*संतों की संगति व भक्ति से होती आत्मानंद व परमसुख की प्राप्ति -आचार्य रामदयालजी महाराज*
*मां संसार में बच्चें की प्रथम गुरू, उससे मिले संस्कार करते जीवन का निर्माण- संत मनोरथराम*
*रामद्वारा में श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का भव्य आयोजन जारी, ऋषि पंचमी पर गुरू गुणगान*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ), 15 सितम्बर। ऋषि पंचमी का यही संदेश है कि संतों की संगति से विषमता से मुक्ति ओर समता के अमृत से आत्मानंद की प्राप्ति होती है। इस कलिकाल में भी संत ही है जो धर्म से जोड़ सकते है। संतो के चलने से ज्ञान,भक्ति, वैराग्य, धर्म व आत्मीयता की हवा चलती है तो अज्ञानता की प्रचण्ड गर्मी से झुलसने वाला व्यक्ति राहत पाकर आत्मीय सुख की अनुभूति करता है। संत से मिलने से बड़ा सुख इस संसार में कोई नहीं हो सकता। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को वाणीजी प्रवचन में व्यक्त किए। भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत दूसरे दिन व्यास पीठ से संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने विभिन्न प्रसंगों का वाचन किया।
आचार्य रामदयाल महाराज ने सभी को ऋषि पंचमी पर्व की बधाई देते हुए कहा कि ये ऋषि पूजन दिवस है। हमारे ब्रहमऋषि, देवऋषि सब ऋषि महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज ऐसे ऋषि है जिन्होंने नाम के अर्थ को अपनी साधना से भागीरथ बन ऐसा भागीरथी प्रवाहित की कि जिसने भी उसमें डूबकी लगाई आत्मशक्ति जागृत हुई, आत्मानंद की प्राप्ति एवं कल्पनातीत परम सुख की प्राप्ति करता है। सनातन धर्म के कुछ समाजों में इस अवसर पर रक्षासूत्र बांध इसे रक्षाबंधन का सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि संत जहां प्रकट होते है वहां तीर्थधाम बन जाता है। स्वामी रामचरण महाराज के पावन चरण जिस धरा पर पड़े वह भीलवाड़ा धाम एवं शाहपुरा धाम तीर्थो के तीर्थ बन गए है यहां सारे तीर्थ समाहित है। सारे धामों के मध्य ये दोनों धाम है। आपके मन में गुरू के प्रति श्रद्धा व निष्ठा अडिग होगी तो उसकी कृपा प्राप्त होगी। स्वामी रामचरण महाराज ने प्रेरणा देकर कई संत व ब्रह्म ऋषि तैयार किए।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राष्ट्र ऋषि बताते हुए कहा कि वह देश के सर्वोच्च सिंहासन पर होकर भी एक अद्भुत ऋषि की तरह हिमालय की तलहटी व केदारनाथ में साधना व तपस्या करते है ओर अपने लिए कुछ नहीं मांगते यहीं कामना करते है कि हमारा भारत विश्व में शांति का साम्राज्य स्थापित करे। इसी भावना से पूरे विश्व के प्रिय है। वह तपस्वी व साधक की तरह जीवन बीता राष्ट्र सेवा में लगे है। उन्होंने सनातन धर्म को आत्मसात किया एवं नाम साधना में अग्रणी रहे। हम भारत राष्ट्र कें र्स्वांगीण विकास की कामना करते है।
इससे पूर्व व्यास पीठ से श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने धु्रव चरित्र आदि प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि मां की महिमा अपरम्पार होती है। मां से मिले संस्कार ही बच्चें में गुणों को संवारते है ओर व्यक्तिव निर्माण करते है। मां बच्चें की प्रथम गुरू होती है उससे संस्कार पाकर ही राष्ट्र को महाराणा प्रताप व वीर शिवाजी जैसे महान विभूतियां प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि मां बच्चों को नेकदिल संस्कारी इंसान बना सकती है ओर मन में बलिदान व सेवा के भाव जागृत कर सकती है। बच्चों को धर्म से जोड़ने वाली भी मां होती है।
संत मनरथराम ने कहा कि जीवन में सुख शांति के लिए समन्वयवादी सोच बहुत जरूरी है। एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करे ओर ये नहीं माने कि मात्र मैं ही सही हूं। हमारी पांच अंगुलियां एक समान नहीं हो सकती तो परिवार के सदस्यों की सोच भी एक जैसी नहीं हो सकती। समन्वयवादी सोच से ही परिवार, समाज व राष्ट्र प्रगति करता है। उन्होंने कहा कि शरीर काम करना बंद कर देता लेकिन मन संसार के सुखों से नहीं भरता। आत्मा का कल्याण चाहते है तो हर पल परमात्मा का स्मरण करते रहे। उन्होंने माता-पिता की सेवा की प्रेरणा देते हुए कहा कि आज अंग्रेजी शिक्षा का बढ़ता चलन बच्चों को संस्कारों से दूर कर रहा है। संस्कार तो परिवार व गुरू से ही मिलते है। हमारे मन में आदरभाव, आत्मीयता व संवेदना नहीं है तो कोई भी सम्बन्ध हमारा कल्याण नहीं कर सकता।
श्रीमद् भागवत के कथा के दौरान कई भजनों ने माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। चातुर्मास आयोजन समिति के अनुसार 20 सितम्बर तक चलने वाले श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। इस आयोजन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंचे है।
*रामद्वारा में गूंज रही भागवत की पवित्र वाणी*
श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत पुष्कर से आए विद्धान पंडितों द्वारा 108 भागवत का मूल पाठ रामद्वारा परिसर में किया जा रहा है। सुबह पाठ प्रारंभ करने से पूर्व इनका पूजन 108 यजमान परिवारों द्वारा किया गया। पूजा अर्चना के बाद विद्धानों ने भागवत का मूल पाठ किया तो पूरा वातावरण मंत्रों से पावन एवं पवित्र हो गया। जहां मूल भागवत पाठ चल रहा था उस पावन नजारे का बाहर से ही सैकड़ो श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। दुनिया के कई देशों में रहने वाले श्रद्धालुओं की भावना के अनुरूप मूल भागवत के ऑनलाइन पूजन की भी व्यवस्था की गई है।
*मानव सेवा का मंदिर बना रामस्नेही चिकित्सालय*
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि स्वामी रामचरण महाराज की पावन कृपा एवं पुण्य प्रताप से भीलवाड़ा धाम में पहले चातुर्मास के दौरान ऋषि पंचमी पर मानव सेवा के मंदिर रामस्नेही चिकित्सालय की स्थापना हुई तो मात्र 30 मिनट में 35 लाख रूपए गुरू कृपा से सनातनी धर्मावलम्बी उनके अनुयाईयों ने एकत्रित कर लिए। चिकित्सालय प्रबंध समिति सहित पूरा चिकित्सालय स्टॉफ समर्पित भाव से मानव सेवा में जुटा हुआ है। यहां रोते हुए लोग आते है ओर सेवा प्राप्त कर हंसते हुए जाते है। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा द्वारा मानव सेवा, गौवंश सेवा आदि के कई प्रकल्प संचालित किए जा रहे है। शाहपुरा धाम के द्वार पर प्रतिदिन सुबह राम कलेवा मिलता है तो कई जगह गौसेवा की जा रही है। रामस्नेही गुरूकुल संस्कार केन्द्र बना हुआ है।