बाह्रमणटोली मे दो दिवसीय काली पूजा महोत्सव 8 नवंबर से
8 नवंबर को महाकाली प्रतिष्ठा एवं निशा पूजन,9 को कन्यापूजन, अन्नकूट,महाआरती और विसर्जन शोभा यात्रा
काली पूजा मे महाकाली के दस स्वरूप के होंगे दर्शन
बंगाल के ढाक कलाकारों द्वारा धनुची नृत्य और महाआरती होगी विशेष आकर्षण का केन्द्र
समाज मे विशेष योगदान देने वालें उत्तर बिहार के दस महिलाओ को किया जायेगा सम्मानित
मुजफ्फरपुर। बाह्रणटोली स्थित डाॅ चंदन उपाध्याय के आवासीय कार्यालय पर काली पूजा को लेकर तैयारी बैठक एवं प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। पूजन आयोजक सह पूजन आचार्य डाॅ चंदन उपाध्याय ने बताया कि 2001 से बाह्रणटोली स्थित संगत स्कूल के प्रांगण मे बाबा फतेहचंद की जीवित समाधी स्थल चिता भूमी पर पूजा होती आ रही है। इस वर्ष काली पूजा 8 नवंबर रविवार को रात्री 11:30 बजे से महाकाली प्रतिष्ठा एवं निशा पूजा प्रारंभ हो जायेगी,9 नवंबर सोमवार को सुबह 8 बजे हल्दी पूजन,देवी सहस्त्राचन,9:30 बजे कन्यापूजन एवं 11 बजे महाप्रसाद वितरण का आयोजन होगा। वहीं संध्या मे विसर्जन शोभा यात्रा निकाली जायेगी।
डाॅ चंदन ने बताया कि इस वर्ष दिपावली पर अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट योग बन रहा है जिसमे पहला बुध आदित्य राज योग जो तुला राशी में बुद्धी और व्यापार के कारक ग्रह बुध और मान-सम्मान, प्रतिष्ठा एवं आत्मा के कारक ग्रह सुर्य के संयुक्त युक्ति से बुधा आदित्य राज योग बन रहा है,वही दुसरा देव गुरू बृहस्पति 31 अक्टूबर को सुर्य के सिंह राशी मे प्रवेश कर रहे है जहां केतु पहले से विराजमान है ,सिंह राशी के गुरू और केतु के एक साथ होने धर्म ध्वज बन रहा है जो आध्यात्म, तंत्र साधन और मंत्र सिद्धी के लिए श्रेष्ठ है इसमे काली की पूजा जो अतिफलदायी है।
पूजन समिति के मीडिया प्रबंधक प्रभात मालाकार ने बताया कि इस वर्ष पूजा पंडाल मे महाकाली के दस स्वरूप महाकाली,दक्षिण काली,श्मशान काली,भद्र काली,गुह्य काली,चामुंडा काली,सिद्ध काली,रक्त काली,कालिका और तारा काली विद्यमान होंगे।महोत्सव मे दुसरे दिन संध्या मे बनारस के गंगा आरती के तर्ज पर काली महाआरती, दोपहर बंगाल के ढाक कलाकार के द्वारा धनुची नृत्य विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा।साथ ही उत्तर बिहार के 10 महिला जो शिक्षा,चिकित्सा,सुरक्षा,आध्यात्म और जिनका सार्वजनिक जीवन मे समाज के लिए विशेष योगदान है उन्हे समिति के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।श्री मालाकार ने बताया कि काली पूजा महोत्सव में उत्तर बिहार के कई मंदिर और मठ के पुजारी,सांसद,मंत्री एवं विधायकगण,शिक्षाविद, साहित्यकार और गणमान्य शामिल होंगे।
पूजन आचार्य के तौर पर लालबहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली से वेद और व्याकरण के आचार्य पंडित लड्डू झा और भरत झा शामिल होंगे।