डिजिटल दौर में परंपरा की अलख: 85 साल की इंदिरा अम्मा 'आशान कलारी' पद्धति से बच्चों को सिखा रही हैं पढ़ना-लिखना
केरल आज के इस डिजिटल दौर में जहां बच्चे स्क्रीन पर सीखने के आदी हो चुके हैं, वहीं केरल की 85 वर्षीय इंदिरा अम्मा एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। वह बच्चों को 'आशान कलारी' जैसे पुराने और पारंपरिक तरीकों से पढ़ना-लिखना सिखा रही हैं।
क्या है 'आशान कलारी' परंपरा?
केरल में कभी गांव-गांव में 'आशान कलारी' हुआ करती थी, जो कि एक पुरानी पारंपरिक पाठशाला थी। इन पाठशालाओं में बच्चे पढ़ना, लिखना और हिसाब-किताब सीखते थे, और वहां गुरु को 'आशान' कहा जाता था। यह शिक्षण पद्धति सदियों पुरानी गुरुकुल परंपरा से निकली हुई मानी जाती है। इंदिरा अम्मा आज इसी प्राचीन और समृद्ध सीख की रोशनी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं।
पिछले 10 वर्षों से लगातार जारी है सफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदिरा अम्मा पिछले 10 सालों से स्कूल आकर बच्चों को मलयालम, हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय सिखा रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर, जहां लोग आमतौर पर आराम की तलाश करते हैं, अम्मा हर रोज बच्चों के बीच पहुंच जाती हैं। उनके मन में न कोई जल्दबाजी होती है और न ही थकान की कोई शिकायत, उनके पास केवल बच्चों को सिखाने की अटूट लगन होती है।
अपनी जड़ों से जुड़ रहे हैं बच्चे
अम्मा का यह पारंपरिक शिक्षण तरीका बच्चों को किताबी दुनिया के साथ-साथ उनकी अपनी परंपरा, संस्कृति, भाषा और अपनी मिट्टी की खुशबू से भी जोड़ रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, और इंदिरा अम्मा इसकी सबसे सुंदर मिसाल बन चुकी हैं।
Hardoi, Hardoi | Oct 23, 2026