सरहद पर देश की रक्षा, गांव में बच्चों के भविष्य की चिंता… ITBP जवान राजेंद्र धर्माणी ने पेश की सेवा और समर्पण की मिसाल
पांगी के कुठाह गांव के प्राथमिक विद्यालय को लिया गोद, बच्चों को बांटी शैक्षणिक सामग्री; गांव की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का लिया संकल्प
सुरेंद्र ठाकुर Tribal Live News
कुठाह (पांगी) 03 नवंबर 2026
वर्दी पहनकर देश की सीमाओं की रक्षा करना एक सैनिक का कर्तव्य है, लेकिन जब वही सैनिक अपने गांव लौटकर नन्हे बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी उठाए, तो उसका यह कदम समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।
ऐसी ही सराहनीय पहल ग्राम पंचायत लुज के कुठाह गांव निवासी ITBP के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र धर्माणी ने की है। देश की सुरक्षा में सेवाएं दे रहे राजेंद्र धर्माणी ने अब अपने गांव की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राजकीय प्राथमिक पाठशाला कुठाह को गोद लिया है।
बच्चों के चेहरों पर मुस्कान, शिक्षा के प्रति बढ़ाया उत्साह
इसी पहल के तहत राजेंद्र धर्माणी ने विद्यालय पहुंचकर नन्हे विद्यार्थियों को पेन, कॉपियां, पेंसिल सहित विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक सामग्री वितरित की। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी अनीता धर्माणी भी उनके साथ मौजूद रहीं। शिक्षा सामग्री पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया।
राजेंद्र धर्माणी का कहना है कि विद्यालय को गोद लेने के पीछे उनका उद्देश्य केवल शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि विद्यालय में मौजूद कमियों को दूर करने और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने में सहयोग देना है।
देश सेवा के साथ गांव के प्रति भी निभा रहे सामाजिक जिम्मेदारी
ITBP में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात राजेंद्र धर्माणी सीमाओं की सुरक्षा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन उनका सेवा भाव केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। अवकाश के दौरान जब भी वे अपने गांव आते हैं, समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने का प्रयास करते हैं।
उनकी योजना है कि आने वाले समय में विद्यालय की आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षा, खेलकूद और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में यथासंभव सहयोग किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी बेहतर अवसर मिल सकें।
पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। राजेंद्र धर्माणी की यह पहल बताती है कि यदि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार अपने गांव के विद्यालय और बच्चों के भविष्य के लिए योगदान दे, तो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
आज जब गांवों में शिक्षा और सुविधाओं को लेकर कई चुनौतियां मौजूद हैं, ऐसे में एक सैनिक का अपने गांव के विद्यालय को गोद लेना निश्चित रूप से अन्य सामाजिक संगठनों, युवाओं और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के लिए भी प्रेरणा का संदेश है।
सलाम उस जज्बे को!
एक तरफ सरहद पर तिरंगे की आन-बान-शान की रक्षा और दूसरी तरफ अपने गांव के बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास। राजेंद्र धर्माणी की यह पहल बताती है कि सच्ची सेवा की भावना किसी एक जिम्मेदारी या पद तक सीमित नहीं होती।
पांगी को ऐसे कर्मठ और समाज के प्रति संवेदनशील लोगों पर गर्व होना चाहिए।
एक सैनिक को सलाम, जिसकी सोच में सरहद भी है और अपने गांव का भविष्य भी!
आपकी राय: क्या हर गांव के सक्षम लोगों को अपने गांव के सरकारी विद्यालयों के विकास में इसी तरह योगदान देना चाहिए?
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Chamba, Chamba | Nov 3, 2026