तुम बादशाहे हुस्न हो
हुस्ने जहान हो
जाने वफ़ा हो
महोब्बत की शान हो
काश ऐसा कोई मंजर होता
मेरे कांधे पे तेरा सर होता
दिल्ली से पधारे हिमाद्री और सिमरन कौर ने जब अपनी गजलों में आलाप और मुरकियां लेते हुए और सुप्रसिद्ध तबलावादक प्रेम के तबले की थाप पर तान छेड़ी तो सारा सांस्कृतिक सदन तालियों की गड़गड़ाहटों से गूंज उठा. उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और सांस्कृतिक मंच द्वारा त्रिदिवसीय लोकस्वर कार्यक्रम के पहले दिन सुगम संगीत के कार्यक्रम में सुर और ताल का अद्भुत संगम देखने को मिला. कुरुक्षेत्र से पधारे युवा गायक विपुल कुमार ने शिव कैलाश के वासी, और मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार देइ. भजनों को गाकर खूब वाहवाही लूटी. कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर वन्दना वत्स व बलदेव शर्मा ने बताया कि देर रात तक चले आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ विशिष्ट अतिथि डॉक्टर कुलदीप सूद,श्रीमती अनुपमा धमीजा डॉक्टर रीना तनेजा ने सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया. मुख्य अतिथि वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवरतन गुप्ता ने अपने सम्बोधन में सांस्कृतिक मंच के साथ अपने जुडावों की चर्चा करते हुए भूरि भूरि प्रशंसा की.
आज की महफ़िल के सरताज हिमाद्री ने गीत और ग़ज़ल गाकर कमाल कर दिया. उनके गीत के बोलों की फड़क देखिए जबसे गए हैं आप किसी अजनबी के साथ,सौ दर्द लग गए मेरी जिन्दगी के साथ.
कोकिल कंठी सिमरन कौर ने रागों के गीतों की एक श्रृंखला सुनाकर सभागार गुंजा दिया. उन्होंने छाप तिलक सब छिनी रे मों से नैना मिलाई के और दमादम मस्त कलंदर आदि अनेक गीत सुनाए. मंच संचालिका अनीतानाथ ने अपने चिर परिचित अंदाज में शेरों शायरी सुनाकर शमा बांध दिया. हिमाद्री के साथ हारमोनियम पर सहयोग उनकी माता व संगीतज्ञ श्रीमती नीलम ने किया.
आज के कार्यक्रम में पूर्व नगर पार्षद मुकेश रहेजा, सज्जन अग्रवाल,डॉक्टर सुशील धमीजा,पूर्व डी एस ओ दर्शन मिढ़ा, डॉक्टर वी बी दीक्षित, डॉक्टर इंदु शर्मा,डॉक्टर वन्दना वत्स, डॉक्टर हरिओम कौशिक,श्रीमती शशि परमार रविन्द्र वैद्य, विजय सोलंकी, डॉक्टर संजय अत्रि, विनोद धारेडू श्रीमती ऋतु भारद्वाज, सरला वर्मा, अनीता अत्रि, जींद से श्रीमती मीना शर्मा, व नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे