पद-प्रतिष्ठा भूले, किरदार में ढले डॉक्टर-शिक्षक… 40 दिन गांव-गांव गवरी के रंग में रंगा मेवाड़
उदयपुर। मेवाड़ की मिट्टी में गवरी सिर्फ लोकनाट्य नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की 40 दिन की जीवंत यात्रा है। इस सफर में पद और पेशे की पहचान पीछे छूट जाती है और कलाकार अपने किरदार में रम जाते हैं। हवाला गांव में डॉक्टर गणेश लाल बंजारे बनकर गवरी खेल रहे हैं, वहीं टेनिस कोच खेमराज गमेती ‘गोमा के भाई’ और शिक्षक भगवानलाल गमेती ‘भियांवड़’ की भूमिका निभा रहे हैं। गवरी के कलाकार इन 40 दिनों में जूते-चप्पल, मांस-मदिरा, हरी सब्जी और खाट का त्याग कर कठिन नियम निभाते हैं। गांव-गांव घूमती गवरी आज भी मेवाड़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवित रखे हुए है।
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