक मनोज पर पिटाई करने, गाली देने और बाल खींचकर उखाड़ने का आरोप लगाया है। छात्रा के मुताबिक, अन्य बच्चों के साथ भी कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। स्कूल प्रबंधन पर भी शिकायत की सुनवाई नहीं करने के आरोप हैं।

⚖️ सवाल यह है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

आपकी राय में ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।

📰 जन हुंकार न्यूज़
जनता की आवाज़, सच के साथ।

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# 🚨 मेरठ 'नीला ड्रम' हत्याकांड: साहिल और मुस्कान को मृत्युदंड, अब आगे क्या?

**मेरठ (उत्तर प्रदेश):**
चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुख्य आरोपियों—**मुस्कान रस्तोगी** और **साहिल शुक्ला**—को दोषी करार देते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। मार्च 2025 में सामने आए इस सनसनीखेज मामले में सौरभ राजपूत का शव एक नीले ड्रम में बरामद किया गया था।
लगभग 19 महीने चली अदालती कार्यवाही और 126 सुनवाइयों के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 अहम गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया। अदालत ने साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मामला माना और दोनों को सजा-ए-मौत सुनाई।
<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/> ⚖️ क्या अब सीधे फांसी होगी? समझिए कानूनी प्रक्रिया
सत्र न्यायालय (District Court) द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि सीधे फांसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। भारतीय न्याय संहिता/आपराधिक प्रक्रिया के तहत मृत्युदंड के मामलों में कई संवैधानिक और न्यायिक चरण बाकी रहते हैं:
 1. **हाईकोर्ट द्वारा पुष्टि (Death Reference):**
   सत्र न्यायालय द्वारा दी गई फांसी की सजा तब तक निष्पादित नहीं हो सकती जब तक कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इसकी पुष्टि न कर दे। हाईकोर्ट पूरे केस रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और फोरेंसिक सबूतों की नए सिरे से समीक्षा करेगा।
 2. **सुप्रीम कोर्ट में अपील:**
   यदि हाईकोर्ट फांसी की सजा बरकरार रखता है, तो दोषियों के पास सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में अपील करने का वैधानिक अधिकार होता है।
 3. **रिव्यू और क्यूरेटिव पिटीशन:**
   सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद भी पुनर्विचार याचिका (Review Petition) और उसके बाद सुधारात्मक याचिका (Curative Petition) के विकल्प खुले रहते हैं।
 4. **संवैधानिक दया याचिका (Mercy Petition):**
   सभी न्यायिक मंचों से फैसला आने के बाद दोषी संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल और अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर सकते हैं। दया याचिका निरस्त होने के बाद ही निचली अदालत डेथ वारंट (Black Warrant) जारी करती है।
<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/> 🗳️ क्या बोलती है पब्लिक? जनमत सर्वे
इस फैसले के बाद कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा छिड़ गई है:
 * **पक्ष 1:** ऐसे जघन्य मामलों में मृत्युदंड ही एकमात्र न्याय है, जिससे समाज में कानून का डर बना रहे।
 * **पक्ष 2:** कई मानवाधिकार और कानूनी जानकारों का मानना है कि मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास (बिना पैरोल) दिया जाना चाहिए, ताकि सुधार का विकल्प बचे।
👉 **आपकी क्या राय है?** क्या अदालत का यह फैसला सही है या ऐसे मामलों में उम्रकैद ही पर्याप्त होती? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दर्ज करें।
**जन हुंकार न्यूज़** | सच की आवाज़, निष्पक्ष पड़ताल।
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🚨 **जनमत पोल: क्या कोर्ट का फैसला सही है या मिलना चाहिए सुधार का एक मौका?** ⚖️

मेरठ के चर्चित **'नीला ड्रम हत्याकांड'** में जिला अदालत ने साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में **मृत्युदंड (फांसी की सजा)** सुनाई है।
इस बड़े फैसले के बाद अब समाज दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है—एक वर्ग इसे अपराध के खिलाफ नज़ीर मान रहा है, तो दूसरा वर्ग कानूनी सुधार और उम्रकैद की वकालत कर रहा है।
**क्या बोलती है पब्लिक? आप किसके पक्ष में हैं?**
👇 **कमेंट बॉक्स में 1, 2 या 3 लिखकर अपनी राय दर्ज करें:**
1️⃣ **'हाँ, फांसी बिल्कुल सही है'** — ऐसे जघन्य अपराधों में सख्त सजा ही समाज में नज़ीर बनेगी।
2️⃣ **'नहीं, जीने का एक मौका मिलना चाहिए'** — मृत्युदंड की जगह उम्रकैद होनी चाहिए, ताकि पश्चाताप और सुधार का अवसर रहे।
3️⃣ **'कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा है'** — हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक इंतजार करना ही सही है।
💬 अपनी राय के साथ तर्क भी कमेंट्स में जरूर साझा करें।
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🚨 अमेठी: सीधी आंख में थी परेशानी, सर्टिफिकेट उल्टी आंख का बना दिया!

उत्तर प्रदेश के अमेठी में दिव्यांगता प्रमाणपत्र को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि राम औतार अपनी दाईं आंख की दिव्यांगता का प्रमाणपत्र बनवाने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें दूसरी आंख का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि राम औतार को इस गलती का पता तब चला, जब वह इलाज कराने डॉक्टर के पास पहुंचे। अब वह प्रमाणपत्र में सुधार कराने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

सवाल यह है कि प्रमाणपत्र जारी करने में इतनी बड़ी गलती कैसे हुई? अगर दस्तावेज में त्रुटि है, तो उसे ठीक कराने के लिए एक दिव्यांग व्यक्ति को बार-बार परेशान क्यों होना पड़ रहा है?

स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को मामले की जांच कर प्रमाणपत्र में नियमानुसार सुधार कराने और पीड़ित को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

📢 जन हुंकार न्यूज़ — जनता की आवाज़, सच के साथ।

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प्रतापगढ़: छात्रा से छेड़खानी के आरोप में दो युवक गिरफ्तार

प्रतापगढ़ में एक छात्रा से सरेराह छेड़खानी करने के आरोप में पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों को अपने साथ शहर में ले गई।

पुलिस की कार्रवाई से संबंधित अधिकृत जानकारी और मामले की आगे की कानूनी स्थिति का विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।

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