11 सितंबर मारपीट प्रकरण पर फिर गरमाया मामला!! मदन लाल प्रकरण में कुंदन राका बिष्ट के पक्ष में एसपी से मिले बेला के ग्रामीण, निष्पक्ष जांच की मांग!!
रुद्रप्रयाग शहर के अंग्रेजी शराब ठेके के समीप 11 सितंबर को हुई मारपीट की घटना को लेकर मामला एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। घटना में घायल मदन लाल की पुत्री निशा की तहरीर पर पुलिस द्वारा तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने के बाद अब दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को बेला क्षेत्र के ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग निहारिका तोमर से मिला और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग की।
ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मामले की विवेचना सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्ष तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध केवल दबाव, प्रदर्शन अथवा राजनीतिक हस्तक्षेप के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन किसी निर्दोष व्यक्ति को किसी भी कीमत पर फंसाया या प्रताड़ित न किया जाए।
बताया गया कि 11 सितंबर की देर शाम करीब चार बजे मारपीट की घटना सामने आई थी। मारपीट के दौरान 42 वर्षीय मदनलाल की गर्दन पर धारदार हथियार से वार किए जाने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए श्रीकोट बेस अस्पताल रेफर किया गया।
घटना के बाद मदन लाल की पुत्री निशा ने कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान तत्काल गिरफ्तारी योग्य तथ्य सामने नहीं आने पर तीनों को छोड़ दिया गया।
इसके बाद सोमवार को अमसारी वार्ड की एक महिला कुछ अन्य लोगों के साथ कोतवाली पहुंची और हिरासत में लिए गए तीन लोगों में शामिल बेला निवासी कुंदन सिंह बिष्ट उर्फ राका के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेजने की मांग की।
इसके बाद मंगलवार को बेला के ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर कुंदन सिंह बिष्ट उर्फ राका के पक्ष में अपना पक्ष रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि दूसरे पक्ष की ओर से पुलिस पर दबाव बनाकर राका को मामले में बेवजह फंसाने और जेल भिजवाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, यह दूसरे पक्ष का आरोप है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने कहा कि रुद्रप्रयाग शांतिप्रिय जिला है। किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या राजनीतिक दबाव के कारण क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाने की मांग की।
फिलहाल, 11 सितंबर की घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में घटना की वास्तविक वजह, मारपीट में शामिल लोगों की भूमिका और आरोपों की सत्यता पुलिस की जांच एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। मामले में पुलिस की निष्पक्ष जांच पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।
इस दौरान जिला पंचायत सदस्य गंभीर बिष्ट, सभासद विनीता देवी, नामित सभासद राहुल मेवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोषी देवी, सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रमोहन नेगी समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।