रूद्रप्रयाग जिले के किमाणा-दानकोट में खिसक रही जमीन, खतरे में आशियाने!!
मकानों में दरारें, खेत और सड़क भी भूधंसाव की चपेट में, मौके पर पहुंचे प्रदीप थपलियाल, प्रशासन से तत्काल राहत और स्थायी समाधान की मांग!!
रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार तहसील के किमाणा-दानकोट गांव में लगातार हो रहे भूधंसाव और भूमि कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव में जगह-जगह जमीन खिसकने से मकानों में दरारें पड़ गई हैं, जबकि गोशालाओं और शौचालयों को भी नुकसान पहुंचा है। वर्षों की मेहनत से तैयार उपजाऊ कृषि भूमि के भूधंसाव की भेंट चढ़ने से ग्रामीणों के सामने आर्थिक संकट भी गहराने लगा है। लगातार बढ़ रही समस्या को देखते हुए ग्रामीणों में भविष्य को लेकर भय का माहौल है।
आपदा प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं रुद्रप्रयाग विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रदीप थपलियाल किमाणा-दानकोट पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात कर मौके की स्थिति जानी। ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।
भूधंसाव के साथ बदहाल सड़क ने बढ़ाई दुश्वारी
किमाणा-दानकोट क्षेत्र में आपदा के साथ ही सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए दोहरी मुसीबत बन गई है। जखोली-भीरी मोटर मार्ग पर बिनोबा धार बैंड से किमाणा-दानकोट तक सड़क कई स्थानों पर खराब है। आपदा के कारण सड़क के प्रभावित होने से ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। इससे क्षेत्र के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रदीप थपलियाल ने लोक निर्माण विभाग से सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों का तत्काल उपचार कर मार्ग को सुचारु करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर महज खानापूर्ति के बजाय वैज्ञानिक और स्थायी ट्रीटमेंट कराया जाना जरूरी है, ताकि बरसात के दौरान समस्या और गंभीर न हो।
पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों के सामने संकट
भूधंसाव की चपेट में आने से गांव की पेयजल लाइन भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने संबंधित विभाग से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की तत्काल मरम्मत कर आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
थपलियाल ने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के साथ ही भूधंसाव के कारणों और खतरे वाले क्षेत्रों का गंभीरता से तकनीकी सर्वे कराया जाना चाहिए। प्रभावित मकानों, कृषि भूमि और अन्य परिसंपत्तियों का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपाय समय रहते किए जाएं, ताकि स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण न बने।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को केवल निरीक्षण और कागजी कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई जरूरी है। प्रशासन और संबंधित विभागों को आपदा प्रभावित क्षेत्र में सड़क, पेयजल और सुरक्षा से जुड़े कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने चाहिए।