हाईकोर्ट की रोक के बावजूद करोड़ों की पैतृक जमीन की बिक्री! तहसीलदार, पटवारी समेत चार पर एफआईआर
मध्यप्रदेश के डिंडौरी से करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन में कथित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि हाईकोर्ट की रोक के बावजूद फर्जी वसीयतनामा तैयार कर जमीन का नामांतरण कराया गया और बाद में उसकी बिक्री भी कर दी गई। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, तत्कालीन पटवारी और पिता-पुत्र समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला डिंडौरी जिला मुख्यालय का है। शिकायतकर्ता इंद्रपाल सोनपाली का आरोप है कि उनके नाना स्वर्गीय बालमुकुंद सोनपाली की करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक भूमि पर उच्च न्यायालय द्वारा विक्रय पर रोक लगी हुई थी। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी वसीयतनामा तैयार कर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कराया और बाद में जमीन का विक्रय कर दिया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पहले प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के निर्देश के बाद कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे, तत्कालीन पटवारी हीरेन्द्र सुर्याम, नन्दलाल सोनपाली और रोहित सोनपाली के खिलाफ कूटरचना, धोखाधड़ी एवं अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।
मामले ने राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि भूमि के विक्रय पर न्यायालय की रोक प्रभावी थी, तो नामांतरण और बिक्री की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? पुलिस अब राजस्व रिकॉर्ड, वसीयतनामा और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
फिलहाल पुलिस ने न्यायालय के आदेश के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले पर सभी पक्षों का दृष्टिकोण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आना शेष है।
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