*अब खून की कमी छिपेगी नहीं: सारण में तीन माह तक चलेगा विशेष अनीमिया जांच एवं उपचार अभियान*
**25 अगस्त से 30 नवंबर तक स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों एवं पंचायत स्तर पर होगी स्क्रीनिंग*
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*किशोरियों एवं महिलाओं पर विशेष फोकस, गंभीर मरीजों को तत्काल रेफरल की सुविधा*
*डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से होगी जांच, प्रतिदिन 9,900 लाभार्थियों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य*
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सारण,25 अगस्त 2026
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थकान, कमजोरी, चक्कर आना और लगातार सुस्ती को अक्सर सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसके पीछे अनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। विशेषकर किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं में अनीमिया का समय पर पता लगाना और उपचार सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अनीमिया से पीड़ित लोगों की समय पर पहचान, जांच, उपचार एवं नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सारण जिले में 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक विशेष अनीमिया जांच एवं उपचार अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान अनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत संचालित किया जा रहा है।
अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। छपरा सदर अस्पताल से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र महतो, उपाधीक्षक डॉ. के.एम. दुबे एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविन्द कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल हुए। सोनपुर, बनियापुर, तरैया एवं मढ़ौरा से भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
*इस अवसर पर सदर अस्पताल में विशेष अनीमिया जांच शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 966 महिलाओं एवं किशोरियों की जांच की गई।
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सभी स्वास्थ्य संस्थानों एवं समुदाय स्तर पर होगी जांच
जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि अभियान के दौरान सभी आयु वर्ग के लोगों की अनीमिया जांच की जाएगी, लेकिन किशोरियों एवं महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में जांच की व्यवस्था की गई है।
इसके साथ ही वीएचएसएनडी, पीएमएसएमए सत्रों तथा आरबीएसके की मोबाइल स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी बच्चों एवं किशोर-किशोरियों की अनीमिया स्क्रीनिंग की जाएगी।
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*प्रतिदिन 9,900 लाभार्थियों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य*
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अभियान के तहत सारण जिले में प्रतिदिन 9,900 लाभार्थियों की अनीमिया स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जांच के बाद लाभार्थियों की स्थिति के अनुसार उपचार, आयरन-फोलिक एसिड की दवा, पोषण संबंधी परामर्श एवं आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
*डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से होगी जांच*
अभियान के दौरान डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से लाभार्थियों के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा की जांच की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां एवं सिरप उपलब्ध कराए जाएंगे।
मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से पीड़ित लाभार्थियों के लिए उपचार, चिकित्सकीय परामर्श एवं उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफरल की व्यवस्था रहेगी। गर्भवती महिलाओं में गंभीर अनीमिया की स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी में एफसीएम अथवा आईवी आयरन सुक्रोज से उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
अभियान के सफल संचालन के लिए टेस्ट स्ट्रिप्स, क्यूवेट, लैंसेट, अल्कोहल स्वाब, डिस्पोजेबल ग्लव्स, आईईसी सामग्री तथा रिकॉर्डिंग एवं रिपोर्टिंग से संबंधित आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
*गंभीर अनीमिया के मामलों में तत्काल रेफरल*
अलग-अलग आयु वर्ग के लिए निर्धारित मानकों के आधार पर जांच के बाद उपचार किया जाएगा। बच्चों, किशोर-किशोरियों, प्रजनन आयु की महिलाओं, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा पुरुषों को उनकी स्थिति के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
गंभीर अनीमिया पाए जाने पर मरीज को तत्काल जिला अस्पताल अथवा प्रथम रेफरल इकाई भेजा जाएगा। उपचार के बाद भी हीमोग्लोबिन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं होने की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार आगे की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
*स्कूलों में बच्चों एवं किशोर-किशोरियों की विशेष स्क्रीनिंग*
आरबीएसके की मोबाइल हेल्थ टीमों को सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12वीं तक के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों की अनीमिया जांच की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक कार्य दिवस में स्वास्थ्य जांच के दौरान अनीमिया स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दी जाएगी।
वहीं, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा 6 से 59 माह तक के बच्चों की सूची तैयार कर आयरन-फोलिक एसिड सिरप के वितरण में सहयोग किया जाएगा। स्कूल नहीं जाने वाले 5 से 9 वर्ष के बच्चों को आवश्यकता के अनुसार गुलाबी आईएफए गोली उपलब्ध कराने तथा लाभार्थियों को नजदीकी जांच केंद्र तक पहुंचाने में भी आशा कार्यकर्ता सहयोग करेंगी।
*सिर्फ जांच नहीं, पोषण परामर्श भी
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अभियान का उद्देश्य केवल हीमोग्लोबिन की जांच करना नहीं, बल्कि अनीमिया की रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है। जांच के लिए आने वाले लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आयरन युक्त खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार एवं बेहतर पोषण के संबंध में जानकारी दी जाएगी।
सीएचओ, एएनएम एवं आरएमएनसीएच+एन काउंसलर द्वारा अनीमिया की रोकथाम, पोषण, मोटापा एवं अन्य पोषण संबंधी विषयों पर भी आवश्यक परामर्श दिया जाएगा।
*प्रतिदिन शाम 4 बजे तक होगी रिपोर्टिंग*
अभियान के दौरान जांच किए गए सभी लाभार्थियों का विवरण अनीमिया मुक्त भारत एप्लीकेशन अथवा गूगल शीट पर प्रतिदिन शाम 4 बजे तक दर्ज किया जाएगा। मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से पीड़ित पाए जाने वाले लाभार्थियों के उपचार, रेफरल, परामर्श एवं फॉलोअप की विशेष निगरानी की जाएगी।
जिला स्तर पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी तथा जिला कार्यक्रम समन्वयक अभियान में सहयोग करेंगे। जिला कार्यक्रम प्रबंधक को अभियान का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
प्रखंड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक एवं प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक अभियान की तैयारियों, दवाओं एवं उपकरणों की उपलब्धता, स्क्रीनिंग तथा अनुश्रवण की जिम्मेदारी संभालेंगे। सिविल सर्जन एवं अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के स्तर से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियान की नियमित समीक्षा एवं निगरानी की जाएगी।
**समय पर पहचान और उपचार है अभियान का उद्देश्य
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सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य अनीमिया से पीड़ित लोगों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना तथा गंभीर मामलों को जटिल होने से पहले उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि तीन माह तक चलने वाला यह अभियान स्वास्थ्य संस्थानों, विद्यालयों एवं समुदाय स्तर तक पहुंचकर विशेष रूप से किशोरियों एवं महिलाओं को अनीमिया से बचाव और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नियमित जांच, संतुलित आहार, आयरन युक्त पोषण एवं समय पर उपचार के माध्यम से अनीमिया की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
3 views | Saharsa, Bihar | Aug 25, 2026