पराली जलाने पर सख्ती, ड्रोन से होगी खेतों की निगरानी, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने उपायुक्तों के साथ की वर्चुअल बैठक, यमुनानगर में 2 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में धान की खेती..
यमुनानगर, 24 सितंबर। (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो: धान की फसल के अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और इसके उचित प्रबंधन को लेकर मुख्य सचिव हरियाणा अनुराग रस्तोगी ने प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ वर्चुअल बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी रखने तथा किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही योजनाओं और प्रोत्साहनों की जानकारी दी जाए। उन्होंने बताया कि यमुनानगर जिले के 648 गांवों में दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में धान की खेती की गई है और 52,122 किसान धान की फसल उगा रहे हैं। उन्होंने धान कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर रोकथाम के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों को नियमित रूप से किसानों से संपर्क करने और पराली के सुरक्षित प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध कराई जाती है।
ड्रोन से होगी निगरानी
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पराली के सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस विभाग को भी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा पराली जलाने के मामलों में नियमानुसार चालान और रेड एंट्री की कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने सीएक्यूएम के दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के साथ ड्रोन कैमरों के माध्यम से खेतों में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं का आकलन करने के लिए भुवन ऐप विकसित किया है। सीएक्यूएम द्वारा संबंधित फील्ड अधिकारियों को भुवन ऐप के माध्यम से जले हुए क्षेत्र का आकलन करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने चिन्हित पॉइंट्स का समयबद्ध सर्वे करने तथा कृषि एवं राजस्व विभाग के कर्मचारियों को फील्ड में जाकर मिसमैच डाटा को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित
मुख्य सचिव ने कहा कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे किसानों को आगामी फसल में आर्थिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने अधिकारियों से किसानों को खेत की मेड़ अथवा किसी भी प्रकार के फसल अवशेष को जलाने से बचने के लिए जागरूक करने को कहा। उन्होंने गांव के नंबरदार, ग्राम सचिव और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने गठित करने के दिए निर्देश
वर्चुअल बैठक के बाद उपायुक्त प्रीति ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने पराली के सुरक्षित भंडारण और उपयोग के लिए पराली का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा, ताकि पराली को जलाने की बजाय उसका उपयोग किया जा सके। उपायुक्त ने पंचायत स्तर पर उपलब्ध भूमि की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार पराली के सुरक्षित भंडारण के लिए उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने पराली प्रोटेक्शन फोर्स गठित करने के निर्देश भी दिए। इसमें जिला एवं ब्लॉक स्तर पर पुलिस, कृषि विभाग, प्रशासन, नोडल अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी रखेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेगी। उपायुक्त ने अधिकारियों को प्रतिदिन निगरानी और मामलों का नियमित आकलन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में सहायक कृषि अधिकारी विनीत जैन, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनोज कुमार सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।