ट्रॉमा सेंटर की बदहाली: बांगड़ अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने से 20 मिनट एम्बुलेंस में ही तड़पते रहे दुर्घटना के घायल
डीडवाना। राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर एक बार फिर बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में है। बुधवार को एक अचानक हुए हादसे में घायल मरीजों को अस्पताल लाने पर आपातकालीन सेवाओं की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। ट्रॉमा सेंटर के बाहर और अंदर निर्धारित स्थानों से स्ट्रेचर गायब रहने के कारण गंभीर घायलों को करीब 15 से 20 मिनट तक एम्बुलेंस में ही इंतजार करना पड़ा।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एम्बुलेंस के अस्पताल पहुंचते ही एंबुलेंस चालक और आमजन घायलों को अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर की तलाश में भटकते नजर आए। पूरे परिसर में एक भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। काफी मशक्कत के बाद एक जगह से जैसे-तैसे केवल एक स्ट्रेचर की व्यवस्था की जा सकी।व्यवस्था की नाकामी का आलम यह रहा कि एक मरीज को इमरजेंसी वार्ड के भीतर पहुंचाकर उसी स्ट्रेचर को वापस बाहर लाया गया, जिसके बाद दूसरे घायल को अंदर ले जाया जा सका। इस पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट का कीमती समय बर्बाद हो गया और मरीज दर्द से तड़पते रहे।इमरजेंसी जैसी संवेदनशील जगह पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने गहरा रोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि दुर्घटना के मामलों में एक-एक मिनट कीमती होता है, ऐसे में ट्रॉमा सेंटर पर स्ट्रेचर न होना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से ट्रॉमा सेंटर में पर्याप्त स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की स्थाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।