फैसला अदालत को सुनाना था... लेकिन उससे पहले ही क्लीन चिट की खबर बाहर आ गई!
उत्तराखंड के मंत्री गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है।
8 सितंबर को नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। लेकिन इसके बाद मंत्री गणेश जोशी ने मीडिया के सामने दावा कर दिया कि उनके खिलाफ दाखिल याचिका खारिज हो चुकी है और उन्हें राहत मिल गई है।
यानी अदालत का फैसला सार्वजनिक तौर पर आया नहीं था, लेकिन मंत्री की तरफ से फैसले के नतीजे की घोषणा पहले ही कर दी गई।
अब कहानी में बड़ा ट्विस्ट ये है कि जिस फैसले को लेकर मंत्री ने क्लीन चिट मिलने की बात कही थी, वो फैसला उस पीठ ने सुनाया ही नहीं।
हाईकोर्ट ने मामले को दूसरी पीठ के सामने रखने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया है। अब नई पीठ इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया है कि जब फैसला सुनाया ही नहीं गया था, तो मंत्री को उसके नतीजे की जानकारी कैसे मिली?
हालांकि, इस सवाल का अंतिम जवाब अदालत की आगे की कार्यवाही और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल इतना साफ है कि गणेश जोशी को इस मामले में हाईकोर्ट से कोई अंतिम न्यायिक ‘क्लीन चिट’ नहीं मिली है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
“फैसला आया नहीं... फिर क्लीन चिट पहले कैसे आ गई?”
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