जिलाधिकारी ने की संभावित बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा, पदाधिकारियों को एसओपी के अनुसार सुदृढ़ तैयारी रखने का दिया निदेश
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बाढ़ आने की स्थिति में प्रभावितों के जान-माल की सुरक्षा एवं ससमय राहत पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता: क्षेत्रीय पदाधिकारीगण तुरंत रिस्पॉन्ड करेंगेः डीएम
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किसी भी स्थिति से निपटने हेतु जिला प्रशासन पूर्णतः तैयार; आपदा प्रबंधन तंत्र सजग एवं तत्परः डीएम
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डीएम ने कहाः त्रुटिरहित आपदा प्रबंधन के लिए अंतर्विभागीय समन्वय, सतर्कता एवं सक्रिय रहने की आवश्यकता; पदाधिकारी मिशन मोड में काम करें
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मुजफ्फरपुर, शनिवार, दिनांक 12.09.2026ःजिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर श्री कुमार गौरव ने कहा है कि संभावित बाढ़ से निपटने हेतु जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। संपूर्ण आपदा प्रबंधन तंत्र इसके लिए पूर्णतः सजग एवं तत्पर है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार जिला स्तर पर सभी व्यवस्था की गई है। वे आज इस विषय पर आयोजित एक बैठक में समाहरणालय स्थित सभागार में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी बाढ़ के दृष्टिकोण से सजग एवं सतर्क रहने की आवश्यकता है। भविष्य में बागमती नदी में पानी बढ़ने से कटरा, गायघाट एवं औराई क्षेत्र में प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निदेश देते हुए कहा कि मौसम विभाग द्वारा दी जा रही सूचनाओं, वर्षापात के आंकड़ों तथा नदियों के जल-स्तर पर लगातार नजर रखें। जिलाधिकारी ने कहा कि एसओपी के अनुसार क्षेत्रीय पदाधिकारी यथा अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तुरंत रिस्पॉन्ड करेंगे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग, सक्रिय एवं तत्पर रहे।
इस बैठक में जिलाधिकारी द्वारा वर्षापात, नदियों का जल-स्तर, संसाधनों की उपलब्धता, तटबंधों की सुरक्षा, दवाओं की उपलब्धता, फसल आच्छादन, वैकल्पिक एवं आकस्मिक फसल योजना, पेयजल की उपलब्धता, राजकीय नलकूपों की क्रियाशीलता, सड़कों की स्थिति इत्यादि की एक-एक कर वृहत समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारियों से अद्यतन स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने निदेश दिया कि सभी पदाधिकारी टीम भावना के साथ संवेदनशील होकर काम करें। यह सुनिश्चिित करें कि हरेक तटबंध पूर्णतः सुदृढ़ रहे। सभी सड़क मोटरेबल रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ आने की स्थिति में प्रभावितों के जान-माल की सुरक्षा एवं ससमय राहत पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जल संसाधन विभाग, पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, पी.एच.ई.डी., लघु जल संसाधन, नगर निकाय, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग सहित संबंधित सभी विभागों के पदाधिकारी आपस में सुदृढ़ समन्वय तथा सार्थक संवाद स्थापित रखें एवं परिस्थिति के अनुसार त्वरित गति से कार्य करें।
जिलाधिकारी ने अंचल अधिकारियों एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को बाढ़-पूर्व तैयारी के लिए आवश्यक सभी संसाधनों की उपलब्धता का भौतिक जाँच करने का निदेश दिया।
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जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की स्थिति में सामान्य जन-जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन दृढ़-संकल्पित है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को एसओपी के अनुसार मिशन मोड में काम करने का निदेश दिया।
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जिला में बाढ़ से निपटने हेतु 97 प्रकार की सभी आवश्यक दवा पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रवार मोबाईल (चलन्त) मेडिकल टीम को तैनात किया गया है। आवश्यक जीवन-रक्षक दवाओं की समुचित संख्या में उपलब्धता है। जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि पशु चिकित्सा हेतु 38 पशु राहत शिविरों को चिन्हित किया गया है। यहां आपदा की स्थिति में पशु चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को तैनात किया गया है। पशु चिकित्सालयों में 44 प्रकार की आवश्यक दवाइयां उपलब्ध है।
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संभावित बाढ़, 2026 की पूर्व तैयारी से संबंधित विवरण निम्नवत हैः-
1. वर्षामापक यंत्र/दैनिक वर्षापात प्रतिवेदन- मुजफ्फरपुर जिला में कुल 16 वर्षामापी यंत्र (सभी प्रखण्डों में एक-एक) तथा 385 स्वचालित वर्षामापी यंत्र (एआरजी) कार्यरत है। साथ ही 17 स्वचालित मौसम केन्द्र क्रियाशील है जिससे वर्षापात के साथ-साथ तापमान, आद्र्रता, हवा की गति एवं दिशा संबंधी आंकड़े प्राप्त होते हैं। इन आंकड़ों को जिले के वेबसाईट पर वेदर डैशबोर्ड से आम जनता भी देख सकती है। सभी एआरजी से वर्षापात के आंकड़े नियमित एवं ससमय प्राप्त हो रहे हैं।
तुलनात्मक वर्षापात की स्थितिः सामान्य एवं वास्तविक वर्षापात में जून 2026 में माईनस 91.3 एम.एम. अर्थात माईनस 55.64 प्रतिशत तथा जुलाई 2026 में माईनस 150.9 एम.एम. अर्थात माईनस 49.51 प्रतिशत का विचलन आया है। अगस्त 2026 में माईनस 144.8 एम.एम. अर्थात माईनस 49.47 प्रतिशत तथा सितंबर 2026 में माईनस 125.3 एम.एम. अर्थात माईनस 60.01 प्रतिशत का विचलन आया है।
जिलाधिकारी ने जिला सांख्यिकी पदाधिकारी को वर्षापात के आंकड़ों पर लगातार नजर रखने तथा जिला कृषि पदाधिकारी को तदनुसार विभागीय आदेशों के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया।
2. संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्र एवं संकटग्रस्त व्यक्ति-समूहों की पहचान- संभावित बाढ़, 2026 की पूर्व तैयारी के तहत बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रखंडों एवं पंचायतों में गठित अनुश्रवण समिति के सहयोग से पंचायतों, गाँवों, टोलों एवं वार्ड्स की पहचान की गई है। आपदा पीड़ित परिवारों को पीएफएमएस के माध्यम से आनुग्रहिक राहत (जीआर) का भुगतान करने हेतु सभी अंचलों द्वारा आधार सत्यापन के पश्चात प्रावधानों के अनुसार कुल 5,53,114 परिवारों की सूची आपदा सम्पूर्ति पोर्टल पर अपडेट की गई है। जिलाधिकारी ने सभी अंचल अधिकारियों को आपदा प्रबंधन विभाग के गाइडलाईंस के अनुसार आपदा की स्थिति में कार्य करने का निदेश दिया ताकि लोेगों को ससमय राहत पहुँचाई जा सके।
3. संसाधनों की उपलब्धता- अंचलाधिकारियों द्वारा 263 पंजीकृत निजी नावों के परिचालन हेतु एकरारनामा किया गया है। नावों का स्थानीय स्तर पर संबंधित अंचल अधिकारी के द्वारा आवश्यकता के अनुरूप डिप्लॉयमेंट प्लान (तैनाती की योजना) तैयार की गई है। जलप्लावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों/राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों को लाने के लिए नावों की पर्याप्त व्यवस्था है। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशानुसार 159 गोताखोरों को प्रशिक्षित किया गया है। संभावित बाढ़, 2026 की पूर्व तैयारी के तहत बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच वितरण हेतु बाढ़ राहत सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
जिला में उपलब्ध पॉलीथिन शीट्स की संख्या-38203, सरकारी नाव-15, निजी नाव-263, महाजाल-01, लाईफ जैकेट-65, इन्फ्लेटेबल लाईटिंग सिस्टम-01, प्रशिक्षित गोताखोरों की संख्या-159, चिन्हित शरण स्थलों/राहत शिविरों की संख्या-418, चिन्हित सामुदायिक रसोईघरों की संख्या-448, आपदा मित्रों की संख्या-497, सैटेलाईट फोन-05..
जिलाधिकारी ने सभी अंचल अधिकारियों एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को चिहिन्त शरण स्थलों/राहत शिविरों तथा सामुदायिक रसोईघरों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का भौतिक निरीक्षण करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि एस.ओ.पी. के अनुसार हर व्यवस्था रहनी चाहिए।
4. एसडीआरएफ की प्रतिनियुक्ति तथा मोटरबोट की स्थिति- एसडीआरएफ की 01 टीम 27 सदस्यों के साथ तैनात है। तैनात की गई टीम आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव का कार्य करेगी।
5. कोषांगों का गठन एवं जिला स्तरीय 24’7 नियंत्रण कक्ष की स्थापना- आपदा प्रबंधन हेतु 11 बाढ़ राहत कोषांग क्रियाशील है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र में जिला-स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित है जिसकी दूरभाष संख्या 0621-2212007 है।
6. मानव दवा की व्यवस्था एवं मोबाईल मेडिकल टीम - (क) सिविल सर्जन की अध्यक्षता में कमिटी का गठन किया गया है तथा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है।
(ख) संभावित बाढ़ प्रभावित कमजोर नवजात शिशु को चिन्हित किया गया है।
(ग) सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों, ब्लड बैंकों की पहचान कर ली गई है।
(घ) असामान्य स्थिति से निपटने हेतु चलन्त मेडिकल टीम का गठन सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा किया गया है।
(च) आपदा जनित मौतों तथा डायरिया इत्यादि बीमारियों के फैलाव के अनुश्रवण हेतु आईडीएसपी कोषांग क्रियाशील है। एएनएम, आशा एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा बीमारियों के लक्षण एवं बचाव हेतु आम जनता को जागरूक किया जा रहा है।
(छ) प्रखण्डवार ब्लीचिंग पाउडर, हैलोजन टेबलेट एवं लाईम पाउडर उपलब्ध है।
(ज) मानव दवा की व्यवस्था एवं मोबाईल मेडिकल टीमः-जिला में बाढ़ से निपटने हेतु 97 प्रकार की सभी आवश्यक दवा पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। मोबाईल मेडिकल टीम क्रियाशील है। असैनिक शल्य चिकित्सक-सह- सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार जिला ड्रग स्टोर तथा स्वास्थ्य संस्थानों (प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, रेफरल अस्पताल एवं अनुमंडल अस्पतालों) में ओआरएस, एंटि-रेविज वैक्सिन (एआरवी) वायल, सांप काटने की दवा (एएसवीएस) वायल, डेक्स्ट्रोज 10 प्रतिशत 500 एम.एल., डीएनएस 500 एम.एल., मैट्रोनाईडाजोल 400 एमजी टैबलेट, एनएस 500 एम.एल., ऑण्डेन्सट्रॉन इन्जेक्शन, ऑण्डेन्सट्रॉनध्डॉम्पेरिडोन, आरएल 500 एम.एल., आईवी सेट (एडल्ट), ब्लीचिंग पाउडर, लाईम पाउडर, हैलोजेन टैबलेट सहित सभी आवश्यक जीवन-रक्षक दवाएं उपलब्ध है।
7. नोडल पदाधिकारी/जिला स्तरीय टास्क फोर्स- पंचायत स्तरीय/प्रखण्ड स्तरीय नोडल पदाधिकारी/जोनल पदाधिकारी तथा सुपर जोनल पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स का भी गठन कर लिया गया है।
8. शुद्ध पेयजल की व्यवस्था- पी.एच.ई.डी. के तहत चालू चापाकलों की संख्या-मुजफ्फरपुर-21,853, मोतीपुर-21,803 ..
(ख) चापाकल मरम्मती दल सभी प्रखंडों में कार्यरत है। चापाकलों की मरम्मती मुजफ्फरपुर-2,545, मोतीपुर-2,794. चापाकल मरम्मती दल हेतु टॉल फ्री नं.- 18001231121.
जिलाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियंताओं को खराब चापाकलों को शीघ्र क्रियाशील करने एवं शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि संभावित आसन्न आपदाओं का पूर्वानुमान, ससमय एवं शीघ्र चेतावनी और आम जनता के बीच उनका प्रभावी प्रचार-प्रसार सफल आपदा प्रबंधन के मुख्य घटक हैं। प्रबंधन के विभिन्न चरणों यथा आपदा का निवारण, कमी एवं आपदा के प्रति प्रत्युत्तर के लिए सम्पूर्ण तंत्र सक्रिय है।
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पदाधिकारियों को बाढ़ से निपटने हेतु नदियों के जल-स्तर में वृद्धि तथा वर्षापात के आँकड़ों पर लगातार नजर रखने, तटबंधों की नियमित निगरानी करने एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने सहित सरकार द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार सभी तैयारी त्रुटिहीन ढंग से सुनिश्चित रखने का निदेश दिया गया है। जिला प्रशासन, नगर निगम, पथ निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग एवं अन्य विभागों तथा एजेंसियों के अधिकारियों को आपस में समन्वय स्थापित कर स्थिति के अनुसार त्वरित गति से रिस्पॉंड करने का निदेश दिया गया है। आम जनता से भी इन स्थितियों से बचाव हेतु ‘‘क्या करें एवं क्या न करें’’ का अनुपालन करने तथा इसे जन-जन तक प्रसारित करने का आह्वान किया गया है। किसी भी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र (0621-2212007) पर सम्पर्क किया जा सकता है। पदाधिकारियों को किसी की स्थिति में सामान्य जन-जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।. जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर
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विदित हो कि जिलाधिकारी द्वारा संभावित बाढ़ से निपटने हेतु तैयारी की नियमित समीक्षा की जा रही है। वे लगातार क्षेत्र भ्रमण भी कर रहे हैं। उन्होंने पदाधिकारियों को तटबंधों की लगातार पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने का निदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि संवेदनशील स्थलों पर तटबधों का सुदृढीकरण करें। संचार तंत्र एवं सूचना प्रणाली को सुदृढ़ रखें। शरण स्थलों पर मोबाइल मेडिकल टीम, शौचालय एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था रहनी चाहिए। यहां मेडिकल कैंप, शिशु टीकाकरण, प्रसव, भोजन का उपस्कर, बच्चों हेतु विशेष भोजन, मच्छरदानी, सैनिटरी किट के लिए विशेष रूप से निर्मित योजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने पुल-पुलियों एवं मुख्य सड़कों विशेषकर जिला मुख्यालय से प्रखंड को जोड़ने वाले लिंक रोड की नियमानुसार मरम्मती एवं संधारण कार्य पर विशेष ध्यान देने को कहा। जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संकटग्रस्त एवं भेद्य समुदायों का प्रशिक्षण कर क्षमता वर्धन कार्य पर विशेष ध्यान देने का निदेश दिया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि सार्थक संचार तंत्र सफल आपदा प्रबंधन की रीढ़ है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को इसे सुदृढ़ एवं सक्रिय रखने का निर्देश दिया।