01.प्रेस विज्ञप्ति
नालंदा।
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दिनांक: 07 अगस्त 2026
स्थान: आत्मा सभागार, बिहारशरीफ (नालंदा)
**दलहन की वैज्ञानिक खेती विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन**
कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), नालंदा द्वारा आज दिनांक 07 अगस्त 2026 को आत्मा सभागार, बिहारशरीफ में "दलहन की वैज्ञानिक खेती" विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को दलहन, विशेषकर अरहर (तूर) की वैज्ञानिक खेती की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराकर उत्पादन एवं आय में वृद्धि करना था।
कार्यक्रम में जिले के सभी 20 प्रखंडों से लगभग 150 प्रगतिशील किसान उपस्थित हुए। साथ ही सभी प्रखंडों के प्रखंड कृषि | आत्मा की प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (BTM), सहायक तकनीकी प्रबंधक (ATM) एवं आत्मा नालंदा की प्रीति कुमारी सहित कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उप परियोजना निदेशक, आत्मा, नालंदा श्री धनंजय कुमार सिंह ने सभी किसानों एवं अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने जिले में दलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार, उत्पादकता बढ़ाने तथा वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसानों की आय में वृद्धि की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का भी आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), हरनौत के वैज्ञानिक श्री उमेश नारायण उमेश ने अरहर की वैज्ञानिक खेती पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अरहर की खेती के लिए जल निकास वाली दोमट अथवा बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है। किसानों को प्रमाणित एवं उन्नत किस्मों का चयन कर समय पर बुवाई करनी चाहिए।
उन्होंने किसानों को निम्न महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां दीं—
खेत की 2–3 बार अच्छी जुताई कर समतल एवं भुरभुरी भूमि तैयार करें।
प्रमाणित एवं रोगमुक्त बीज का उपयोग करें तथा बुवाई से पूर्व राइजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार अवश्य करें।
अनुशंसित दूरी पर कतारों में बुवाई करने से पौधों का उचित विकास होता है।
मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें तथा सल्फर एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी उपयोग करें।
समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण, जल निकासी तथा आवश्यक सिंचाई की व्यवस्था करें।
फली छेदक एवं अन्य कीटों की नियमित निगरानी कर समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएं।
फसल पकने पर समय पर कटाई एवं उचित भंडारण से उपज की गुणवत्ता बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान अरहर की उपज एवं गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान सहायक निदेशक, कृषि अभियंत्रण ने किसानों को दाल मिल की उपयोगिता, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं बेहतर विपणन के संबंध में जानकारी दी तथा बताया कि प्रसंस्करण के माध्यम से किसान अपनी आय में अतिरिक्त वृद्धि कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया तथा वैज्ञानिक खेती अपनाने का संकल्प दिलाया गया। किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
जारीकर्ता:
कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), नालंदा।
Samrat Choudhary
CMO Bihar
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Department of Agriculture, Government of Bihar
Nalanda, Bihar | Aug 7, 2026