आशा के लालच ने छीनी दो बच्चियों से मां की छाया
परिजनों ने अस्पताल के सामने किया हंगामा, घंटों जाम रहा स्टेट हाईवे
पीरो अनुमंडल क्षेत्र के बिहिया-बिहटा स्टेट हाईवे पर टीवीएस शोरूम के ऊपर संचालित मां विंध्यवासिनी अस्पताल में रविवार को प्रसव के लिए पहुंची एक महिला की ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ गई। आरा ले जाने के दौरान रास्ते में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के समीप सड़क जाम कर हंगामा किया। जाम के कारण स्टेट हाईवे पर तीन किलोमीटर से अधिक लंबी वाहनों की कतार लग गई।
मृतका की पहचान पीरो थाना क्षेत्र के सनेया गांव निवासी निर्मल कुमार सिंह की पत्नी रंजू देवी के रूप में हुई है। वह अपने पीछे दो बेटियां काजल (9) और नित्या (6) को छोड़ गई हैं। परिजनों के अनुसार रंजू रविवार दोपहर करीब दो बजे अपनी बहन मंजू देवी के साथ अस्पताल पहुंची थीं। आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत एएनएम मंजू कुमारी ने उनका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति गंभीर हो गई। नवजात को तत्काल आरा रेफर कर दिया गया और रंजू की बहन बच्चे को लेकर आरा चली गई। कुछ देर बाद रंजू की तबीयत बिगड़ने पर उसे भी आरा रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि उसे परिवार के किसी सदस्य के साथ भेजे बिना ही रवाना कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। आरा पहुंचने पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण अस्पताल के पास जुट गए और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर दिया। सूचना पर पीरो थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया। मृतका के पति के मुगलसराय से पहुंचने का इंतजार किया गया। उनके पहुंचने के बाद परिजनों की सहमति से जाम हटाया गया। इस दौरान कई घंटे तक आवागमन बाधित रहा।
स्थानीय लोगों ने अस्पताल के संचालन और वहां मरीजों के पहुंचने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और एक बार सिविल सर्जन के आदेश पर अस्पताल को सील किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल के संचालन, ऑपरेशन करने वाले कर्मियों की योग्यता और प्रसूता को रेफर किए जाने की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
घटना के बाद आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने के बजाय निजी अस्पतालों तक पहुंचाने की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।