बदलाव की कहानी
प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किये गये चीता प्रोजेक्ट के सफलतापूर्वक 4 वर्ष पूर्ण
प्रधानमंत्री श्री मोदी जी की इस सौगात के लिए टिकटोली गेट पर जलेंगे दीप
आज देश में चीतों की संख्या हुई 52, श्योपुर को मिली विश्व व्यापी पहचान
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मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क को चीता पुर्नस्थापन योजना के तहत सर्वाधिक उपयुक्त पाये जाने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा अंर्तमहादीपीय चीता प्रोजेक्ट की शुरूआत 17 सितंबर 2022 को की गई थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क पहुंचकर देश-दुनियों को इस दुलर्भ प्रोजेक्ट की शुरूआत के तहत नामीबिया के चीतों को पहली बार भारत की धरती पर बसाया गया था।
उल्लेखनीय है कि भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी द्वारा 21 जून 2026 को कूनो नेशनल पार्क आगमन ने भी जिले का गौरव बढाया और पर्यटन गतिविधियों को गति दी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी कूनो नेशनल पार्क में चीता रिलीज तथा घडियाल रिलीज कार्यक्रमों में शामिल हुए, जिससे जिले में पर्यटन विकास को गति मिली है।
जैव विविधता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण इस प्रोजेक्ट को आज चार वर्ष पूर्ण हो रहे है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलो से इस प्रोजेक्ट की शुरूआत होने के बाद आज देश में चीतों की संख्या 52 हो गई है, जिसमें से 49 चीते श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में तथा 03 चीते गांधी सागर मंदसौर में विचरण कर रहे है। कूनों का जंगल चीतो के प्रजनन के लिए सकारात्मक रहा है। प्रधानमंत्री जी की इस सौगात पर 17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान के तहत टिकटोली गेट पर वन विभाग के तत्वाधान में हजारों दीप रोशन कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया जायेगा।
भारत से विलुप्त हुए चीतों की पुर्नबसाहट के इस सफल प्रोजेक्ट से श्योपुर जिले को विश्व व्यापी पहचान मिली, जिसके अच्छे प्रभाव हमारे सामने आये है। आज श्योपुर जिले को चीतों के लिए अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर जाना जा रहा है। इससे क्षेत्र में न केवल पर्यटन गतिविधियों को मजबूती मिली है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढे है। पर्यटको की संख्या साल दर साल बढती जा रही है। वर्ष 2023-24 में जहां 3 हजार 251 पर्यटक कूनो आये थे, वही 2024-25 में इनकी संख्या 4007 रही तथा वर्ष 2025-26 में कुल 9 हजार 117 पर्यटको ने कूनो का दीदार किया। कूनों नेशनल पार्क के लिए टिकटोली गेट को ही मुख्य रूप से विकसित किया जा रहा है, कूनो सफारी के लिए यहां जिप्सियां भी उपलब्ध है, सफारी के लिए ऑनलाइन बुकिंग सुविधा संचालित है तथा शीघ्र ही कूनों वनमंडल श्योपुर कार्यालय में बुकिंग के लिए काउंटर भी शुरू किया जा रहा है। एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा टिकटोली गेट पर पर्यटको की सुविधा के लिए भवन भी बनाये जा रहे है।
विध्यांचल पर्वत श्रृंखला की सुरम्य पहाडियों से घिरा कूनो नेशनल पार्क अपनी प्राकृतिक मनोहारी छंटा बिखेरते हुए पर्यटको के आकर्षण का केन्द्र रहा है, प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर कूनो नेशनल पार्क के आगोश में बहने वाली कूनो नदी इसे न केवल ओर भी अधिक खूबसूरत बना देती है, बल्कि इसके सपाट और चौडे़ तटो पर खिली हुई धूप में अठखेलियां करते मगरमच्छ यहां आने वाले लोगों को रोमांचित कर देते है। कूनो नेशनल पार्क में विभिन्न प्रकार के 174 पक्षियों की प्रजातियां मौजूद है, वही सैकडो प्रजातियां वन्य जीवों की है। पक्षियों की 12 प्रजाति तो दुलर्भ श्रेणी में मानी गई हैं।
वर्ष 1952 में भारत में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से भारत में चीतो को फिर से स्थापित करने की योजना चल रही थी। इसी उद्देश्य के लिए सिंतबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें चीता संरक्षण कोष के डॉ लोरी मार्कर, स्टीफन जेओ ब्रायन एवं अन्य चीता विशेषज्ञो ने दक्षिण अफ्रीकी चीता को भारत लाने सिफारिश की थी। पर्यावरण और वन मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्य जीव संस्थान (वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया, जिसमें 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के नौरादेही अभ्यारण, कूनो पालपुर अभ्यारण एवं राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया, इन तीनो में से भी कूनो अभ्यारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया।
भारत में चीतों के रहवास के लिए कूनो नेशनल पार्क में निर्धारित प्रोटोकॉल और गाइडलाइन के अनुसार कार्य जारी है। परियोजना के एकीकृत प्रबंधन में कूनो के राष्ट्रीय उद्यान के 750 वर्ग किलोमीटर में चीतों के रहवास के लिए उपयुक्तता है। इसके अतिरिक्त करीब 3 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र दो जिलों श्योपुर और शिवपुरी में चीतों के स्वंच्छद वितरण के लिए उपयुक्त हैं।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से लगे हुए ग्रामों के लोगों को चीता मित्र बनाया गया है। यहाँ चीतों के रहवास के लिए अनुकूल परिस्थितियों का विकास किया गया है। पानी की व्यवस्था के साथ आवश्यक सिविल कार्य भी पूरे किए गए हैं। कूनो में शिकार का घनत्व चीतों के लिए पर्याप्त है। भारत में वर्तमान में कुल चीतों की संख्या 52 है। 49 कूनो नेशनल पार्क में, 3 गांधी सागर अभयारण्य में हैं। इन 52 चीतो में से 32 चीते भारत में जन्मे है।
भारत में चीतो की वर्तमान स्थिति
कूनो वन मंडल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भारत में चीतो की कुल संख्या 52 है, जिसमें से 49 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा 03 चीते गांधीसागर अभ्यारण में है। इन 52 स्वस्थ चीतो में से 32 चीते भारत में जन्मे है।
17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाये गये 08 चीतो में से 03 जीवित है, इनके भारत में जन्मे 22 संतानो के साथ नामीबिया मूल के जीवित चीते एवं उनकी संतानो की कुल संख्या 25 है। 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से लाये गये 12 चीतो में से 08 जीवित है, इनमें भारत में जन्मे 10 शावको के साथ दक्षिण अफ्रीकी मूल के जीवित चीतो एवं उनकी संतानो की कुल संख्या 18 है। इनमें से 15 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा 03 चीते गांधीसागर राष्ट्रीय अभ्यारण में है। 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से 09 चीते भारत लाये गये, कूनों में मौजूद कुल 49 चीतो में से 17 चीते जिनमें 10 नर एवं 07 मादा खुले वन क्षेत्र में है, जबकि 32 चीते 05 नर, 08 मादा तथा एक वर्ष से कम आयु के 19 शावक सॉफ्ट रिलीज बाडो में है।
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