‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ के अंतर्गत स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला का समापन, प्रशिक्षुओं ने विभिन्न माध्यमों पर उकेरे अपने रचनात्मक डिजाइन*
भागलपुर, 29 सितंबर 2026।
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ के अंतर्गत भागलपुर संग्रहालय परिसर में संचालित पांच दिवसीय स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला का आज समापन हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों का व्यावहारिक प्रयोग करते हुए अपने द्वारा तैयार किए गए डिजाइनों को कागज, कपड़े, अंगवस्त्र, दुपट्टे, रुमाल एवं अन्य माध्यमों पर स्क्रीन प्रिंटिंग के माध्यम से उकेरा।
कार्यशाला के पांचवें दिन का प्रशिक्षण आशुतोष कुमार उर्फ उदय कुमार, प्रशिक्षक—स्क्रीन प्रिंटिंग के मार्गदर्शन में संचालित हुआ। प्रशिक्षुओं ने स्वयं तैयार किए गए डिजाइनों को स्क्रीन पर रूपांतरित करने से लेकर विभिन्न सतहों पर प्रिंट करने तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया। इस दौरान स्क्रीन की तैयारी, डिजाइन की सही स्थिति निर्धारित करने, इंक के उचित प्रयोग तथा स्क्वीजी के माध्यम से डिजाइन को सतह पर स्थानांतरित करने की तकनीक का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
कार्यशाला में प्रशिक्षुओं ने अपनी रचनात्मक सोच और सीखी हुई तकनीक का प्रयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के डिजाइन तैयार किए। आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े कलाकारों ने अपने-अपने शर्ट पर आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र का लोगो स्क्रीन प्रिंट के माध्यम से अंकित किया। इस अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षुओं ने यह समझा कि किसी डिजाइन को वस्त्र सहित विभिन्न सतहों पर स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से किस प्रकार प्रिंट किया जा सकता है।
वहीं, कई प्रशिक्षुओं ने मंजूषा कला के पारंपरिक रूपांकनों एवं आकृतियों को स्क्रीन प्रिंटिंग के माध्यम से नए माध्यमों पर प्रस्तुत किया। मंजूषा कला के डिजाइनों को अंगवस्त्र, दुपट्टे, रुमाल, कागज तथा अन्य वस्त्रों पर प्रिंट किया गया। कुछ प्रशिक्षुओं ने अपनी कल्पना से तैयार की गई विभिन्न आकृतियों एवं डिजाइनों को भी अलग-अलग माध्यमों पर प्रिंट कर उनके व्यावहारिक एवं रचनात्मक उपयोग की संभावनाओं को समझा।
कार्यशाला के दौरान एक विशेष रचनात्मक प्रयोग जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा किया गया। उन्होंने जिला प्रशासन, भागलपुर द्वारा आयोजित बाढ़ राहत शिविरों में बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए आयोजित मंजूषा कला कार्यशाला के दौरान बच्चों द्वारा बनाई गई मंजूषा चित्रकृतियों को स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से शर्ट, कागज एवं अन्य वस्त्रों पर उकेरा। इस प्रयोग के माध्यम से बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को एक नए माध्यम में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
इस अवसर पर अंकित रंजन ने कहा कि स्क्रीन प्रिंटिंग जैसी तकनीक पारंपरिक कला और समकालीन प्रयोग के बीच एक सेतु का कार्य कर सकती है। किसी कलाकार द्वारा बनाए गए मूल डिजाइन को विभिन्न माध्यमों पर पुनः प्रस्तुत करने की सुविधा मिलने से कला को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कार्यशाला में सीखी गई तकनीक का प्रयोग केवल अभ्यास तक सीमित न रखते हुए अपने मौलिक डिजाइनों, स्थानीय कला एवं सांस्कृतिक पहचान को नए माध्यमों में प्रस्तुत करने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार की गई सभी कलाकृतियों एवं प्रिंटों को आगामी ‘मंजूषा हटिया’ में प्रदर्शित किया जाएगा। इस बार मंजूषा हटिया का आयोजन 06 अक्टूबर 2026 को भागलपुर संग्रहालय परिसर में किया जाएगा। इसके माध्यम से कार्यशाला में प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए रचनात्मक प्रयोगों एवं तैयार कलाकृतियों को आम लोगों, कला प्रेमियों एवं आगंतुकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
अंकित रंजन ने आगे बताया कि ‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ के अंतर्गत अगला प्रशिक्षण कार्यक्रम 06 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक भागलपुर संग्रहालय में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान माली एवं महिला कलाकारों के लिए मंजूषा कला प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मंजूषा कला की तकनीक, पारंपरिक रूपांकनों तथा इसके रचनात्मक एवं समकालीन प्रयोगों से परिचित कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय कला परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना, कलाकारों को नए माध्यमों एवं तकनीकों से परिचित कराना तथा पारंपरिक कला को समकालीन संदर्भों में आगे बढ़ाने के लिए रचनात्मक अवसर उपलब्ध कराना है।
पांचवें दिन प्रशिक्षुओं ने पूरे उत्साह के साथ अपने डिजाइनों पर काम किया और स्वयं प्रिंट तैयार किए। कार्यशाला के दौरान उन्होंने तकनीकी दक्षता प्राप्त करने के साथ यह भी अनुभव किया कि किसी कलाकृति को कागज तक सीमित न रखते हुए वस्त्र एवं दैनिक उपयोग की विभिन्न वस्तुओं पर किस प्रकार रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है।
25 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित इस पांच दिवसीय स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षुओं ने स्क्रीन प्रिंटिंग की तकनीकी बारीकियों को समझने के साथ-साथ अपने मौलिक डिजाइनों, मंजूषा कला के पारंपरिक रूपांकनों एवं स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को विभिन्न माध्यमों पर प्रस्तुत करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। कार्यशाला ने युवाओं को कला, तकनीक और रचनात्मक नवाचार के बीच संबंध को समझने तथा अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति को नए माध्यमों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान किया।
जिला जनसंपर्क कार्यालय
भागलपुर
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22 views | Bhagalpur, Bihar | Sep 29, 2026