संत सिंगाजी के जीवन और लोक कल्याण के संदेश को नृत्य-नाट्य के माध्यम से किया प्रस्तुत
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‘खेती खेड़ो हरि नाम की’ में भक्ति, त्याग और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की दिखी झलक
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निमाड़ी लोक संस्कृति के रंगों से सजी संत सिंगाजी के जीवन पर आधारित प्रभावी प्रस्तुति
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खरगोन 08 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन खरगोन के सहयोग से जिले में लोक एवं जनजातीय संस्कृति की विविध परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित ‘खेती खेड़ो हरि नाम की…’ उत्सव के अंतर्गत संत सिंगाजी के जीवन एवं लोक कल्याण के संदेश पर केंद्रित नृत्य-नाट्य की प्रभावी प्रस्तुति हुई। आयोजन में निमाड़ी लोक संस्कृति, भक्ति, आध्यात्मिकता और जनजातीय परंपराओं का सुंदर समागम देखने को मिला।
नृत्य-नाट्य में संत सिंगाजी के जीवन अवदान को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार लोक कल्याण एवं आध्यात्मिक पुनर्जागरण के लिए भगवान विष्णु की आज्ञा से ऋषि श्रृंगी ने निमाड़ के खजूरी गांव में ‘सिंगाजी’ के रूप में जन्म लिया। बाल्यावस्था में वे गायें चराते थे। प्रस्तुति में उनके द्वारा अपनी आध्यात्मिक शक्ति से अत्याचारी तांत्रिक के अहंकार को समाप्त कर उसे सन्मार्ग की ओर प्रेरित करने का प्रसंग प्रभावी ढंग से दिखाया गया।
इसके बाद सिंगाजी के भामगढ़ के राजा लखमेसिंह के यहां ‘डाकिया’ के रूप में कार्य करने और अपनी कर्तव्यनिष्ठा से पहचान बनाने के प्रसंग को मंचित किया गया। नौकरी के दौरान संत मनरंगगिरि से उनकी भेंट हुई। संत से प्रभावित होकर सिंगाजी ने गुरु-दीक्षा ग्रहण की और वैराग्य की ओर अग्रसर हुए।
नृत्य-नाट्य में संत सिंगाजी से जुड़े विभिन्न लोकप्रचलित चमत्कारों को भी दर्शाया गया। इनमें कुएं में फंसी गाय को उसकी पूंछ पकड़कर सुरक्षित बाहर निकालने तथा डाकुओं को सन्मार्ग पर लाने जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को प्रभावित किया। अंतिम दृश्य में सिंगाजी द्वारा सांसारिक बंधनों का त्याग कर पत्नी यशोदा एवं परिवार से विदा लेकर ‘निर्गुण ब्रह्म’ में लीन होने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
इस प्रस्तुति के माध्यम से भक्ति, त्याग, वैराग्य और लोक-कल्याण के आदर्शों को निमाड़ी संस्कृति एवं लोक परंपराओं के माध्यम से प्रभावी रूप से दर्शाया गया। नृत्य-नाट्य का लेखन डॉ. श्रीराम परिहार एवं श्री योगेश त्रिपाठी तथा निर्देशन श्री चंद्रमाधव बारिक ने किया।
उल्लेखनीय है कि ‘खेती खेड़ो हरि नाम की…’ उत्सव के अंतर्गत जिले के टोकसर, रावेरखेड़ी और मिटावल में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें निमाड़ी गायन, नर्मदाष्टकम् नृत्य-नाटिका, काठी नृत्य, भील जनजातीय भगोरिया नृत्य, गणगौर नृत्य एवं ‘खेती खेड़ो हरि नाम की’ नृत्य-नाट्य जैसी प्रस्तुतियां शामिल हैं।
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