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पहाड़ी केदार live

@pahadikedarlive
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दुल्हन बनी शर्मिला, लेकिन ससुराल तक नहीं पहुंची सड़क! ढाई घंटे पैदल चलकर तय किया विवाह का सफर,,
जौनसार-बावर में सड़क के अभाव ने उजागर की विकास की हकीकत, नवविवाहिता ने सीएम धामी से लगाई उदावा गांव तक मोटर मार्ग बनाने की गुहार,,

चकराता। एक ओर शादी की खुशियां, दूसरी ओर दुर्गम पहाड़ी रास्ता और करीब ढाई घंटे का पैदल सफर। आधुनिक दौर में भी सड़क सुविधा से वंचित चकराता तहसील के उदावा गांव की यह तस्वीर पहाड़ में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत बयां करती है। बुल्हाड़ गांव से विवाह कर उदावा पहुंची नवविवाहिता शर्मिला को अपने ससुराल तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल रास्ता तय करना पड़ा। सड़क के अभाव में दुल्हन के साथ आए परिजनों और ग्रामीणों को भी पैदल सफर करना पड़ा। अब शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग निर्माण कराने की मांग उठाई है।

शादी की खुशियों के बीच सड़क की कसक
बुल्हाड़ गांव निवासी शर्मिला का विवाह मंगलवार को उदावा गांव निवासी अनिल के साथ संपन्न हुआ। विवाह की रस्में पूरी होने के बाद जब शर्मिला की विदाई हुई, तो ससुराल तक पहुंचने का रास्ता किसी आसान सफर से कम नहीं था। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण नवविवाहिता को करीब ढाई घंटे पैदल चलना पड़ा। उसके साथ आए ग्रामीणों को भी इसी कठिन रास्ते से गुजरना पड़ा।

यह महज एक दुल्हन के पैदल ससुराल पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि उन दुश्वारियों की तस्वीर है, जिनसे सड़क संपर्क से वंचित पहाड़ी गांवों के लोग रोजाना जूझते हैं। शादी जैसे खुशी के मौके पर भी बुनियादी सुविधा की कमी ने ग्रामीणों की परेशानी उजागर कर दी।

सदियों पुरानी परंपरा, लेकिन आज भी विकास की राह पैदल,,

जौनसार-बावर अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है। यहां की पारंपरिक विवाह पद्धतियों में जोजोड़ा भी शामिल है, जिसमें दुल्हन अपने मायके से ससुराल जाती है। क्षेत्र की यह परंपरा सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है, लेकिन उदावा गांव का मामला एक अलग सवाल खड़ा करता है—जब सड़क ही नहीं, तो ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी कितनी कठिन होगी?
आज जब गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की बात होती है, तब उदावा गांव तक पहुंचने के लिए ढाई घंटे पैदल चलने की मजबूरी विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को रेखांकित करती है।

बीमारी हो या शादी, हर जरूरत पर पैदल रास्ते की मजबूरी

सड़क का अभाव केवल विवाह समारोहों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, आवागमन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी कठिन रास्तों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा होती है, जब किसी बीमार व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाना हो या आपातकालीन सहायता की जरूरत पड़े। ऐसे में मोटर मार्ग की अनुपलब्धता ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

सीएम धामी से शर्मिला की गुहार—उदावा तक पहुंचे सड़क
अपने विवाह के दौरान सड़क के अभाव की परेशानी झेलने वाली शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क बनने से गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी और शादी-विवाह सहित जरूरी कार्यों के लिए होने वाली परेशानियां कम होंगी।

सवाल बरकरार, कब बदलेगी उदावा की तस्वीर?
सड़क संपर्क किसी भी गांव के विकास की बुनियादी जरूरत है। इससे न केवल आवागमन सुगम होता है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास के अवसर भी बेहतर होते हैं। ऐसे में उदावा गांव तक मोटर मार्ग निर्माण की मांग को केवल एक परिवार की परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं कि
नवविवाहिता शर्मिला की गुहार पर कब कार्रवाई होती है और उदावा गांव के लोगों को सड़क सुविधा के लिए कब तक इंतजार करना पड़ता है। सवाल सीधा है—क्या उदावा के ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा के लिए यूं ही पैदल रास्ते नापने पड़ेंगे, या उनकी राह तक भी विकास की सड़क पहुंचेगी?
श्री केदारनाथ धाम से आज वृहस्पतिवार के दिव्य मंगलमय दर्शन कीजिए हर हर महादेव जय श्री केदार 🌹👏🌹
₹35 लाख का शो, लड़खड़ाती आवाज और मंच पर मंत्री का गुस्सा! दिलेर मेहंदी विवाद पर सुबोध उनियाल की सफाई—‘तबीयत खराब थी तो पहले बताना चाहिए था!!

कुंजापुरी मेले में पंजाबी गायक को मंत्री की फटकार का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस!!

मां कुंजापुरी मेले में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम अब पंजाबी गायक दिलेर मेहंदी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद को लेकर सुर्खियों में है। करीब 35 लाख रुपये खर्च कर आयोजित कार्यक्रम में दिलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान उनकी आवाज लड़खड़ाने पर मंत्री सुबोध उनियाल नाराज हो गए। वह सीधे मंच पर पहुंचे और गायक को फटकार लगाई। इस दौरान उन्होंने दिलेर मेहंदी पर नशे में होने का आरोप भी लगाया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों और गायक के समर्थकों ने मंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह मामला सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति से आगे बढ़कर सार्वजनिक मंच पर कलाकार के साथ व्यवहार और आयोजन की जिम्मेदारी को लेकर बहस का विषय बन गया।

वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यदि दिलेर मेहंदी की तबीयत खराब थी, तो उन्हें इसकी जानकारी पहले ही देनी चाहिए थी। मंत्री की इस सफाई के बाद विवाद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

अब सवाल कार्यक्रम की गुणवत्ता और मंच पर हुए व्यवहार को लेकर है। लाखों रुपये खर्च कर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दर्शकों की अपेक्षाएं पूरी न होने पर आयोजकों की नाराजगी स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर कलाकार को फटकारने और नशे का आरोप लगाने के तरीके को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल, कुंजापुरी मेले का यह कार्यक्रम अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से ज्यादा मंत्री और प्रसिद्ध गायक के बीच हुए विवाद के कारण चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस मामले को और तूल दे दिया है।

आपकी राय क्या है? अगर किसी कलाकार की प्रस्तुति उम्मीद के मुताबिक न हो, तो क्या सार्वजनिक मंच पर उसे फटकारना उचित है या आयोजकों को स्थिति को दूसरे तरीके से संभालना चाहिए?

<nis:link nis:type=tag nis:id=कुंजापुरीमेला nis:value=कुंजापुरीमेला nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=दिलेरमेहंदी nis:value=दिलेरमेहंदी nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=सुबोधउनियाल nis:value=सुबोधउनियाल nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=नरेंद्रनगर nis:value=नरेंद्रनगर nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=उत्तराखंडन्यूज nis:value=उत्तराखंडन्यूज nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=वायरलवीडियो nis:value=वायरलवीडियो nis:enabled=true nis:link/>
उक्रांद युवा के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने कार्यकर्ताओं के साथ किया श्रमदान,,

सड़क के लिए छठवें दिन भी ग्रामीणों का श्रमदान, 1.75 किमी रास्ते के लिए खुद उठा रहे फावड़ा,,

चौंडा सिरांई में ग्रामीणों की मेहनत जारी, शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, 

रुद्रप्रयाग। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की आस में चौंडा सिरांई के ग्रामीणों का संघर्ष लगातार जारी है। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीण छठवें दिन भी कुदाल और फावड़ा लेकर श्रमदान में जुटे रहे। समाजसेवी जसोधर सेमवाल के नेतृत्व में ग्रामीण करीब 1.75 किलोमीटर सड़क तैयार करने के लिए अपने पसीने से रास्ता बना रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों के लगातार श्रमदान के बावजूद अब तक शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा है।

ग्रामीणों ने खुद संभाली सड़क निर्माण की जिम्मेदारी,
चौंडा सिरांई के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क गांव की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है। आवागमन की सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लंबे समय से सड़क की उम्मीद लगाए ग्रामीणों ने आखिरकार स्वयं ही रास्ता तैयार करने का संकल्प लिया। जसोधर सेमवाल के नेतृत्व में ग्रामीण लगातार श्रमदान कर रहे हैं। गांव के लोगों की इस पहल ने बुनियादी सुविधाओं के लिए पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के संघर्ष को एक बार फिर सामने ला दिया है।

उक्रांद ने ग्रामीणों के साथ चलाया फावड़ा
ग्रामीणों के संघर्ष को समर्थन देने के लिए उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) युवा के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ श्रमदान कर सड़क निर्माण में सहयोग दिया। इस दौरान केंद्रीय महामंत्री अर्जुन कण्डारी, युवा उक्रांद के जिलाध्यक्ष रवि राणा, जिला संरक्षक सूरत सिंह झिंकवान, जिला महामंत्री एवं प्रवक्ता अजीत भंडारी, जखोली ब्लॉक अध्यक्ष राय सिंह पंवार, युवा उक्रांद रुद्रप्रयाग के कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र नेगी तथा जखोली ब्लॉक महामंत्री मानवेंद्र सिंह रावत और संजय पंवार भी मौजूद रहे।

दूरस्थ गांवों की समस्याओं पर सरकार गंभीर नहीं : आशीष नेगी,
श्रमदान के बाद आशीष नेगी ने सरकार पर दूरस्थ पर्वतीय गांवों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहाड़ के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ग्रामीणों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए स्वयं कुदाल और फावड़ा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उक्रांद जनहित से जुड़े मुद्दों पर जनता के साथ खड़ा रहेगा और पहाड़ के लोगों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।

छठवें दिन भी नहीं पहुंचा प्रशासन, ग्रामीणों को अब मदद का इंतजार,
चौंडा सिरांई में ग्रामीणों का श्रमदान लगातार छठवें दिन जारी रहना व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े करता है। सड़क निर्माण के लिए ग्रामीण स्वयं जुटे हैं, लेकिन मौके पर शासन-प्रशासन की ओर से किसी प्रतिनिधि के नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मेहनत और लगातार जारी संघर्ष के बाद जिम्मेदार विभाग उनकी सुध लेंगे और सड़क निर्माण के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाएंगे।
श्री केदारनाथ धाम से आज बुधवार के संध्याकालीन आरती दर्शन कीजिए हर हर महादेव जय श्री केदार 🌹👏🌹
केदारनाथ धाम में बर्फबारी से बढ़ी ठिठुरन, 17.84 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा के दर्शन,,

11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे कपाट, प्रशासन ने श्रद्धालुओं से गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां साथ रखने की अपील की,,

विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम में बुधवार दोपहर बाद हुई बर्फबारी से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। बर्फबारी के बीच धाम पहुंचे देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने जहां बर्फ की सफेद चादर से ढकी वादियों का आनंद लिया, वहीं शाम होते-होते तापमान में गिरावट के कारण ठिठुरन भी बढ़ गई। मौसम में आए बदलाव को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से एहतियात बरतने और पूरी तैयारी के साथ यात्रा करने की अपील की है।

बर्फबारी और गिरते तापमान के बावजूद श्री केदारनाथ धाम की यात्रा सुचारू रूप से संचालित हो रही है। इस वर्ष अब तक 17,84,660 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। धाम के कपाट आगामी 11 नवंबर 2026 को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आने के साथ ही यात्रा अंतिम चरण में पहुंच गई है, लेकिन श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी है।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि बीते एक सप्ताह से मौसम अनुकूल रहने के कारण यात्रा व्यवस्थाएं सामान्य बनी हुई हैं। हेली सेवाओं का संचालन भी सुचारू रूप से किया जा रहा है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि यात्रा के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे सुरक्षित और सुगम तरीके से बाबा के दर्शन कर सकें।
नवंबर के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित राष्ट्रपति का केदारनाथ धाम दौरा, प्रशासन ने तेज की तैयारियां!!

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने धाम पहुंचकर व्यवस्थाओं का लिया जायजा, अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा, सुगमता और व्यवस्थाओं को लेकर की चर्चा!!

राष्ट्रपति के भ्रमण के साथ श्रद्धालुओं की सुगम एवं सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने पर भी रहेगा विशेष जोर!!

रुद्रप्रयाग। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का केदारनाथ धाम भ्रमण नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित है। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। भ्रमण कार्यक्रम को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

इसी क्रम में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने केदारनाथ धाम पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण के दृष्टिगत आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही धाम में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यात्रा को सुगम बनाए रखने से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया।

इस संबंध में बुधवार को जिला कार्यालय में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाए रखने तथा भ्रमण को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए आवश्यक बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन और यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अनावश्यक असुविधा न हो। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए सुगम, सुरक्षित और बेहतर यात्रा व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रपति का भ्रमण कार्यक्रम सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो और बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा भी सुचारू बनी रहे।
केदारनाथ धाम में बुधवार 21 अक्टूबर को हुई  बर्फबारी!!

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केदारनाथ धाम पहुंची प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की टीम,, पूर्व जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग एवं वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे मंगेश घिल्डियाल के साथ जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने किया पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण!!
केदारनाथ धाम में हो रही बर्फबारी, देश विदेश के भक्त ले रहे आनंद!!
बाबा केदारनाथ धाम में धरने पर बैठे बीकेटीसी कर्मचारी!!
केदारनाथ धाम में मंदिर के आगे नृत्य करने का वीडियो वायरल!!
श्री केदारनाथ धाम से आज बुधवार के दिव्य मंगलमय दर्शन कीजिए हर हर महादेव जय श्री केदार 🌹👏🌹
त्रियुगीनारायण जिला पंचायत क्षेत्र के रामपुर गाँव की बेटी एवं बहन रितिका का उत्तराखंड सीनियर महिला टी-20 क्रिकेट टीम में चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ। 💐🏏

यह गौरवपूर्ण उपलब्धि न केवल रितिका के परिवार, बल्कि पूरे त्रियुगीनारायण जिला पंचायत क्षेत्र और जनपद रुद्रप्रयाग के लिए गर्व का विषय है। रितिका ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर यह मुकाम हासिल कर क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनने का कार्य किया है 💐🏏
चारधाम महा पंचायत उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी का बड़ा बयान: बद्री केदार मंदिर समिति के कर्मचारियों की मांगों को लेकर जब विपक्ष ने दिया था धरना,, बीकेटीसी कर्मचारी छुपे रहे कार्यालय के अंदर,, 

दुल्हन की तरह, घर के भीतर से देखा था सरकार के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल कार्यक्रम,, 

अब धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए हैं बीकेटीसी कर्मचारी, 

वन टाइम सेटलमेंट की मांग पर नहीं हो रहा अमल!!
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि घोषित हो गई है। भगवान बद्री विशाल के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।
181 फीट ऊंचे रावण ने दी तकनीक को मात, ऐन मौके पर फेल हुए सेंसर, मशाल से करना पड़ा दहन,
देहरादून के परेड ग्राउंड में रिमोट और सेंसर से रावण दहन की थी तैयारी, तकनीकी खराबी के चलते आयोजकों को अपनाना पड़ा मैन्युअल तरीका,,

देहरादून। राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में दशहरा पर्व पर 181 फीट ऊंचे रावण के पुतले ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। भव्य रावण दहन को लेकर आयोजकों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया था। रिमोट और सेंसर के जरिए पुतले का दहन करने की तैयारी की गई थी, लेकिन ऐन मौके पर सेंसर ने काम करना बंद कर दिया। इससे तकनीक के जरिए दहन कराने की योजना धरी रह गई।
सेंसर में आई तकनीकी खराबी के बाद आयोजकों को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ी। आखिरकार मशाल की मदद से मैन्युअल तरीके से रावण के पुतले का दहन किया गया।
181 फीट ऊंचे रावण के पुतले को देखने के लिए परेड ग्राउंड में लोगों की उत्सुकता बनी रही। आधुनिक तकनीक से रावण दहन कराने की तैयारी इस आयोजन का खास आकर्षण थी, लेकिन अंतिम समय में तकनीकी गड़बड़ी के कारण आयोजकों को पारंपरिक तरीके का सहारा लेना पड़ा।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि बड़े आयोजनों में आधुनिक तकनीक के साथ वैकल्पिक व्यवस्था रखना भी जरूरी है, ताकि ऐन मौके पर किसी तकनीकी खराबी के कारण कार्यक्रम प्रभावित न हो।
श्री केदारनाथ धाम से आज मंगलवार के संध्याकालीन आरती दर्शन कीजिए हर हर महादेव जय श्री केदार 🌹👏🌹👏
ग्रामीणों ने श्रमदान से काटी सड़क!! दौड़ने लगे दुपहिया वाहन!! 

रूद्रप्रयाग जनपद के भरदार पट्टी क्षेत्र में ग्रामीणों में आक्रोश,, श्रमदान से पालीगाड़ मुरचोंडा सड़क कटिंग का कार्य जारी,, अब तक काटी 200 मीटर सड़क!!
जय बाबा केदारनाथ 🌹👏🌹
गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर मंगलवार को अन्नकूट, गोवर्धन पूजा के शुभअवसर पर अभिजीत मुहूर्त में ठीक दिन 12:05 बजे शीतकाल के लिए किए जाएंगे बंद!!

विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि और मुहूर्त पर गंगोत्री मंदिर समिति ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद तय किया। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर, मंगलवार को अन्नकूट, गोवर्धन पूजा के शुभअवसर पर अभिजीत मुहूर्त में ठीक दिन 12:05 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के साथ ही मां गंगा की उत्सव डोली 10 नवंबर को हजारों श्रद्धालुओं, सेना के बैंड और जयकारों के साथ अपने शीतकालीन प्रवास मुखवा के लिए रवाना होगी और 11 नवंबर को भैया दूज के पावन पर्व पर मां गंगा की उत्सव डोली अपने मायके शीतकालीन प्रवास मुखबा पहुंचेगी, जहां अगले 6 माह तक श्रद्धालु मां गंगा के शीतकालीन दर्शन कर सकेंगे
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11 नवंबर को भैया दूज पर बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, मंदिर समिति ने की घोषणा।

विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट आगामी 11 नवंबर को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।विजयदशमी के अवसर पर यमुनोत्री धाम में मंदिर समिति और पुरोहित समाज की मौजूदगी में आयोजित बैठक में कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निकाला गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, बुधवार को सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर अनुराधा नक्षत्र और सौम्य धनु लग्न में विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री धाम में होने वाली नियमित पूजा-अर्चना का समापन हो जाएगा।

यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने बताया कि, विजयदशमी के पर्व पर परंपरानुसार मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में कपाट बंद करने की तिथि और शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया। भैया दूज के दिन निर्धारित मुहूर्त में मां यमुना के मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद शीतकाल में मां यमुना की पूजा-अर्चना परंपरानुसार उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में होगी। इससे श्रद्धालु शीतकाल के दौरान भी मां यमुना के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
बड़ी खबर : विजयदशमी पर घोषित हुई बाबा केदारनाथ धाम कपाट बंद होने की तिथि!!

11 नवंबर को होंगे बाबा केदार के कपाट बंद,
विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। इसकी जानकारी डोली प्रभारी डीएस भुजवाण ने दी।
सिरोबगड़ में जाम का ‘महाजाम’! बदरीनाथ हाईवे पर 5 किलोमीटर तक वाहनों की कतार, घंटों हलकान रहे लोग!!
आम जनता से लेकर चारधाम यात्रियों तक की मुश्किलें बढ़ीं, शादी-विवाह में जाने वाले लोग भी जाम में फंसे, आखिर कब मिलेगी सिरोबगड़ की जाम से मुक्ति?

रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोबगड़ एक बार फिर जाम की गंभीर समस्या को लेकर सुर्खियों में है। यहां करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लगने से आम जनता, चारधाम यात्रियों और शादी-विवाह में शामिल होने जा रहे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घंटों से सड़क पर फंसे लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं।

सिरोबगड़ में जाम की समस्या अब केवल यातायात बाधित होने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह पहाड़ की सड़क व्यवस्था और यात्रियों की परेशानी का बड़ा सवाल बनती जा रही है। बदरीनाथ धाम सहित विभिन्न क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों को इस मार्ग से गुजरना पड़ता है। ऐसे में जाम लगने से लोगों की यात्रा प्रभावित होती है और जरूरी कामों के लिए निकले लोगों को भी समय पर मंजिल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

<nis:link nis:type=tag nis:id=# nis:value=# nis:enabled=true nis:link/> आखिर कब तक जाम में कैद रहेगी जनता?
सिरोबगड़ में बार-बार पैदा होने वाली जाम की स्थिति ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगना इस बात का संकेत है कि यातायात प्रबंधन की चुनौती कितनी गंभीर हो सकती है। सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को होती है, जिन्हें शादी-विवाह, जरूरी कार्यों या अन्य कार्यक्रमों में समय पर पहुंचना होता है। वहीं, चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को भी अनावश्यक इंतजार झेलना पड़ता है।

स्थानीय जनता और यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सिरोबगड़ की इस समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा? हर बार जाम लगने के बाद लोगों को परेशानी उठानी पड़े और फिर हालात सामान्य होने का इंतजार करना पड़े, तो यह स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय है।

<nis:link nis:type=tag nis:id=# nis:value=# nis:enabled=true nis:link/> अस्थायी राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए,,
सिरोबगड़ में जाम से राहत दिलाने के लिए प्रभावी यातायात प्रबंधन, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और जरूरत के अनुसार ठोस तकनीकी एवं सड़क सुधार के उपायों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। संबंधित विभागों और प्रशासन को समस्या की प्रकृति का आकलन कर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे आम लोगों और चारधाम यात्रियों को बार-बार इस परेशानी से न जूझना पड़े।

पांच किलोमीटर लंबा जाम केवल वाहनों की कतार नहीं, बल्कि पहाड़ की यातायात व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है। अब जरूरत आश्वासनों की नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी समाधान की है, जो सिरोबगड़ से गुजरने वाले हर नागरिक और यात्री को राहत दे सके।

बड़ा सवाल: आखिर कब खत्म होगा सिरोबगड़ का जाम, और कब मिलेगी पहाड़ की जनता को इस रोजमर्रा की परेशानी से स्थायी मुक्ति?